सृजन-गाथा

रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

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अंक-4,सितम्बर, 2006   

अपनी बातकविताछंदललित निबंधकहानीलघुकथाव्यंग्यसंस्मरण कथोपकथन भाषांतरसंस्कारपुस्तकायन

बचपनहलचलसृजनधर्मीलेखकों सेसंपादक बनेंचतुर्दिकशेष-विशेषपुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

 

इस अंक के प्रमुख आकर्षण

 

कविताएँ

बावरा अहेरी- अज्ञेय

बुनी हुई रस्सी- भवानी प्रसाद मिश्र

दिनारंभ- श्रीकांत वर्मा

वृक्षत्व- नरेश मेहता

अख़बारवाला- रघुवीर सहाय

पतझड़/कौम- इला प्रसाद

 मैं चाहती हूँ- रिम्मी बेदी

पापी कौन ?- शैलेश भारतवासी

 

छंद

पाकिस्तानी ग़ज़ल

 परवीन शाकिर इफ़्तिख़ार आरिफ़

 हिमायत अली शायर बाक़ी सिद्दीकी

क़तील शिफ़ाई अनवर शऊर

फ़ारिग़ बुखारी

 

भाषांतर

  गुजराती/ऊष्मा/दिव्या रावल  

बांग्ला/विश्व जब निद्रामग्न/टैगोर  

सिंधी/मेरे होंठों पर गीलापन/विम्मी  

ऊर्दू/विलाप/साक़ी फारुक़ी

अफ्रीका/बच्चे के लिए शेरनी का गीत

बौद्ध (थेरीगाथा)/सुमंगला

 छत्तीसगढ़ी/गठरी/डा. बिहारी लाल साहू

अँगरेज़ी/शर्मीली प्रेमिका के प्रति/मार्वेल

स्पेनी/चाँद झाँकता है/ गार्सिया लोर्का

लघुकथा

एक टोकरी-भर मिट्टी - माधवराव सप्रे

संस्कृति - हरिशंकर परसाई

समय - जोगेन्दर पाल

आश्वासन  - पी. अशोक शर्मा

 

बचपन

सीताराम गुप्त के लोकप्रिय शिशुगीत

प्रेरक प्रसंग/ वाणी का महत्व/ प्रगति

बाल कविताएँ-

   वर्षा का आनंद उठायें, अनिल द्विवेदी

   नाना जी के आँगन में, प्रमोद कुमार

व्यंग्य

गैस का सिलेण्डर-कृष्ण कुमार त्रिवेदी

बेताल कथा-2

 खास प्रजाति का अफसर/ गिरीश पंकज

शेष विशेष

भाषाःक शब्द....

लगाना- डॉ. गंगा प्रसाद बरसैंया

मीडिया-विमर्श.....

पत्रकारिता का परिदृश्य- संजय द्विवेदी

विचार.....

मृत्यु पर विजय- पुष्करलाल केडिया

लोक-आलोक....

जिन्ने ट्रिनबैगो नहिं देख्या- सुवास कुमार

तकनीक.....

इंटरनेट पर उपलब्ध हैं रोजगार-रवि श्रीवास्तव

मूल्यांकन.....

नुवादःतलवार की धार-वीरेन्द्र वरनवाल

प्रसंगवश.....

शरद जी की लेखन  सौंदर्य- राम पटवा

अंतरजाल.....

हिंदी मीडिया की दिशा बदल सकता है यूनिकोड- बालेन्दु शर्मा दाधीच

 

 

ललित निबंधों में-

अधेंरे में उम्मीद-


डॉ. श्रीराम परिहार

आदमी की हर आशा पूरी नहीं होती । न जाने कितनी आशाएँ तो कुँवार की घाम में सूखती हुई घास की तरह कुड़-मुड़ जाती हैं । कितनी अकाल मौत मर जाती हैं। परिस्थितियाँ पंखों पर सवार हो इस तरह कसती हैं कि व्यक्ति की उड़ान रुक जाती है । पिछले तीन साल का आँखों का पानी तक सुखा डालने वाला सूखा और ऊपर से मँहगाई का वज्र । इस बरस थोड़ी उम्मीद है कि दीवाली के दियों में थोड़ा तेल डबरा जाए ।

कहानियों में-

ब्रिटेन से तेजेन्द्र शर्मा की कहानी

ईंटों का जंग

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जिन्दगी-एक पहेली-बालशौरि रेड्डी

