रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

संपादकीय कार्यालयः एफ-3, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, आवासीय कॉलोनी, रायपुर, 492001  ई-मेलः srijangatha@gmail.com

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इस अंक के प्रमुख आकर्षण


।। कविताएँ ।।

वरिष्ठ कवि- रमाकांत रथ

माह के कवि- गुरुदेव काश्यप

समकालीन कविता

 लीलाधर जगूड़ीजया जादवानीदीनू कश्यप

परमजीत कौरसुरेश सेनओमप्रकाश तिवारी

 

।। छंद ।।

गीत..........

 डॉ. हरिवंश प्रसाद शुक्ल 'मधुकर'

के.एल. नेमा

चौरसिया जवाहर तरुण

इब्राहीम अश्क

डॉ. रमेश बुधौलिया

कामता तिवारी राज

मुकुट सक्सेना

डॉ.कुंअर बेचैन

ग़ज़ल..........

मुस्तफ़ा हुसैन 'मुश्फ़िक'

प्रभा पाण्डे 'पुरनम'

दोहा...........

रामरज शर्मा पंकिल

डॉ. जयजयराम आनंद

रामेश्वर हरिद

 

।। भाषांतर ।।

चेक/दोपहर के अलसाये पल/पाब्लो नेरूदा

तमिल/रेखा, सार्थक मरना/अमृत गणेशन

भोजपुरी/दीप जलाया जाये/मनोज भावुक

छत्तीसगढी/शुभ-लाभ/समरथ गँवइहा

 

।। लघुकथा ।।

आईना - सुभाष चंदर

बर्दाश्त की हद - कमल चोपड़ा

जिंदा लोग - डॉ. सतीशराज पुष्करण

सात फेरों का सच- महाश्वेता चतुर्वेदी

दहलीज - आनन्द बिल्थरे

 

।। बचपन ।।

बाल कविताएँ

जुगनू - डॉ.गणेश दत्त सारस्वत

सर्दी आई - सफ़दर हाश्मी

हमसे सब कहते - निरंकार देव सेवक

प्रेरक प्रसंग

छोटा या बड़ा - भारती त्रिपाठी

बुराई की जड़ - संजुक्ता पंडा

सही निशाना - संदीप पंडा

अल्लाह का करिश्मा - गीति मिश्रा

तृप्ति का साधन - नीति मिश्रा

गंदा पानी - श्रीकांत मिश्रा

 

।। व्यंग्य ।।

जीन्स में बांके बिहारी- तपन मुखर्जी

कहीं हँस तो नहीं रहा?- पंकज अवधिया

बेतालकथा-समाजवादीमच्छर-गिरीश पंकज

 

।। शेष- विशेष ।।

आजकल...

धर्म और शिक्षा के बीचः अशोक

एक शब्द...

काटनाः डॉ. गंगा प्रसाद बरसैंया

अध्यात्म...

अष्टसिद्धि नवनिधि के दाताः गौतम पटेल

स्मरण...

बाणभट्ट की आत्मकथाः देवराज

कृतित्व...

कविता-कार्त्तिकेय विश्वम्भरनाथ उपाध्याय

इतिहास...

पुष्प की अभिलाषा  जेल में  लिखी गई थीः तपन मुखर्जी

प्रौद्योगिकी...

सीडी रोम में समाया ज्ञान रविशंकर

तकनीक...

जोड़ने वाला पुलः डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल

 

प्रवासी अंक-(ब्रिटेन में कविता)

आलेख- तेजेन्द्र शर्मा

कहानी-कब्र का मुनाफ़ाः तेजेन्द्र शर्मा

प्रवासी कविता

24 चर्चित कवियों की 72  रचनाएं

0 सत्येन्द्र श्रीवास्तव 0 प्राण शर्मा

0 सोहन राही 0 गौतम सचदेव

0 डॉ. कृष्णकुमार 0 उषा राजे सक्सेना

0 दिव्या माथुर 0 मोहन राणा  

0 पद्मेश गुप्त  0 उषा वर्मा

0 शैल अग्रवाल 0 जय वर्मा

0  ज़किया ज़ुबैरी 0 पुष्पा भार्गव

0 तोषी त्रेहन 0 श्रीमती राज मौडगिल

0 सरोज सूद 0 डा. इंदिरा आनन्द

0 रमा जोशी 0 डा.वंदना मुकेश शर्मा

0डा. कृष्ण कन्हैया 0 सर्वेश सैनी

0 चंचल जैन 0  तेजेन्द्र शर्मा

 

