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कंप्यूटर वायरस से बचने के उपाय |
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रविशंकर श्रीवास्तव |
कुछ
समय पहले आप सभी ने सुना पढ़ा होगा कि आई लव यू नाम के
कंप्यूटर वायरस ने समस्त विश्व में तहलका मचाते हुए काफी
लोगों के कंप्यूटरों में,
जिनमें नामी कंपनियां भी शामिल हैं,
और जिनके कंप्यूटर सिस्टम में अति आधुनिक एंटी वायरस
साफ्टवेयर थे,
काफी नुकसान पंहुचाया। कुछ समय पूर्व तक कंप्यूटरों में
वायरस आपस में बदली जाकर उपयोग में लाने वाले फ्लापी के
द्वारा तथा नेटवर्क से जुडे क़ंप्यूटरों के द्वारा आते थे।
मगर आज प्राय: हर दूसरा कंप्यूटर इंटरनेट से जुड़ रहा है और
अब वायरस से नुकसान पंहुचने का सबसे ज्यादा खतरा इंटरनेट
से ही है। यही कारण है कि आजकल प्राय: सभी वायरस इंटरनेट
के द्वारा ही फैलाए जाते हैं जैसा कि आई लव यू नाम के
वायरस के मामले में हुआ। एक अनुमान के अनुसार,
वर्तमान में
28000
से भी ज्यादा प्रकार के कंप्यूटर वायरस विश्व में जारी हो
चुके हैं और नित्य नए वायरसों का जारी किया जाना जारी है,
लिहाजा आपके कंप्यूटर का इन वायरसों से संक्रमित होने का
खतरा दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में जरूरी है कि हम
जानें कि इन वायरसों से कैसे बचा जाए,
और अगर वायरस से अपना कंप्यूटर ग्रसित हो गया हो तो फिर
क्या किया जाए कि ज्यादा नुकसान न हो।
आखिर क्या हैं कंप्यूटर वायरस?
एक कंप्यूटर वायरस आमतौर पर कंप्यूटर प्रोग्राम ही होता है,
जिसे कुछ शातिर,
बदमाश किस्म के कंप्यूटर प्रोग्रामरों
द्वारा नुकसान पंहुचाने के उद्देश्य से तथा कुछ नौसिखिए
किशोरों द्वारा अपना ज्ञान बघारने के उद्देश्य से लिखा
जाता है। कंप्यूटर वायरस इस प्रकार से लिखे जाते हैं कि वे
अपनी कापी खुद तैयार कर लेते हैं और विभिन्न कंप्यूटरों
में विभिन्न रास्तों से अपने आप ही फैल जाते हैं। उदाहरण
के लिए मेलिसा नाम का वायरस ई-मेल के रास्ते से विश्व के
हजारों कंप्यूटरों में एक दिन में ही फैल गया और करोड़ों
रूपयों का नुकसान कर गया। वायरसों के कुछ अन्य प्रकार हैं
वार्म तथा ठ्रोजन। बूट सेक्टर के वायरस आपके कंप्यूटरों के
बूट सेक्टरों को नुकसान पंहुचा कर आपके सिस्टम को कार्य
करने के अयोग्य बना देते हैं। प्रोग्राम या फाइल वायरस
किसी भी फाइल में अटेच होकर प्राय: सभी तरह के अवांछित काम
कर सकने में समर्थ होते हैं जैसे कि एक वायरस का प्रकार
आपके कंप्यूटर के संक्रमित होने के उपरांत आपके कंप्यूटर
को सीधे ही इंटरनेट की पोर्नोग्राफिक साइटों पर ले जाता
है। मेक्रो वायरस वर्ड डाकुमेंट के द्वारा फैलते हैं। इनसे
भले ही ज्यादा नुकसान न होता हो,
पर सामान्य कार्य कर सकने में दिक्कतें
तो आती ही हैं। मल्टीपार्टाइट वायरस इन सभी प्रकार के मिले
जुले रूप होते हैं, जो आपके
कंप्यूटर के बूट सेक्टर के साथ साथ ही अन्य फाइल सिस्टम को
भी प्रभावित करते हैं।
वायरस से प्रभावित होने के लक्षण
कंप्यूटरों के वायरस से प्रभावित होने के कई लक्षण हो सकते
हैं,
और हो सकता है कि कोई लक्षण आपको नजर
ही न आवे। वस्तुत: आज के वायरस इस प्रकार से लिखे जा रहे
हैं कि लाक्षणिक रूप से पकड़ में न आवें और ज्यादा से
ज्यादा नुकसान पंहुचावें। फिर भी,
निम्न बातों का ध्यान रखने पर हो सकता
है कि वायरस आपको ज्यादा नुकसान पंहुचाने के पहले ही पकड़
में आ जावे ताकि आप उसे सही एंटी वायरस के इलाज से मार
भगावें।
·
आपके कंप्यूटर में अवांछित सूचनाएं आने लगें।
·
आपके कंप्यूटर का कोई प्रोग्राम अपने आप ही चलने लगे या
फिर न चले और अगर चले भी तो अलग
तरीके से। जैसे नोटपेड को
चालू करने पर आपसे पूछे कि आपके हार्ड डिस्क को
डिफ्रेगमेंट करना है?
