
।। हिंदी कविता का महासागर
।।
किसी
शोधार्थी की नज़रों से 1000 कविताओं वाली किताब या
पांडुलिपि कदाचित् न गुजरी हो पर हिंदी की दीवानगी से यह
भी सहज और संभव हो चुका है ।
सच तो यह है कि प्रिंट मीडिया में नवीनतम
तकनीकी की उपस्थिति के वाबजूद इतनी संख्या में कविताओं को
एक कृति में अब तक नहीं समेटा जा सका था परंतु इसे 21 वीं
सदी की चमत्कारिक प्रौद्योगिकी यानी अंतरजाल(Internet)
के सहारे पाँच सदस्यों की टीम ने सफल कर दिखाया है । इस
ऐतिहासिक सफलता का नाम है
–
कविता कोश
। ललित कुमार जैसे समर्पित कंप्यूटर इंजीनियर और हिंदीसेवी
के संयोजन में अपनी स्थापना के चंद माहों के भीतर ही एक
हजार से अधिक कविताओं को प्रतिष्ठित किया जा चुका है ।
हिंदी कविता प्रेमियों और हिंदी के शोधार्थियों के लिए यह
खास खुशख़बरी हो सकती है कि हजारों-हजार कविताओं को पढ़ने
के लिए न उन्हें कविता संकलनों की खरीदी पर खर्च करना
पडेगा और न ही उन्हें एकत्रित करने के लिए किसी धूल भरी
लायब्रेरी की तलाश में भटकते रहने के लिए किसी प्रकार की
मशक्कत करनी पडेगी । सारी की सारी कविताएँ ऑनलाइन हैं
जिनका रसपान बड़ी सहजता से किया जा सकता है । हिंदी के कवि
और कविता से संदर्भित किसी कोण से यदि पीएच.डी लेनी हो तो
बरोकटोक प्रिंट लिया जा सकता है । यहाँ 15 दिसम्बर 2006 तक
1000 हिंदी कविताएं ऑनलाइन सजायीं जा चुकी हैं, यह कार्य
अनवरत जारी भी है । यदि आप कविता कोश दल की योजना और दावे
पर सहज विश्वास करें तो कविता कोश में आने वाले कुछ ही
माहों में आपको हिंदी की 10,000 कविताएँ सजी मिलेंगी ।
कल्पना कर सकते हैं कि इस वेबजाल पर आने वाले सालों में
हिंदी की कितनी कविताएं होगीं और जिसे देखकर कोई भी
साहित्य प्रेमी लगभग आर्कमिड़ीज की तरह मुदित होकर क्या कह
न उठेगा
-हिंदी कविता का महासागर ।
कविता कोश एक तरह से इंटरनेट पर हिदीं कविताओं का पहला
सुगठित, विश्वसनीय और वृहत कोश है । अब तक तथाकथित कोश के
नाम पर इंटरनेट पर जितने भी वेबसाइट संचालित हैं वे या तो
रोमन लिपि में हैं या फिर उन कविताओं का चयन संबंधित
वेब-जाल स्वामी की व्यक्तिगत इच्छा पर निर्भर रहा है ।
अर्थात् वे हिंदी कविता के व्यापक फलक को स्पर्श करने में
असमर्थ रहे हैं और जो
कुछ विस्तृत तथा आकर्षक हैं
पर वे
देवनागरी लिपि में पढ़ने का आनंद-अवसर उपलब्ध कराने में
असमर्थ वेब-पृष्ठ हैं । यानी कि वहाँ हिंदी कविता पढ़ने का
आस्वाद नहीं मिल सकता ।
इन
वेबसाइटों में विकिपीडिया (इनसाइक्लोपीडिया)http://sa.wikipedia.org/wiki/index/
भी सम्मिलित है जहाँ हिंदी साहित्य के निर्धारित काल क्रम
में कुछ कवियों को चिन्हाँकित तो किया गया है किन्तु
कुल मिलाकर वह
नौसिखिये के काम जैसा ही प्रतीत होता है, क्योंकि यहाँ
आधुनिक काल के कवियों की सूची में भारतेंदु हरिश्चंद्र,
निराला, पंत, महादेवी वर्मा, अज्ञेय, दिनकर आदि कुल 27
कवियों के साथ गोपाल दास नीरज, अशोक चक्रधर, यश मालवीय और
सोम ठाकुर जैसे बिलकुल समकालीन और मंचीय कवियों को भी अभी
से जोड़ दिया गया है । यह अज्ञानता नहीं है, यह वरिष्ठतम्
और स्थापित कवियों का अपमान भी नहीं है किन्तु अपितु
इंटरनेट पर हिंदी काव्य को स्थापित करने वाले महाशय के
व्यक्तिगत मोह का परिणाम जरूर है । यह मंचीय कवियों के नाम
पर बजायी जाने वाली
भोथरी तालियों का ही जादू है जो इंटरनेट पर
काम करने वाले शहरी लोगों के सिर पर चढ़कर बोल रहा है ।
क्योंकि हिंदी काव्य के गंभीर ही नहीं बल्कि मेट्रिक में
पढ़ने वाले
किसी छात्र से भी पूछेंगें तो वह आधुनिक काल के 27
कवियों में इन्हें सम्मिलित नहीं करेगा ।
इसका निहितार्थ कदापि इनके कवि नहीं होने पर नहीं समझा जाय
पर काल-क्रम भी तो कोई चीज़ होती है । खैर.......
