|
|
||||||||||||||
|
|
||||||||||||||
|
|||||||||||||||
|
◊अपनी बात◊कविता◊छंद◊ललित निबंध◊कहानी◊लघुकथा◊व्यंग्य◊संस्मरण◊ कथोपकथन◊ भाषांतर◊संस्कार◊पुस्तकायन ◊बचपन◊हलचल◊विशेषांक◊सृजनधर्मी◊लेखकों से◊संपादक बनें◊चतुर्दिक्◊शेष-विशेष◊पुरातनअंक◊अभिमत◊मुख्यपृष्ठ |
|
|||||||||||||
|
पुस्तकायन |
|
पुस्तकायन |
|||||||||||||
|
कथातत्व प्रधान रोचक कहानियाँ रमश नैयर
हिंदी और अंगरेज़ी में लंबे समय तक साहित्य और पत्रकारिता में समरसतापूर्ण संबंध रहे । अच्छे पत्रकार लगभग अनिवार्यतः अच्छे लेखक भी होते थे । लगभग आधी सदी पहले तक यह परंपरा चलती रही थी । छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता में स्व. मधुकर खेर एक सुपरिचित और सम्मानित हस्ताक्षर थे । उन्होंने पत्रकारिता उस दौर में शुरू की थी, जब अखबारी लेखन साहित्य के संस्कारों से दीक्षित हुआ करता था । कहने की आवश्यकता नहीं कि पत्रकारिता और साहित्यिक लेखन में साहचर्य था । साहित्य तब पत्रकारिता को एक दृष्टि देता था, शब्दों के अनुशासन में कसता था और संवेदना-संपन्न करता था । तब यह धारणा विकसित नहीं की गई थी कि पत्रकारिता किसी भी स्थापित साहित्यकार के लेखन का श्मशान बन जाती है ।
मधुकर खेर ने अपनी आजीविका साहित्यिक लेखन से शुरू की थी । उन्होंने सन् 42-43 से लगभग 1960 तक हिंदी में कहानियाँ, एकांकी, नाटक और व्यंग्य लिखे । एक कहानीकार के रूप में उन्हें राष्ट्रीय पहचान भी मिली। उनकी कहानियाँ हिंदी की प्रायः हर बड़ी पत्रिका में प्रकाशित हुईं । श्री खेर की दो सौ से अधिक कहानियाँ प्रकाशित हुईं । परंतु अपनी रचनाओं को सहेजकर रखने के प्रति वह असावधान रहे ।
नया कश्मीर श्री खेर की 28 कहानियों का संकलन है । ये कहानियाँ 1942 से 1955 के बीच प्रकाशित हुईं थीं। ये कहानियाँ रोचक हैं । इनमें कथातत्व प्रधान हैं । ये कहानियाँ अपने समय तथा समाज के अक्स पेश करती हैं। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्षपूर्ण वर्षों के दौरान प्रकाशित अनेक कहानियों में राष्ट्र के प्रति उत्सर्ग की कामना, आजादी के लिए सब कुछ निसार कर देने का ज़ज्बा और स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग की छवियाँ मिलती हैं । आजादी के आरंभिक वर्षों के राष्ट्र निर्माण के स्वप्न इनमें झिलमिलाते हैं । तत्कालीन घटनाक्रम और समस्याओं का चित्रण इन कहानियों में मिलता है । कबायलियों के वेश में कश्मीर पर पाकिस्तान के आक्रमण और हैदराबाद में रज़ाकारों की भूमिका पर आधारित दो कहानियाँ इस संग्रह में हैं । कुछ कहानियाँ शिल्प की कसौटी पर कमजरो प्रतीत होती हैं । इनमें भावुकता और रूमान को कहीं-कहीं आवश्यकता से अधिक महत्व दिया गया है। फिर भी अधिकतर कहानियाँ आदर्श तथा उदात्त जीवन-मूल्यों से अनुप्रेरित हैं । पिछली सदी के चौंथे और पाँचवे दशक की जीवन-दृष्टि और सामाजिक मूल्यों का आभास ये कहानियाँ कराती हैं । n कृति:नया कश्मीर n लेखक: मधुकर खेर n प्रकाशक: रायपुर प्रेस क्लब, मोतीबाग, रायपुर n मूल्यः 150 रुपए n पृष्ठः 152
संचालक, छत्तीसगढ़ हिंदी ग्रंथ अकादमी, रायपुर, छत्तीसगढ़
|
|||||||||||||||
|
|||||||||||||||
|
|
|||||||||||||||
|
|||||||||||||||
|
|||||||||||||||