·
सिस्टम की मेमोरी को वायरस बहुत ही कम कर देते हैं। अत:
आपका सिस्टम बिना किसी कारण धीरे
चलने लगता है।
·
वायरस आपके हार्डडिस्क या फ्लापी डिस्क के नाम और रेकार्ड
करने की क्षमता को बदल देता है।
·
कंप्यूटर के कुछ प्रोग्राम फाइल्स या तो गायब होने लगते
हैं या फिर दूसरे नाम से बदलने लगते हैं।
·
कुछ अजीब प्रोग्राम या अन्य फाइल जिन्हें आपने बनाया या
रखा नहीं है,
ऐसी फाइलें अपने आप ही
आपके कंप्यूटर
पर आने लगती हैं।
·
आपकी काम की फाइलें अचानक ही आपके उपयोग में नहीं आती हैं,
चूंकि वायरसों द्वारा उनमें बदलाव
कर
दिया जाता है।
वायरसों से बचने के उपाय
सबसे सही तरीका यह है कि वायरस को घुसने ही नहीं दिया जाए।
यह कहावत भी तो है इलाज से बेहतर है रोकना। अत: आप अपने
कंप्यूटर को जिसमें आप काम करते हैं,
और जिसमें आपका महत्वपूर्ण डाटा रहता
है, किसी भी बाहरी तत्व जैसे कि
बाहरी फ्लापी, नेटवर्क या
इंटरनेट के संपर्क में न आने दें तो आपके कंप्यूटर में
वायरस कभी भी आ नहीं सकेगा। परंतु प्राय: ऐसा कर पाना संभव
नहीं हो पाता है। ऐसी स्थिति में कुछ रक्षात्मक उपाय किए
जा सकते हैं जो कि निम्न हो सकते हैं-
·
अपने
कंप्यूटर में एंटीवायरल
सॉफ्टवेयर
इंस्टाल कर रखें ।
कम से कम दो तीन प्रकार के एंटीवायरल
सॉफ्टवेयर रखें,
चूंकि इनकी एफीशेंसी प्राय: 80
से 90
प्रतिशत तक होती है। अत: हो
सकता है कि जिस वायरस को एक एंटीवायरस
प्रोग्राम
खोज न पाए,
तो दूसरा उसे पकड़ ले।
·
अपने एंटीवायरस प्रोग्रामों के नित्य जारी होने वाले
अपडेटों से ताजा करते रहिए। इससे नए नए जारी हो
रहे ज्यादा
खतरनाक वायरसों से आपका बचाव हो सकता है।
·
हर हालत में किसी भी दूसरे व्यक्ति की फ्लापी,
ई-मेल अटेचमेंट इत्यादि बाहरी साधनों
को एंटीवायरस
साफ्वेयर से चेक कर लेने के बाद ही उपयोग में
लेवें। जिन्हें आप जानते नहीं हैं,
ऐसे व्यक्ति या
संस्था या किसी जानी
पहचानी हस्ती के नाम का उपयोग कर आपको मेल भेजने वाले किसी
भी
व्यक्ति का मेल अटेचमेंट कभी न खोलें। अगर वह अत्यंत
जरूरी है, और आपने उसे मंगाया
है, तभी खोलें,
वह भी वायरस चेक करने के उपरांत।
उपचार
आपकी सभी कोशिशों के बाद भी अगर आपका कंप्यूटर वायरस से
प्रभावित हो जाता है,
तो भी आपको घबराने की आवश्यकता नहीं है। थोड़ा शांति से काम
लेकर निम्न उपायों पर अमल करने पर हो
सकता है कि आपको कोई
नुकसान नहीं हो,
और यदि अगर हो भी तो ज्यादा नहीं।
·
अगर आपको लगे कि आपका कंप्यूटर वायरस से प्रभावित हो चुका
है,
तो सबसे पहले अपने कीमती डाटा
को
सुरक्षित रखने के बारे में सोचिए और उसे किसी अन्य जगह
सुरक्षित रखिए।
·
हमेशा अपने डाटा का बैकअप रखिए संभवत: दूसरे ड्राइव या
निकाले जा सकने वाले मीडिया जैसे जिप
ड्राइव इत्यादि पर।
·
नए एंटीवायरस साफ्टवेयर और डाटा रिकवरी साफ्टवेयर का
इस्तेमाल कर अपने डाटा को सुरक्षित रखें।
·
आपका एंटीवायरस प्रोग्राम वायरस को निकाल नहीं पा रहा है,
तो किसी दूसरे एंटी वायरस साफ्टवेयर का
प्रयोग करें। हो सकता है कि दूसरे प्रकार का एंटीवायरस
प्रोग्राम उसे निकाल सके।
यह कार्य अगर आपसे संभव न हो सके तो फिर समय आ गया है कि
आप किसी एक्सपर्ट की सेवाएं लें। मगर अगर आप इन सभी बातों
का ध्यान रखें तो हो सकता है कि आपको किसी एक्सपर्ट की
सेवाओं की कभी जरूरत ही न हो।