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प्रवासी कविता |
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प्रवासी कविता |
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प्रवासी कविता - चीन से राजनंदन
भाई दो तरह के होते हैं आमतौर पर भाई एक कूम्भकरण दूसरा विभिषण कूम्भकरण भाई को पहले समझाता है फिर परिस्थितियाँ समझकर भाई का धर्म निभाता है । विभिषण पहले भाई को डराता है फिर परिस्थितियाँ बदलकर भाई के दुशमन से मिल जाता है ।
सुंदरता जिस ढिंढोर सुन्दरता की प्रशंसा करके दुनिया के बडे़-बडे़ पारखी तीर वीर गंभीर कभी नही अघाते । मैं क्यों पाता हूँ उनकी अदाओं को कुटिलता से अपने उपर इतराते मेंरा मूँह चिढाते । उफ ! मैं कैसा देहाती हूँ मुझे तो उस विश्वसुंदरी में होशियारी के सिवा दूर-दूर तक सुंदरता के कहीं कोई लक्षण नज़र हीं नही आते । जाने-माने सौंदर्य विशेषज्ञों की कलम कूँची और कैंची से सज-सँवर कर देशी-विलायती विभिन्न मुद्राओं में आहें भरकर हँस विहँसकर भी उनकी अदायें उनके सौंदर्य मन को उस भाव से नही लुभाते । जैसा कि कई बार मैले-कुचैले वस्त्रों और धूल भरे चेहरों में छुपी हुई सौंदर्य प्रतिमूर्तियाँ लुभा ले जाती हैं मन बिना किसी अदा के अपने माथे पर कंक्रीट और ईंट उठाते-उठाते ।
मुख्य क्वालिटी कंट्रोलर(फैब्रिक) हांगजाऊ, चीन
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