संस्मरण में-

  निर्मल वर्मा को याद करते हुए डा. कमल कुमार

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12 सितम्बर पुण्यतिथि

विख्यात कथाकार गुलेरी पर

डॉ. प्रत्यूष गुलेरी का विशेष आलेख

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अज्ञेय के साथ क्षण भर

 डॉ. बलदेव

संस्कार में

काल और सृजन

डॉ. प्रभाकर क्षोत्रिय

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नीलवादी लेखक

 विजय कुमार देव

 

कथोपकथन

सौभाग्य  है पं.नरेंद्र शर्मा की बेटी होना अमेरिका से लावण्या शाह

हम बच्चे दोपहरी में जब सारे बडे़ सो रहे थे,  पडोस के माणिक दादा के घर से कच्चे पक्के आम तोड़कर किलकारियाँ भर रहे थे किअचानक पापाजी वहाँ आ पहुँचे । गरज कर कहा, " अरे ! यह आम पूछे बिना क्यों तोडे़ ? जाओ, जाकर माफी माँगो और फल लौटा दो" । एक तो चोरी करते पकडे गए और    ऊपर    से माफी माँगनी पडी   पर अपने और पराये का भेद आज तक भूल नही पाए ।  यही उनकी शिक्षा थी ।

 

 

कृति-समीक्षा में

मेरी इक्यावन व्यंग्य रचनाएँ

गिरीश पंकज/समीक्षक-जयप्रकाश

प्रत्रकारिता पर तीन किताबें

 संजय द्विवेदी/समीक्षक-गिरीश पंकज

बाबूना जो आयेगी

डॉ. सुधा गुप्ता/समीक्षक-प्रदीप दास

चंद्रकला

डॉ.जे.आर.सोनी/ समीक्षक- डॉ.परदेशी राम

 

ग्रंथालय में- (ऑनलाइन किताबें)

गीत- गीत गाना चाहता हूँ- अजय पाठक

शोध- हिरण्यगर्भ- गौतम पटेल

उपन्यास- पछतावा-जे.आर.सोनी

 

 

 

 

पुरातन अंकों से

 

कहानियाँ

हँसते-खेलते- शंशाक

निदान-अनंत चौरसिया

कौए के पीछे बैलगाड़ी- राजेन्द्र अवस्थी

थैंक यू, अंकल- सतीश जायसवाल

मरता हुआ पेड़- शंकर

 

ललित निबंध

सड़क पर दौड़ते ईहामृग- डॉ. एस.एस. दुबे

'रोजमर्रा'- डॉ.शोभाकांत झा

वंदे मातरम्- अमृत राय

भारत होने का अर्थ- डॉ.युगेश्वर

 

व्यंग्य

 'एक और महाभारत'-  शशिकांत

प्रेस क्लब में रावण- विनोदशंकर शुक्ल

नया राजधानी रिटर्न बंदर-गिरीश पंकजमेघदूत / शरद जोशी

 

संस्मरण में

प्रेमचंद परिवार के जीवित सदस्यों में सबसे वरिष्ठ कृष्ण कुमार राय का लेख

 

संस्कार में

 कविता का सामाजिक संघर्ष

प्रेमशकर

 

प्रसंगवश 

तुलसी का रामचरित मानसः

राही मासूम रज़ा

 

कथोकपथन

डॉ.बालाशौरि रेड्डी से बातचीत

डॉ.श्यामसुंदर दुबे से अंतरंग बातचीत

रवि रतलामी से खास चर्चा

 

 

अपनी बात

कविता केन्द्र में

जयप्रकाश मानस

 

 

 

 

अपनी बातकविताछंदललित निबंधकहानीलघुकथाव्यंग्यसंस्मरण कथोपकथन भाषांतर संस्कार पुस्तकायन

बचपनहलचलसृजनधर्मीलेखकों सेसंपादक बनेंचतुर्दिकशेष-विशेषपुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

  संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः गिरीश पंकज,संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, आदेश ठाकुर चित्रकारः मृत्युंजय मिश्रा

तकनीकः प्रशांत रथ

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'सृजनगाथा' बहुआयामी सांस्कृतिक संगठन 'सृजन-सम्मान' की अव्यावसायिक मासिक पत्रिका है ।