रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

  संपादकीय कार्यालयः एफ-3, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, आवासीय कॉलोनी, रायपुर, 492001 ई-मेलः srijangatha@gmail.com

नववर्ष की हार्दिक बधाईयाँ

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।। कविताएँ ।।

नृत्य-भाषा - नरेन्द्र मोहन

आसमानी दृश्य - ज्ञानेन्द्र पति

बचा रह गया घर - राजेन्द्र ओझा

अंडमान - राजेन्द्र उपाध्याय

बनारस में एक दिन - बासु कुमार

अपने होने से पहले - महाराज कृष्ण

प्रवासी कवि-बिंदु भट्ट की कविताएँ

 

 

।। छंद ।।

गीतकार

मंयक श्रीवास्तव

कृपाशंकर पाण्डेय

विनोदचन्द्र पांडेय 'विनोद'

 

दोहेकार

दिनेश शुक्ल

डॉ. विनय मिश्र

ख़ान आर.'दर्द'

 

 

 

।। भाषांतर ।।

धर्मवीर भारती को स्मरण करते हुए

 

।। लघुकथा ।।

तमाचा - कालीचरण प्रेमी

कृष्णावतार - कालीचरण प्रेमी

प्यार स्वतंत्र साम्राज्य है - डॉ. पूरन

 

।। व्यंग्य ।।

बेताल कथा

  कथा एक परतंत्र देश की - गिरीश पंकज

धर्म-निरपेक्षता बोले तो - सत्यनारायण

 

।। बचपन ।।

नागा लोककथा

मूस की मज़दूरी - रामनंदन

उ.प्र. की लोककथा

टिपटिपवा - गिरिजा रानी अस्थाना

तीन बाल कविताएँ - डॉ.परशुराम

 

।। शेष- विशेष ।।

एक शब्द... उड़ना/उड़ाना

डॉ. गंगा प्रसाद बरसैया

अध्यात्म... मेरी आँखे क्यों नहीं देखती

स्वामी भारती

लोक-आलोक...छत्तीसगढ़ी विवाह-लोकगीत सुरेश पर्वेद

नगरनामा...  हौसलों का शहर-बंबई

सूरज प्रकाश

देवभाषा...शनि की स्थिति और रहीम

डॉ. महेशचन्द्र शर्मा

तकनीक... वायरस से बचने के उपा

रविशंकर श्रीवास्तव

 

 

ललित निबंधो में इस बारः

कुम्भ : जन, जल और आस्था


प.विद्यानिवास मिश्र

       कुम्भ पर्व साँसों का मेला है, साँसों का त्योहार है। कितनी लाख-लाख साँसे एक-दूसरे से मिलती हैं, कितनी साँसे भरती हैं, कितनी साँसें खाली होती हैं, कितना उच्छ्वास होता है, आज गंगा-स्नान हुआ, कितना निःश्वास होता है, जीवन हमने कितना खोया, किन व्यर्थ प्रपंचों में हमने अपनी साँस गँवाई, असंख्य-असंख्य लोगों के भीतर रहते हुए, विशाल महासागर की लहर के रूप में अपने को अनुभव करते हुए कितनी विशालता का बोध होता है.....

माँ


उमाशंकर मालवीय

परमात्मा का जन्म और कविता


डॉ. श्रीराम परिहार

 

कहानी में इस बारः

वो तेरा घर, ये मेरा घर - मालती जोशी

दुर्गा -  श्रीनरेश मेहता

 

संस्कारित करने वाली रचनाः

संगठन, साहित्य के संबंध में पुनर्विचा

विजय कुमार देव

 

संस्मरण मेः

पर्यटकों का चहेता  - दार्जिलिंग'

एस.वी.सुनवार

 

कृति समीक्षा मेः

साहित्य वाचस्पति पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय -  डॉ. बल्देव

इन्द्रधनुषी - अरुण कुमार जैन

रजनी में भी खिली रहूँ...- तारा सिंह

 

कथोपकथन मेः

पं. हजारी प्रसाद द्विवेदी से डॉ. रामनारायण मधुर की बातचीत

पद्मश्री रमेशचंद्र शाह से जयप्रकाश मानस की बातचीत

 

ग्रंथालय(आनलाइन किताबें)

पर्यटन-चित्र-विचित्र - तपेश जैन

विविध-मेरी किताबें - के.पी.सक्सेना

कविता-दस्तक - अनुपम वर्मा

पत्रिका- लोकाक्षर - नन्दकिशोर तिवारी

कोश- कविता कोश - ललित कुमार

 

संपादकीय

हिंदी कविता का महासागर


जयप्रकाश मानस

अंतरजालीय-हिंदी अभी कमोवेश बालपन से गुजर रही है । अंतरजाल पर हिंदी के ख्यातिलब्ध बुजुर्ग पीढ़ी और समकालीन साहित्य में चर्चित और समर्पित रचनाकारों की उपस्थिति अभी तक प्रिंट मीडिया के समानांतर संभव नहीं हो सकी है । कारण चाहे जो भी रहे हों पर यह वास्तविकता है जबकि अंतरजाल पर हिंदी में काम करने के सारे औजार(Tools) विकसित हो चुके हैं । और वे कारगर भी हैं । सबसे खुशी यह कि हिंदी में काम करने के लिए अंगरेज़ी सहित किसी परदेशी भाषा में पांरगत होने की लाचारी भी अब समाप्त हो चुकी है ।...

 

।। पिछले अंको से ।।

 

ललित निबंध

ये रहीम दर-दर फिरैं- डॉ. विश्वनाथ प्रसाद

नारियल- विद्यानिवास मिश्र

 

कथोपकथन

 

इंटरनेट आधारित मीडिया अपनी स्वतंत्र पहचान बना चुका है-बालेन्दु शर्मा

 

संस्मरण

  डा. कमल कुमार का संस्मरण

निर्मल वर्मा को याद करते हुए

 

 

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  संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, संजीव ठाकुर, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

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'सृजनगाथा' बहुआयामी सांस्कृतिक संगठन 'सृजन-सम्मान' की अव्यावसायिक मासिक पत्रिका है ।

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