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माह के लघुकथाकार
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डॉ. मनीषा वत्स |
रक्षा बन्धन
राजन
ने इस बार दृढ़ निश्चय किया कि वह रक्षा बन्धन पर अवश्य ही
अपनी बहन के पास जायेगा । कई महीनों से कटौती करके उसने पैसे
बचायें व बहन और उसके बच्चों के लिए कपड़े एवं उपहार खरीदे ।
एक तो उसकी बहन इतनी दूर मुंबई में रहती है और दूसरे वह बिहार
के एख कस्बे में निजी कंपनी में क्लर्क है। जैस-तैसे वह अपना व
बच्चों का गुज़ारा करता है।
किसी तरह वह राखी के एक दिन पहले ही पहुँच गया । बहन से
मिलकर बड़ा अच्छा लगा । लेकिन बहन और बहनोई में उसके आने का
उतना उत्साह नहीं था । अगले दिन वह सुबह से तैयार था
। घर
में बहुत गहमा-गहमी थी क्योंकि दिल्ली से कोई दूर के रिश्तेदार
आ रहे थे उनके स्वागत की तैयारियाँ चल रही थी उसकी बहन रजनी
मेहमान को लेने एयरपोर्ट जाने की तैयारी में थी। वहाँ से आने के
बाद मेहमान से मुलाकात हुई उनके रहने, खाने के प्रबंध में सभी
व्यस्त थे। उन्होंने मंहगे व कीमती उपहार, दिए जिन्हें पाकर
रजनी बहुत प्रसन्न थी। उनको जल्द ही वापिस जाना था। शाम तक वह
लौट गए । उनके जाने के पश्चात रजनी ने राजन से कहा
“चलो
भइया राखी बंधवा लीजिए, सुबह से फुरसत ही नहीं मिली। राखी
बाँधकर रजनी मेहमान के दिए उपहार दिखाने में व्यस्त हो गई ।
  
पर्यावरण सप्ताह
वर्षा के मौसम में हर विद्यालय में,
हर विभाग में पर्यावरण
सप्ताह मनाया जा रहा था, तो वन विभाग क्यों पीछे रह जाता ।
विद्यालय में बच्चों के द्वारा पेड़-पौधे लगवाये जा रहे थे ।
वर्मा जी भी वन-विभाग में कार्यरत हैं तथा वनों की रक्षा करना
उन्हें कटने से बचाना उनके विभाग के अन्तर्गत आता है जिससे
हमारा पर्यावरण संतुलित रह सके । पिछले सप्ताह ही वन विभाग ने
सैकड़ों वृक्ष रोपित किये है उनकी सुरक्षा के हिसाब से उन्हें
“टी
गार्ड”
से ढका भी गया है तथा पेड़ के लाभ भी सबको बताये गये । पूरा
पिछला सप्ताह काफी व्यस्तता में बीता। वर्मा जी ने अपने घर में
काफी पेड़-पौधे लगा रखे है। घर के चारों ओर अशोक के वृक्ष लगे
है पीछे की ओर फलों के पेड़ है आगे भी कुछ फूलों के पौधे लगे
है। उनका घर काफी हरा-भरा है। इन सबसे और तो कोई परेशानी नहीं
लेकिन घर के चारों ओर पत्ते गिरते है तथा घर को गंदा करते हैं।
इसलिए उन्होंने अपने घर के चारों ओर वाले ऊँचे-ऊँचे अशोक के
वृक्षों को तो कटा ही दिया साथ में फले वाले पेड़ों को भी कटा
दिया क्योंकि वे आंगन को काफी गंदा करते थे।
  
समानता
गर्विता को देखने लड़केवाले आज आ रहे थे, इसलिए पूरे घर में
गहमा-गहमी थी। अतिथि कक्ष से लेकर रसोईघर तक पूरी सफाई की गई
थी। पूरा घर दीवाली के समान चमक रहा था। एक ही लड़का हैं किसी
अच्छी कम्पनी में मैनेजर हैं
। खानदान सब अच्छा है
। बस सुषमा को
एक ही बात खल रही थी कि लड़के की माँ पुराने विचारों की है।
उसकी बेटी को सिर पर पल्लू रखना होगा सास-ससूर के हिसाब से
चलना होगा । उतनी स्वतंत्रता नहीं होगी जैसी गर्विता को इस घर
में मिली हैं । सभी औपचारिकताओं के बाद रिश्ता तय हो गया । सभी
लोग खुश थे।
गर्विता अपने भाई गौरव से दो वर्ष ही छोटी थी, गौरव के
भी बहुत अच्छे रिश्ते आ रहे थे, आखिर लड़का सी.ए. जो हैं ।
सुषमा भी चाहती थी दोनों भाई बहिनों की शादी आस-पास ही हो
जाये । अगले रविवार को लड़की देखने जाना था। घर-खानदान अच्छा
था। लड़की सुन्दर व पढ़ी लिखी थी एवं किसी कंपनी में मैनेजर थी
। सभी को लड़की बहुत पसंद आयी और रिश्ता तय कर दिया गया अंत
में लौटते समय सुषमा ने लड़की से कहा शादी के बाद अपने बाल
बढ़ा लेना और सिर पर पल्लू रखने की आदत डालना सीखों वैसे तुम
बहुत समझदार हो ।
  
परीक्षाफल
पूरे मोहल्ले में मिठाई बांटी जी रही थी, घर पर हर आने-जाने
वाले को मिठाई खिलाई जा रही थी। आखिर दीनानाथ जी के लिए बात
ऐसी थी, उनका पोता हाईस्कूल की परीक्षा में उत्तीर्ण हो गया था।
तृतीय श्रेणी आयी तो क्या हुआ वर्ष तो खराब नहीं हुआ । सभी
मिलने वाले, रिश्तेदार दीनानाथ जी को बधाई दे रहे थे और वे
बधाई लेकर फूले नहीं समा रहे थे। वहीं अंशिता यह सब देखकर
स्तब्ध थी कि उसकी तो हाईस्कूल में प्रथम श्रेणी आयी है लेकिन
न तो दादाजी उसे बधाई दे रहे है न ही अन्य बाहर वाले,जबकि भइया
को सब बधाई दे रहे है। ये बातें मासूम अंशिता की समझ से
परे थी।

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