 

 

 

 

संपादकीय

इंटरनेट के पृष्ठों पर राज करती हिंदी

जयप्रकाश मानस

      इंटरनेट में हिंदी का विकास का प्रश्न हिंदी समाज के ज्ञान व सूचना तकनीक में पांरगत होने का प्रश्न भी है । इसका सीधा संबंध ई-गवर्नेंस से है जहाँ आनेवाले समय में कामकाज की सारी पद्धतियाँ कंप्यूटर आधारित होगी.....

 

।। पिछले अंको से ।।

आलोचना में

डॉ. प्रभाकर क्षोत्रिय का आलेख

काल और सृजन

 

ललित निबंधों में-

नारियल

विद्यानिवास मिश्र

'मानस में शक्ति-भक्ति का संगम

विवेकी राय

 डॉ. श्रीराम परिहार का ललित निबंध

 अधेंरे में उम्मीद

 

कहानियों में-

एक पाठक

मक्सिम गोर्की

तेजेन्द्र शर्मा की कहानी

ईंटों का जंग

चौकीदार

उमेश द्विवेदी

 

कथोपकथन

शर्मण्य-देश यानी जर्मनी

डॉ. महेशचन्द्र शर्मा

कविताओं का कोश क्यों नहीं ?

ललित कुमार


 

व्यंग्य में

सीधा-सच्चा वकील-गिरीश पंकज

दुखहरण फाइल भंडारः रवि श्रीवास्तव

मुद्दों का मुरब्बाःरविशंकर श्रीवास्तव

 

संस्मरण में

  डा. कमल कुमार का संस्मरण

निर्मल वर्मा को याद करते हुए

प्रेमचंद परिवार के जीवित सदस्यों में सबसे वरिष्ठ कृष्ण कुमार राय का लेख

 

 

ललित निबंधो में इस बारः

सनातन नदी : अनाम धीवर


कुबेरनाथ राय

कभी सवेरे, कभी शाम, कभी दोपहर, कभी पहर रात गये नदी की चंचलधार में तटभूमि पर बैठा-बैठा, मागुर-रोहित, बामी-बराली, रूपसी-पियासी आदि मछलियों का आखेट करता हूँ । जो संन्यासी के लिए कर्दम है, वह मेरे लिए स्वादिष्ट है। मेरी निर्दय धूर्त बंसी निर्मम ममता से रूपमयी मछलियों को खींच लाती है । वैराग्य और ममता दोनों में निर्मल हुए बिना सिद्धि नहीं मिलती ।

 सर्दी की सुखद धूप


डॉ. सन्तराम देशवाल

 

कहानी में इस बार

कुसुम- खुशवंत सिंह

पद्मबीज- सच्चिदानंद राउतराय

 

संस्मरण में पढ़िए

 

महाकवि पंत के दर्शन कराते हुए

 ड़ॉ. बल्देव

 

संस्कारित करने वाली रचना

 

 रोटी का मोर्चा और संस्कृति- जैनेन्द्र कुमार

 

कथोपकथन

 

इंटरनेट आधारित मीडिया अपनी स्वतंत्र पहचान बना चुका है-बालेन्दु शर्मा दाधीच

हिंदी कंप्यूटिंग सही मायने में तब सफल होगी जब हिंदी में शिक्षित ऐसा व्यक्ति, जो अंगरेज़ी बिल्कुल नहीं जानता, कंप्यूटर पर काम करने में समर्थ हो जाए। यानी कि डिजिटल डिवाइड अपने वास्तविक अर्थों में समाप्त हो


कृति समीक्षा में

मिथ्या मंजिल/ अशोक मनवानी

व्यक्तित्व-निर्माण में भाषा / डॉ.चित्तरंजन कर

गीत हमारे अर्थ तुम्हारे/</