रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

अंक - 12, मई, 2007

  संपादकीय कार्यालयः एफ-3, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, आवासीय कॉलोनी, रायपुर, 492001 ई-मेलः srijangatha@gmail.com

 

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गीत

सृजनगाथा का एक साल

सहभागी लेखकों को बधाई

गीत

 

दो गीतः डॉ.देवीप्रसाद वर्मा

 

तेज

चाँद मुझसे बोलता है

 

सुघर मेरी चाँदनी है

यह मिलन की यामिनी है 

क्यों निराशा का तिमिर जब

ज्योति की छाया घनी है

 

क्यों न अपनी ग्रंथियों को

तू स्वयं ही खोलता है ।

 

यह तरल होती जवानी

एक ही उसकी कहानी

आज है तो कल नहीं है

यह जवानी की जुबानी

 

आत्मा के तेज को क्यों

तू तिमिर में घोलता है ।

 

कौन

सो रहा है गाँव सारा

नींद मुझको ही न आती

याद यह किसकी सताती

रात भर मुझको जगाती

 

सो रहा भीमा सरोवर

सो रहा कुटरा पसर कर

उँघता मैदान थक कर

हो रहा सुनसान पथ पर

 

गोद में लेकर नहीं क्यों

नींद है मुझको सुलाती ।

 

नैन में चिर जागरण है

दग्ध क्यों अंतःकरण है

कौन सा ऋण है कि जिससे

मन नहीं होता उऋण है

 

चुक रहा है तेल

केवल जल रही एक बाती ।

  डॉ. देवीप्रसाद वर्मा

1, नगर मार्ग, चौबे कॉलोनी,

रायपुर, छत्तीसगढ़

 

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