कविता कोश की सबसे बड़ी विशेषता है उसका खुलापन । खुलापन
का आशय
–
कोई भी विकि तकनीकी
में दक्ष एवं हिंदी कविता का ज्ञाता इसमें शामिल हो सकता
है । यद्यपि वह कोश में संपादन, तकनीक, वर्तनी संशोधन एवं
नीति निर्धारण से संबंधित कार्यों में दखल नहीं दे सकता
किन्तु कविता उपलब्ध कराने, किसी खास कवि और उसकी किसी
कविता की अनुशंसा करने में खुलकर सहयोग कर सकता है । ऐसे योगदान का उल्लेख बाकायदा वेब-पृष्ठ पर की
जाती है । इंटरनेट की विकी तकनीक
का लाभ यह है कि कोई भी व्यक्ति कोश में नई रचनाएँ जोड
सकता है या पहले से उपलब्ध रचानाओं में वर्तनी आदि त्रुटियों को सुधार
सकता है। कविता कोश से जुड़ने के लिए किसी प्रकार की
सदस्यता की भी जरूरत नहीं है वह केवल अपने सहयोगात्मक रुख
से सदस्य बन सकता है ।
अपने व्यवहारिक अर्थों में यह हिंदी जगत् का अनूठा सहकारी
प्रयास है । खुलापन का आशय यह नहीं है कि कहीं भी ठसने की फिराक में रहने वाला
कोई कवि यहाँ अपनी
कविता ठेल सकता है । क्योंकि हिंदी इंटरनेट की दुनिया भी
ठीक वैसी है जैसे हिंदी प्रिंट और मंचीय भांडों की दुनिया
। कहना प्रासंगिक होगा कि हिंदी काव्य का सत्यानाश करने में जितना हाथ उसके पाठकों
और अकादमिक कवियों का नहीं है उतना हाथ मंचीय कवियों का है
जिन्होंने हिंदी कविता को चुटकुला और फूहड़ व्यंग्योक्ति
बना दिया है । ऐसे कवियों को यहाँ भी प्रतिबंध लगाना
चाहिए, जिसका खतरा नीति के अनुसार दूसरे चरण में हो सकता
है । वैसे इंटरनेट पर हिंदी कविता की श्रीवृद्धि के नाम पर
कुछ ऐसे भोथरे लोग भी अपनी दुकानदारी चला रहे हैं जिन्हें
कविता का
'एबीसीडी'
भी नहीं आता । भले ही वे स्तरीय कविता के
नाम पर चार पंक्ति भी ठीक से नहीं लिख सकते हैं किन्तु
उनका दावा कम से कम अकादमिक लोगों को हास्यास्पद लग सकता
है कि वे इंटरनेट के माध्यम से सारी दुनिया के लोगों को
हिंदी कविता लिखना सीखा रहे हैं ।
उन्हें मुगालते पालने में नहीं रोका जा सकता है कि हिंदी
की श्रीवृद्धि का पवित्र कार्य कर रहे हैं । बलिहारी
हो ऐसे मंचीय आत्मा से अनुप्राणित कवियों की, और बलिहारी
हो ऐसे शिष्यों की भी
। यदि ये इंटरनेट पर
सवार होने के
नाते स्वयं को वैश्विक हिंदी कविता के स्वामी मान बैठे हैं
तो बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं, क्योंकि भाषा सिखायी जा सकती
है कविता नहीं, और कोई भाषा मात्र विशाल आकार किन्तु थोथों
पन्नों से नहीं अपितु कम किन्तु भविष्योन्मुखी पृष्ठों से
समृद्ध होती है । अभी तक तो कविता कोश ऐसे महामानवों से सुरक्षित है ।
विश्वास किया जा सकता है और कामना भी कि भविष्य में भी इन
नौसिखियों
