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◊अपनी बात◊कविता◊छंद◊ललित निबंध◊कहानी◊लघुकथा◊व्यंग्य◊संस्मरण◊ कथोपकथन◊ भाषांतर◊संस्कार◊पुस्तकायन ◊बचपन◊हलचल◊विशेषांक◊सृजनधर्मी◊लेखकों से◊संपादक बनें◊चतुर्दिक्◊शेष-विशेष◊पुरातनअंक◊अभिमत◊मुख्यपृष्ठ |
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इस अंक में पढिए ।। कविताएँ ।।
।। छंद ।। गीत-ग़ज़ल-हायकु
।। शेष- विशेष ।। हस्ताक्षर... पत्रावली...
मीडिया-विमर्श.....
इन दिनों...
विचार...
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।। संपादकीय ।। जयप्रकाश मानस इस अंक के साथ सृजनगाथा अपना एक वर्ष पूर्ण करने जा रहा है । एक वर्ष का समय यूं तो अधिक नहीं होता परन्तु विगत 12 माह में जिस तरह रचनाधर्मियों ने हमारा साथ दिया वह उत्साह को द्विगुणित करता है । नये जोश से काम करने के पीछे जो ऊर्जा हमारे आसपास नज़र आ रही है उसमें देश-विदेश से प्राप्त रचनात्मक सहयोग और आलोचनात्मक परामर्श का अहम् हिस्सा है । यदि ऐसा न होता तो कदाचित् हम अंतरजाल पर एक सार्थक हस्तक्षेप नहीं कर पाते । हम इस अवसर पर ब्रिटेन के उन साहित्यकारों को भी साधुवाद देना चाहते हैं जिनके बिना ब्रिट्रेन का प्रवासी कविता अंक प्रकाशित नहीं हो सकता था । हिंदी ग़ज़ल अंक को भी हम इसी क्रम में रखते हैं और उसके लिए रचनाकारों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं । जिन सुधि पाठकों ने अपनी प्रतिक्रिया से हमें राह दिखाया उन्हें याद करना हमारी नैतिकता है । सृजनगाथा इस खास बेला पर अपने स्तम्भकारों के सहयोग का भी ज़िक्र करना चाहती है जिन्होंने अपनी क्षमता और श्रम हमारे नाम किया ।.......
आगामी आकर्षण - हर बार लिखेंगे - एक कहानी - सूरज प्रकाश चीन की डायरी - राजनंदन अमेरिका की डायरी - लावण्या शाह |
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विश्व हिंदी सम्मेलन पर विशेष
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ललित निबंधों में इस बारः
कहानी में इस बारः
व्यंग्य मेः
संस्मरण मेः
कथोपकथन मेः
संस्कार मेः मीडियाविशेषज्ञ महावीर सिंह की कलम से बता रहे हैं आलोचक गोपाल राय
कृति समीक्षा मेः
ग्रंथालय मे (ऑनलाइन किताबें)
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