संपादकीय कार्यालयः एफ-3, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, आवासीय कॉलोनी, रायपुर, 492001 ई-मेलः srijangatha@gmail.com

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इस अंक के प्रमुख आकर्षण

 

कविता

एक लड़की और बाकी सब-अनिल कुमार

सब का अपना आकाश-त्रिलोचन

लिखोगे तो बच जाओगे-नंद चतुर्वेदी

ये तस्वीरें-चन्द्रकांत देवताले

सलाह- इब्बार रब्बी

बहुत कुछ बीच-बाज़ार- लीलाधर मंडलोई

उसकी आवाज़ की परछाई- अमिता शर्मा

भारत-पाश

दोस्त- मोहन कुमार डहेरिया

काग़ज़ और कलम- स्वर्ण ज्योति

छंद

  नवगीत-कुंअर बेचैन, शांति सुमन, मधुर कमल दोहे-राजेन्द्र वर्मा गज़ल-कमलेश भट्ट कमल,कृष्ण सुकुमार,बशीर बद्र गीत-मणि 'मुकुल',डॉ. नथमल झँवर, जगदीश श्रीवास्तव, तारादत्त निर्विरोध, निर्मला जोशी, गिरीश पंकज

भाषांतर

कहानी

पेरेन्ट्स डेःअनुवाद एन. एस. रामकृष्ण

 

कविता

जर्मनी/निष्ठा/ रेनर मरिय रिल्के

पाकिस्तानी/आखरी पहर/ किश्वर नाहीद

इजरायली/बम का व्यास/ येहूदा अमीरवाई

चीनी/लोकगीत संगहक/ बाइ जूई  

मराठी/इंतजार/  रमेश थेटे

गढ़वाली/सूर्यग्रहण/ देवेश जोशी

पंजाबी/अंदर की आवाज़/ मनजीत कौर

उड़िया/गर्भगृह/ हर प्रसाद दास

किर्गीज/यह आवाज़.../ अल्तिनाई तेमीरोवा

लघुकथा

सिद्धेश्वर की दो लघुकथाएँ

लकीरें-अशोक मनवानी

बचपन

बाल कहानी कहानी चीं-चूँ की

बालकविताएं-

प्रमोद सोनवानी पुष्प 

शंभूलाल, शर्मा  ‘वसंत

  राजा चौरसिया

व्यंग्य

बेताल कथाःसीधा-सच्चा वकील-पंकज

दुखहरण फाइल भंडारः रवि श्रीवास्तव

मुद्दों का मुरब्बारविशंकर श्रीवास्तव

ग्रथालय(आनलाइन किताबें)

 सैरेन्ध्री  मैथिली शरण गुप्त

ललित निबंध संचयन- डॉ. शोभाकांत झा

एक गीत तुम्हारे नाम-  नथमल झँवर

 

 

ललित निबंधों में-

नारियल


विद्यानिवास मिश्र

       नारियल की बात अलग है । वह संपूर्ण जीवन है, एक कठोर आवरण में मधुर रस संहत रूप से संचित करने वाला जीवन है । जो लोकगीत मैंने पहले उद्धृत किया था उसका यही तो अभिप्राय है कि तुम संपूर्ण जीवन जियो, कठोर भी बनो, मधुर भी बनो । बिना कठोर हुए, बिना कर्तव्यपरायण हुए करुणा कहाँ से आएगी।

'मानस में शक्ति-भक्ति का संगम


विवेकी राय

कहानियों में-

एक पाठक


मक्सिम गोर्की

       लोगों से कहने के लिए मेरे पास क्या है ? क्या वे ही सब चीजें, जिन्हें हमेशा कहा-सुना जाता है, लेकिन जो आदमी को बदल कर बेहतर नहीं बनातीं? और उन विचारों तथा नीतिवचनों का प्रचार करने का मुझे क्या हक है, जिनमें न तो मैं यकीन करता हूँ और न जिन्हें मैं लाता हूँ ?

चौकीदार


उमेश द्विवेदी

 

संस्मरण में-

अमेरिका में हिंदी भाषा पर कहते हुए

नीरजा द्विवेदी

  महादेवी वर्मा को याद कर रहे हैं

डॉ. बल्देव

संस्कार में

गुरुदेव और बापू


विष्णु प्रभाकर

कथोपकथन

शर्मण्य-देश यानी जर्मनी

डॉ. महेशचन्द्र शर्मा

हिन्दी कविताओं का कोश क्यों नहीं ?

ललित कुमार

 

कृति-समीक्षा में-

 

कभी यूँ भी तो हो/ संजय विद्रोही

गीत गाना चाहता हूँ/ अजय पाठक

आलोचना की तीसरी परंपरा/ उर्मिला शिरिष

 

 

 

शेष-विशेष

आजकल...

शर्मसार हुई कालिदास की नगरीः  रहाटगांवकर

एक शब्द...

मारनाः डॉ. गंगा प्रसाद बरसैंया

लोक-आलोक...

डोगरी लोकगीतः पदमा सचदेव

 मूल्यांकन...

लघुकथा जीवन की आलोचना हैःक.कि.गोयनका

तकनीक...

भूमंडलीकरण में यूनिकोडः बालेन्दु शर्मा दाधीच

व्यक्तित्व...

डॉ. विवेकी राय-व्यक्ति और रचनाकारः गोरख नाथ तिवारी

मीडिया-विमर्श.....

मीडिया में देहरागः संजय द्विवेदी

हिंदी भाषा...

विदेशों में हिन्दी का बढता प्रभावः राकेश शर्मा

इतिहास...

व्हेनसांग और छत्तीसगढ़ः डॉ. सुधीर शर्मा

।। पिछले अंको से ।।

 

डॉ. प्रभाकर क्षोत्रिय का आलेख

काल और सृजन

तेजेन्द्र शर्मा की कहानी

ईंटों का जंग

  डा. कमल कुमार का संस्मरण

निर्मल वर्मा को याद करते हुए

डॉ. श्रीराम परिहार का ललित निबंध

 अधेंरे में उम्मीद

 

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  संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः गिरीश पंकज,संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा चित्रकारः मृत्युंजय मिश्रा

तकनीकः प्रशांत रथ

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'सृजनगाथा' बहुआयामी सांस्कृतिक संगठन 'सृजन-सम्मान' की अव्यावसायिक मासिक पत्रिका है ।

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