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काटना |
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डॉ.गंगाप्रसाद बरसैया |
काटना
का सरल सा अर्थ किसी अस्त्र के द्वारा एक वस्तु को
एकाधिक भागों में विभाजित करने से है, जैसे-सब्जी काटना, कपड़ा
काटना आदि । लेकिन अन्य शब्दों के साथ यह काटने की क्रिया
विभिन्न संदर्भों में अपना अर्थ-रुप बदलती चलती है । जहाँ
व्यंगार्थ प्रमुख होता है। कान काटना इसी प्रकार का प्रयोग
है । अभिधार्थ में कान काटने की बात है -
लेकिन
इसका लाक्षणिक अर्थ और ही हैं
। दुनियादारी में चलता-पुर्जा
है । नाक काट ली जाए तो कानूनन दण्ड है लेकिन साहित्य के
क्षेत्र में या दैनिक जीवन की कहावतों में इन सबके प्रयोग
की छूट है । नाक काटने का अर्थ है किसी की बेइज्जती करना
या प्रतिष्ठा
गिराना । अपने को दूसरे से अधिक महत्वपूर्ण सिद्ध करना । नाक कटना भी कुछ इसी प्रकार का प्रयोग है
लेकिन इज्जत खराब करना और इज्जत
खराब हो गई में जो अन्तर
है, वही अन्तर नाक काटना और नाक कटना में है
- जरा से
छोकरे ने नामी पहलवान को पछाड़कर उसकी नाक काट ली । उससे
हार जाने से उस नामी पहलवान की नाक कट गई ।
अक्सर कहते सुना जाता है कि मैं पेट काटकर ऐसा कार्य कर
रहा हूँ (चाहे
अपने पेट काटने की बात हो या औरों के) यह भी
साधारण प्रयोग नहीं । पेट काटने का अर्थ है-दुःख सहना,
कठिनाइयाँ झेलना, परेशानियाँ उठाना, सामर्थ्य से अधिक
कार्य करना । मुझ में सामर्थ्य नहीं कि बच्चों को पढा़
सकूं, फिर भी भविष्य बनाने के लिये पेट काट कर काम चलाता
हूँ । स्वयं के कष्टों का ख्याल न करना । पेट काटना का एक
अर्थ और है - कंजूसी करना । यह पेट काटना पहिले वाले पेट
काटने से भिन्न है । पहिले में असामर्थ्य एवं विवशता है,
दूसरे में सामर्थ्य होकर भी उदारता पूर्वक खर्च न करने को
प्रवृत्ति है ।
हाथ-पांव काटना का प्रयोग भी हमें मिलता है । जब एक
व्यक्ति दूसरे को असमर्थ बना दे या दैवी आपत्ति का शिकार
बन जावे तब ऐसा प्रयोग होता है। हाथ-पांव काटना की तरह री
हाथ पांव कटना भी प्रयुक्त होता है । किसान के बैल की
मृत्यु होना –
किसान का हाथ कटना है। सेठ द्वारा कर्ज के बदले बैल का
जबर्दस्ती ने जाना किसान के हाध काटना है । पेट काटने की
असमर्थता और इस हाथ-पांव कटने की असमर्थता की भावनाओं में
भी अन्तर है ।
बात काटना का प्रयोग तो दैनिक जीवन में रोज ही सुनने को
मिलता है । बात काटना खराब माना जाता है । अतः प्रयास
किया जाता है कि बात काटने या बात काटने-कटने का अवसर ही
न आए । बात कोई लकडी़ नहीं है जिसे बसूले से काटकर
टुकडे़-टुकड़े कर दिया जाये । दो व्यक्तियों के आपसी
तर्क-वितर्क, खंडन आदि के अर्थ में इसे ग्रहण किया जाता है
। अस्वीकृति एवं विरोध के भाव यहाँ प्रमुख हैं । बात काटना
का अर्थ इज्जत बर्बाद होना भी है । प्रायः कहा जाता है कि
मैंने ज़बान दे दी है
या बात दे दी है उसे काटना नहीं चाहिये । यह मेरी
प्रतिष्ठा का प्रश्न है । बात बनी रहने के लिये अनेक
प्रयास किये जाते हैं ।
