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बचपन |
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बचपन |
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गोविंद शर्मा की कुछ बालकविताएं हरियल तोता हरा हरा मैं हरियल तोता पिंचरे में ही जगता सोता सारे सुख हैं मेरे पास । मुझसे बहुत दूर आकाश !
पानी पानी जब भी मिलते चूहा बिल्ली दोनों होते पानी पानी । बिल्ली जी के मूँह में पानी चूहें की आँखों में पानी ।।
दर्जी भालू जी, औ बंदर जी । जंगल के थे दरजी जी ।। पहले आया मोटा हाथी । साथ एक था उसका साथी ।। लगे नापने उसका सीना । दोनों का बह चला पसीना । फीता कैंची सभी छोड़कर । बोले दोनों हाथ जोड़कर ।। हम सीते हैं कोट-पेंट । नहीं बनाते तंबू टेंट ।।
पेटू खाते खाते उसका पेट । एक बन गया इंडिया गेट ।। उसको दुख है वह सुकुमार । बना नहीं कुतुबमीनार ।।
वोट वोट देने पहले पहले । आया था सीधा पप्पू ।। सभी रह गये उसे देखते । वोट ले गया लड्डू ।। वोट देने फिर आई । चुलबुली एक बेबी ।। सभी रह गये देखते । वोट ले गई जलेबी । वोट देने फिर आई । बच्चों की भीड़, काफी ।। वोट ले गया पैकट । जिसमें थी टॉफी ।
तोता राम मेरे घर हैं तोताराम । पिंजरे में करते आराम ।। सब लेतें हैं उसका नाम ।। सुबह सुबह करते प्रणाम ।। मुझको लगता प्यारा पंछी । लगता है बेचारा पंछी ।। होता है वह कभी उदास । मुझको होता है आभास ।। पिंजरा लेकर जाऊँ दौड़ । इसको बन में आऊँ छोड़ ।
440, सेक्टर -1, नई आबादी, संगरिया राजस्थान - 335063
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