Tag: लघुकथा

मनमुटाव

By | January 21, 2018

‘ऐसी बातो से नाराज़ नहीं होते बेटा’, कहते हुए रेणुकाजी ने ससुराल से वापस आयी बेटी को समझाया। प्रेमविवाह करके एक साल पहले विशाला दूसरे शहर गयी थी ।सबसे अच्छी घुलमिलकर प्यार से रहती थी। अपने पति से बहोत ही प्यार करनेवाली…Read More »