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एक शब्द

आजकल...शर्मसार हुई है कालिदास की नगरीः अशोक रहाटगांवकर

एक शब्द...मारनाः डॉ. गंगा प्रसाद बरसैंया

लोक-आलोक...डोगरी लोकगीतः पदमा सचदेव

मूल्यांकन...लघुकथा जीवन की आलोचना हैः कमल किशोर गोयनका

तकनीक...भूमंडलीकरण में आईटी का योगदान है यूनिकोडः बालेन्दु शर्मा दाधीच

व्यक्तित्व...डॉ. विवेकी राय : व्यक्ति और रचनाकारः गोरख नाथ तिवारी

मीडिया-विमर्श.....मीडिया में देहरागः संजय द्विवेदी

हिंदी भाषा...विदेशों में हिन्दी का बढता प्रभावः राकेश शर्मा निशीथ

इतिहास...व्हेनसांग, चीन, नागर्जुन और छत्तीसगढ़ः डॉ. सुधीर शर्मा

 

मारना

डॉ. गंगा प्रसाद बरसैंया

      

      मारना का अर्थ किसी को मारने या चोट पहुंचाने, प्रहार या आघात करने से होता है, जैसे-तमाचा मारना, घूंसा या लात मारना, लाठी या किसी औजार से मारना, कोड़े से, पत्थर से मारना। शब्द बड़े कलाकार होते हैं । जिस प्रकार सरकस के सिद्ध कलाकार अलग-अलग स्थलों पर अपने अलग-अलग करतब दिखाते हैं उसी प्रकार शब्द भी प्रसंग बदल जाने पर अपने अर्थ-रूप बदल देते हैं । यदि हम उस समय सतर्क न हुये तो पहचानने में चूक सकते हैं । 'तमाचा मारना' और 'हाथ मारना' में अन्तर है। हाथ मारने का अर्थ चोरी करने से भी होता है और चकमा या धोखा देने से भी हो सकता है। वैसे अचानक कोई लाभ हो जाने या अप्रत्याशित सफलता मिलने पर भी इसका प्रयोग किया जाता है। किसी से रकम ऐंठ लेने  या व्यापार में अकल्पित लाभ कमाने पर भी लोग इसी का सहारा लेते हैं । बात मारना भी विचित्र प्रयोग है। बात कोई छड़ी या बन्दूक तो नहीं है जो किसी को मार दी जाये लेकिन यह भी कहा जाता है कि जो बात से नहीं मरता उसे किसी और चीज से नहीं मारा जा सकता । मारना बेकार है। इसका आशय यह हुआ कि बात की मार बन्दूक की मार से भी तीखी होती है। गप्पें मारना लम्बी चौड़ी बातें करने या झूठ बोलने के लिये प्रयुक्त होता है।

 

       इसी प्रकार आँख मारना का भी प्रयोग है। यदि आँख से हथियार का काम लिया जा सकता तो विश्व का बहुत सारा धन बचाया जा सकता था। क्योंकि तब प्रहार के लिये अलग से औजार बनाने की जरूरत ही नहीं थीं । हर व्यक्ति के पास तैयार हथियार आँख होती । आँख के प्रहार से घायल रीतिकाल के अनेक युवक और युवतियाँ आज तक कराह रहे हैं । चोट दिखती नहीं और मार गहरी है। कोई दवा भी नहीं । आँख मारने का आशय इशारा करने से भी है। इसी तरह भांजी मारना किसी बने बनाये काम को अपनी कुचाल से बिगाड़ देना ताकि वह हो न सके । बनिये का डाँड़ी मरना उतना घातक नहीं है जितना भांजी मारना । डाँड़ी मारने पर कोई चीज तौल में थोड़ी-बहुत कम मिलती है पर भांजी मारे जाने पर तो सारा काम ही चौपट हो जाता है। किसी छोटे काम को बड़ा बनाकर कहने पर लोग व्यंग्य से कहते हैं - वाह गुरु, क्या शेर मारा है। इसमें ध्वनित होता है कि जो काम तुमने किया है वह महत्वपूर्ण है । दूसरी ओर एक और प्रयोग है मक्खी मारना । अब मक्खी मारना कोई उपयोगी कार्य तो नहीं । इसीलिये बेकार बैठने के लिये इसका प्रयोग किया जाता है। लोग बेकार आदमी से पूछते हैं - श्रीमान जी, आजकल आप क्या कर रहे हैं ? जी, मै इस समय मक्खी मार रहा हूँ । अर्थात् बेकार बैठा हूं । इसी प्रकार मालिक के द्वारा अत्याचार के विरुद्ध निर्बल मजदूर कहता है - मालिक पीठ मारिये,पर पेट मत मारिये । अर्थात् शारीरिक दंड भले दे दीजिये पर हमारी रोजी पर अथवा कमाई पर आघात मत कीजिये । सिर मारना भी एक प्रयोग है। काग़जों से दिन भर जूझने वाले थककर वेदना से कहते हैं कि मैं दिन भर इन काग़जों से सिर मारता रहता हूं । किसी मुर्ख व्यक्ति से चर्चा करने पर भी लोग कह देते हैं कि घंटे भर से मैं इनसे सिर मार रहा हूँ, पर कुछ समझ में ही नहीं आता । इसी प्रकार दीवाल से सिर मारने का अर्थ है निरर्थक प्रयास करना । रकम मारना यानी किसी का पैसा दबा लेना । पुलिस व्यापारियों के यहाँ, असामाजिक तत्वों के यहां छापा मारना है ।

 

      राजनीति प्रधान इस युग में लोग यहाँ-वहाँ खूब डींगें मारते हैं । लम्बी-चौड़ी बातें करते हैं । किसी खेल में जीत जाने पर लोग मैदान मारना या बाजी मारना का प्रयोग करते हैं । चाहे कहीं भी अपने आप को शामिल करने पर लोग मुह मारना या टाँग मारना कहते हैं । वैसे टाँग मारने का अर्थ काम बिगाड़ने से भी है। परिश्रम करने पर छाती मारना, बेशर्म होने जाने पर पानी मारना, क़त्ल करने पर जान से मारना, हवा करने के लिये पंखा मारना और सफाई के लिये झाड़ू मारना या कपड़ा मारना कहा जाता है । अरे भाई फलाने, जरा टेबिल पर कपड़ा तो मारना । किसी का व्यापार खराब करने पर धंधा मारना, दरवाजा बंद करने के लिये ताला मारना, घंटी बजाने के लिये गंटी मारना कहा जाता है। पैर पर कुल्हाड़ी मारना अपने कर्मों से अपना ही नुकसान किये जाने पर प्रयुक्त होता है । छलांग मारना कूदने के लिये भी है और क्रम को भंग कर आगे निकल जाने पर भी कहा जाता है। डाका मारना, घेरा मारना, जूता मारना, ठोकर मारना मौका मारना, मान मारना, मन मारना,मूठ मारना आदि सैकड़ों ऐसे प्रयोग हैं जो दिन भर हमारे काम आते हैं । यदि इनका सावधानी से प्रयोग न किया गया तो निश्चित ही अर्थ का अनर्थ हो जाता है और फिर वे हमारे स्वयं के मरने-मारने के कारण बन जाते हैं।

 

 

 

एक शब्द

आराधना भक्ति है । वह मरकर जीने का मंत्र है - महात्मा गाँधी

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