Text Box: कविता
शमशेर बहादुर सिंह । एकांत श्रीवास्तव  विजय राठौर । मानोशी चटर्जी
 माह के कवि- राजेश गनोदवाले
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 छंद 
अशोक अंजुम । सलीम अख़्तर । अमर साहनी  हरि ठाकुर । अजय पाठक । पूर्णिमा वर्मन  
डॉ भागवत शरण अग्रवाल । शंकर सक्सेना
 माह के गीतकार- संतोष रंजन
 ● 
 
लघुकथा
सतीशराज पुष्करणा । हसन जमाल 
डा. नरेन्द्रनाथ लाहा । मीनाक्षी जिजीविषा 
माह के लघुकथाकार- राम पटवा
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बचपन
  डॉ. मालती शर्मा । उपेन्द्रनाथ अश्क   
 प्रगति रथ     
 माह के बालकवि- शंभुलाल शर्मा 'वसंत'
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भाषांतर 
 संस्कृत- प्रो. ईश्वरशरण पाण्डेय
 मराठी- भगवान ठग
 बांग्ला- चंद्रप्रभा पांडेय
 ऊर्दू- कासिम नदीम
 मलयालम-रति सक्सेना 
 छत्तीसगढ़ी- जय प्रकाश मानस
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Text Box:  
 
 
 
कथोपकथन
प्रख्यात रचनाकार डॉ.बालाशौरि रेड्डी से बातचीत 
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संस्कार
विख्यात आलोचक डॉ. प्रमोद वर्मा का आलेख
'समय, समाज और त्वरित लेखन'
  ●
 
संस्मरण
वरिष्ठ छायाचित्रकार एस.अहमद का
 यात्रा संस्मरण
बार के जंगल बुला रहे हैं
  ●
 
व्यंग्य
व्यंग्यकार शशिकांत की रचना
'एक और महाभारत' 
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पुस्तकायन
 इतने गुमान/ कवि-सुदीप बनर्जी
 वृक्षों के हक में/गीतकार-मुकेश गौतम
 हँसी एक नाव-सी/ गीतकार- हरि ठाकुर
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सर्जना
परखिए अपनी सर्जनात्मकता
 ●
 
Text Box:  
लेखकों से-
‘सृजनगाथा’ रचनाधर्मिता के लिए समर्पित तथा अव्यवसायिक अंतरजाल पत्रिका है जिसकी श्रीवृद्धि आप की सदाशयता, एवं सक्रियता पर निर्भर है । यहाँ सभी विधाओं की रचनाओं का स्वागत है ......
Text Box: ●संपादकः जयप्रकाश मानस ●संपादक मंडलः राम पटवा,संतोष रंजन,डॉ.सुधीर शर्मा,आदेश ठाकुर ●तकनीकः  प्रशांत रथ

 

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प्रवेशांक, जून, 2006

सृजनगाथा  

रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Text Box: -अंतरजाल में पहलीबार-
क्रियाशील रचनाकारों के लिए स्वर्णिम अवसर  
 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ललित निबंध में

डॉ.शोभाकांत झा की रचना

'रोजमर्रा'

बहुत से अदमी शक्ल-सूरत से आदमी जरूर होते हैं, किंतु अपनी आदत और रोजमर्रे के ऐसे बिन बिके गुलाम होते हैं कि आदमियत को उनके आदमी होने पर शक होने लगता है। न वे सोनहा बिहान को आँखों में भर पाते न परी-सी शाम को।

 

 

कहानी में

प्रख्यात संपादक

राजेन्द्र अवस्थी  की कहानी

कौए के पीछे बैलगाड़ी

बचपन के गीत, बचपन के बीतते-बीतते अपने-आप डूब जाते हैं, जैसे सबेरे के सूरज के पहले ही आसमान के तारों को एक-एक कर नीचे समंदर में कूद जाना पड़ता है; मानो कोई ग्वाला उनके पीछे लगा, उन्हें इसके लिए विवश कर रहा है। रसीली क्या करती ? गाड़ी के चक्के की तरह जिंदगी घूम रही है। आदमी उसकी लीक पर खड़ा है। ....

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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'सृजनगाथा' बहुआयामी सांस्कृतिक संगठन 'सृजन-सम्मान' की अव्यावसायिक मासिक पत्रिका है ।

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