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हाइकु |
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हाइकु |
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कुछ हाइकु
मिलों ने सिगरेंटे निषेध कहाँ
भाग्य के पाँव संघर्ष तो करिए भारी करने
फैल चुके हैं नागफनी से रिश्ते गाँव-शहर
000
माता, भार्या, भगिनी और काली भी
ताना चादर सुबह उठा, देखा पाँव बाहर
नौ-दो-ग्यारह पकड़ाए फिर तो बजे बारह
000
मानसूनी पिपासा उपायहीन
दगा दे जाते काले-काले बादल सूखा ही सूखा
मेघ देखता लिए हुए औजार वह किसान
000
आश्वासनों पे ज़िंदा जीते जी मुर्दा
ढोल में पोल सब कुछ है गोल पोल तो खोल
सुविधा भोगी अधिकाधिक रोगी कहते योगी
000
सबसे बड़ा सुख निरोगी काया
मेघ गरजा होगी वर्षा ही नहीं गिरेगा ग़ाज
मुस्कुराहट भली लगे बशर्ते कुटिल न हो
000
प्यास बैठी आँगन बारिश रात
बेटी की शादी बजती शहनाई बिजली गिरी
चिड़िया रानी ठंड से ठिठुरती कमरे आयी
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