रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

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प्रवासी-कवि

 

 

मोहन राणा

       मोहन राणा का जन्म 1964 में दिल्ली में हुआ वे मूलतः कवि हैं. उनकी कविताएँ पिछले दो दशकों में हिन्दी की कई प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं उनके चार संग्रह अब तक प्रकाशित हुए हैं :-जगह (1994), जैसे जनम कोई दरवाजा  (1997), सुबह की डाक (2002), इस छोर पर (2003) । प्रकाशनाधीन:-मोहन राणा की कविता ( मराठी अनुवाद) महाराष्ट्र अनुवाद परिषद, पत्थर हो जाएगी नदी, इतना कुछ एक साथ उनकी कविताएँ कई संपादित और संग्रहित कविता संग्रहों में भी पढ़ी जा सकती हैं  इनमें  धरती एक पुल (2004), अन्तर्लोक (2003), समय की आवाज (2002) , दस बरस (2002), कविता नदी (2002) प्रमुख काव्य संग्रह हैं.  उन्होंने युवा कवियों की कविताओं के एक काव्य संग्रह इधर की कविता (1991) का भी सह संपादन किया है. उनकी कविताएँ मराठी, अंग्रेजी, हंगेरियन और इतालवी में अनुदित हुई हैं पिछले कुछ सालों से वे ब्रिटेन में बाथ नामक शहर में निवास कर रहे हैं

 

संपर्क :-Mohan Rana, 221 Wellsway, Bath   BA2 4RZ, England, UK

 Email : mohan@rana.org.uk

 

 

 

जिसका नहीं कोई चेहरा

यह हवा का जहाज

यात्रा

यह उड़ान

यह खिड़की बादलों में,

मैं हूँ

अगर मूँद लो अपनी आँखें तुम एक पल

वह आवाज तुम्हारे मन में

जिसका नहीं कोई चेहरा ।

अस्मिता

 

क्या मैं हूँ वह नहीं

जो याद नहीं अब,

जो है वह किसी और की स्मृति नहीं क्या

जिनसे जानता पहचानता अपने आपको

मनुष्य ही नहीं पेड़- पंछी

हवा आकाश

मौन धरती

घर खिड़की

एक कविता का निश्वास !

 

 

पर ये नहीं किसी और की स्मृति क्या ?

जो याद है बस

भूलकर कुछ


 

चश्मा

 

 

कभी कभी लगाता हूँ

पर खुदको नहीं

औरों को देखने के लिए लगाता हूँ चश्मा,

कि देखूँ मैं कैसा लगता हूँ उनकी आँखों में

उनकी चुप्पी में,

कि याद आ जाए तो उन्हें आत्मलीन क्षणों में मेरी भी

आइने में अपने को देखते,

मुस्कराहट के छोर पर ।

 

 

 

 

 

प्रवासी-कवि

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