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प्रमोद सोनवानी “पुष्प” की बाल कविताएँ ।। फहर रहा है परचम ।। कोयल रानी-छेड़े सरगम, पंछी नाचे छम-छम । ऋतु राज का बगिया-बगिया, फहर रहा है परचम ।।
डाल-डाल पर आम लदें हैं, हैं जो बड़े रसीले । गुदे वाले स्वाद निराले, हैं जी पीले-पीले । देख रहें हैं बच्चे-बूढ़े, जो, भूल-भाल कर गम ।।
मन कहता है-मैं भी होता, काश कहीं इक चिड़िया । कोयल के संग मिलकर मैं तो, गीत सुनाता बढ़िया। बाग-बाग में जा-जाकर मैं, खूब फुदकता हरदम ।।
।। हमारा गाँव ।। हरी-भरी हरियाली से, गाँव हमारा सजा हुआ है। मखमल जैसी हरी घास का यहाँ बिछौना-विछा हुआ हैं।। बाड़ी-बाड़ी में देखो जी,
धनिया की खुशबू महक रही हैं ।
भिन्डी के संग हरी मिर्चियाँ , नील गगन को देख रही हैं।. सूर्यमुखी के फूलों में, भौरे भी मँडरा रहे हैं । झिंगुर अपनी शहनाई से, गीत सुहाना सुना रहे हैं।। प्रकृति की माया न्यारी, चार-चाँद यहाँ लगा हुआ हैं । हरी-भरी हरियाली से गाँव हमारा सजा हुआ हैं ।।
।। ऐसा जीवन गढ़ना ।। चिन्नू-मुन्नू से अनबन क्यों ? प्रेम-प्रीत से नित रहना । अच्छे जग में हम कहलाएँ । जीवन ऐसा है गढ़ना ।।
नफ़रत करके इस दुनिया में, कौन, क्या ? बन पाया है। बस पीछे पछताते है जी, नफ़रत की यह माया हैं । प्रेम जगाकर हर मूरत में , कर्म अमिट करते जाना ।।
जीवन में नवरंग भरें हैं, यही प्रीत की शक्ति हैं। सपनों से हम बँधे हुए हैं, जीवन की यही कश्ती हैं । आँधी-तूफाँ में डूब न पायें, इस कस्ती में सम्हल कर चलना ।।
।। आज मेरा जन्मदिन है ।।
ताक धिन-धिन, धिनाधिन है आज मेरा जन्मदिन है ।
बहुत प्यारा लग रहा घर सजा भीतर और बाहर
बहुत सुंदर, बहुत सुंदर।
खुश हैं मम्मी और पापा नाचती, गाती बहिन है ।
मिली मुझको गिफ्ट बढ़िया शिवम् ने जो चीज दी है वह लगे जादू की पुडिया ।
किसी उत्सव की खुशी को व्यक्त कर पाना कठिन है ।
सभी ने खाई मिठाई दोस्तों की टीम आई गले से मुझको लगाकर मुझे दी हँसकर बधाई ।
हार्दिक शुभकामनाएँ दे रहा मुझको सचिन है ।
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