रास्ता काटना धार्मिक दृष्टि से अशुभ माना जाता है ।
बिल्ली द्वारा रास्ता काटा
जाना ऐसी ही बात है । यह अशुभ भविष्य का प्रतीक माना गया है । लोग
ऐसी घटना घटने पर वहीं रोक देते हैं । लेकिन जब किसी बड़ी मंजिल के रास्ते के
बोझ के कम करने की बात होती है तो उस रास्ता काटने का अर्थ
अलग हो जाता है । गप्पों में रास्ता कट गया, गीतों में
रास्ता काटा गया आदि ।
खेत काटना का अर्थ फसल काटना है, लेकिन जब यह कहा जाए कि
अमुख ने मेरा अहित क्यों किया या अमुक मुझ से क्यों नाराज
है क्या मैंने उसका खेत काट लिया है
–
तो उसका अर्थ अहित करना या बुरा करने से होता है । सर
काटना या गला काटना का अर्थ स्पष्ट है किसी का अहित
निर्ममता पूर्वक कर देना । लेकिन त्याग व बलिदान जब दूसरों
के लिए किया जाता है तो उसे सिर काटना कहा जाता है । सर
काटकर रखना का आशय पूर्णरुपेण विश्वास दिलाना । बलिदान कर
देना । सर काटना का अर्थ जान से मार डालना भी है । धमकी
देने के लिये प्रायः कहा जाता है कि मैं तुम्हारा गला काट
डालूँगा ।
पत्ती काटना या पतंग काटना आज के युगीन जीवन का मनोरंजक
प्रयोग बन गया है । जब कोई दूसरो को पराजित करता है तो कहा
जाता है, अमुक ने अमुक की पतंग ही काट दी या पत्ती काट दी ।
‘बुरी
कटी’
भी ऐसा ही शब्द है । जड़ से काटना ।
किसी को उखाड़ देना । कट गई का आशय है, पराजय हो गई । नाम
काटना का आशय है किसी को किसी जगह से हटा देना या पदच्युत
कर देना है । लेकिन
‘दाँत
काटी रोटी’
का अर्थ दुश्मनी में नहीं गहरी दोस्ती के रुप में लिया जाता
है । जब किसी की गहरी मित्रता होती है तभी कहा जाता है
अमुक की अमुक से दाँत काटी रोटी है । लेकिन
‘रात
नहीं कटती’
या
‘समय
नहीं कटता’
का अर्थ है समय बीत नहीं रहा । जीभ काटना या जबान काटना का
भी प्रयोग किया जाता है । आगे बात की तो जबान काट लूंगा
अर्थात बोलने नहीं दूंगा या बोलने लायक नहीं रहने दूँगा ।
यह धमकी है। जेब काटने की बातें रोज की जाती हैं । रकम
खोकर लोग प्रायःकहते हैं
–जेब
कट गई या किसी ने टेब काट ली या माल काटने का आशय भारी लाभ
कमाने से है । आजकल बह खूब माल काट रहा है । कलम काटना भी
सुना जाता है । बागवानी में इसका महत्व है । कलम कटवाई
जाती है। ‘काटने
दौड़ना’
सुना होगा जिसका आशय है बात-बात में खीझना, गुस्सा होना ।
घर काटना का अर्थ घर की जायजाद इधर-उधर करना । अमुक तो
अमुक का घर काट रहा है । काटने दौड़ना कुत्ते आदि की आदत
होती है लेकिन विपरीत स्थितियों में अकेले होने पर लोग
प्रायः कहते हैं घर काटने दौड़ता है । अर्थात् घर अच्छा
नहीं लगता । जूता काटने का अनुभव तो सभी करते हैं। जिस
जिन्दगी को जीते हैं उसके लुए भी कटने-काटने की बात कही
जाती है । बस भाई,किसी तरह कर रही है । दुर्घटना से बचने
पर कहा जाता है घड़ी कट गई । अर्थात् मरते-मरते बचे ।
मुसीबत कटी अर्थात झंझट खतम हुई । तिल तिल कर कटना भी प्रयोग
है । और शब्द काट रहे हैं अर्थात् व्यथित करते
हैं, चोट पहुँचाते हैं । इस प्रकार काटना शब्द की महिमा कम
नहीं है ।