और काव्य कीटों से मुक्त होकर पुष्पित-पल्लवित होता रहेगा ।
यह तो सभी को ज्ञात ही है कि जो भी लिख दिया जाय वह कविता
नहीं होती । आखिर कुछ तो फर्क होती है कविता में और कथन
में । ज्यादा कुछ कहना विषयांतर होना होगा, सो सीधे मूल
प्रसंग पर लौट आते हैं ।
अंतरजालीय-हिंदी अभी कमोवेश बालपन से गुजर रही है ।
अंतरजाल पर हिंदी के ख्यातिलब्ध बुजुर्ग पीढ़ी और समकालीन
साहित्य में चर्चित और समर्पित रचनाकारों की उपस्थिति अभी
तक प्रिंट मीडिया के समानांतर संभव नहीं हो सकी है । कारण
चाहे जो भी रहे हों पर यह वास्तविकता है जबकि अंतरजाल पर
हिंदी में काम करने के सारे औजार(Tools)
विकसित हो चुके हैं ।
और वे कारगर भी हैं । सबसे खुशी यह कि
हिंदी में काम करने के लिए अंगरेज़ी सहित किसी परदेशी भाषा
में पांरगत होने की लाचारी भी अब समाप्त हो चुकी है । ऐसे
में वैश्विक क्षितिज पर हिंदी को विश्वविजयी देखने के
स्वप्नदर्शी और समर्पित काव्यरसिकों तथा कवियों के लिए
यहाँ अपने योगदान को रेंखांकित करने का अच्छा अवसर है
बशर्ते कि वे युनिकोड़ फोंट को लेकर कंप्यूटर पर बुनियादी
काम करना जानते हों । एक हिंदी प्रेमी का परिचय देते हुए
वे कविता कोश में पूर्व निर्धारित सूची अनुसार किसी कवि की
महत्वपूर्ण कविता रख सकते हैं । किसी छूटे हुए खास कवि और
कविता का नाम सूझा सकते हैं । पूर्व से संधारित कविता में
लिपिकीय त्रुटि सुधार सकते हैं । परंतु इसके लिए उन्हें
वर्तनी संबंधी नियमों का सहारा लेना होगा, जिसके नियम भी
साइट पर ही अंकित है । खास तौर पर ऐसे लोगों के लिए साइट
में
–
“कविता
कोश में योगदान कैसे करें?”
“कविता
कोश में कविताओं को जोड़ने का तरीका”,
“कविता
कोश के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न”,
“सक्रिय
प्रोजेक्ट्स की सूची”,
“वर्तनी
नियम”,
“कविता
कोश टीम
की सदस्यता”
सहित
“कविता
कोश की नीतियाँ”
आदि स्तम्भें दी गई हैं, जिससे सम्यक जानकारी प्राप्त की
जा सकती है । यह भी कहना प्रासंगिक होगा कि कविता कोश के
परिप्रेक्ष्य में किसी भी चर्चा के लिए
"कविता
कोश
”
नामक समूह भी विकसित किया गया है । यह कविता कोश संचालन
परिवार के साथ-साथ अन्य हिंदी भाषा सेवियों के लिए भी
स्वागतेय कदम है । जो विकि तकनीक में पारंगत नहीं है वे वे
केवल युनिकोडित फोंट में टाइप कर रचना ई-मेल से भेज सकते
हैं । जो कंप्यूटर पर युनिकोडित फोंट पर टाइप करना नहीं
जानते तो किसी भारतीय सदस्य के पास डाक से भी रचना भेज
सकते हैं । चाहे किसी भी रूप में, इससे जुड़ना निश्चित ही
उस स्वप्न को साकार करने में योगदान देना है जिसमें
इंटरनेट पर हिंदी की स्थिति को प्रथम स्थान पर प्रतिष्ठित
करने जैसी नेक भावना सर्वोपरि है ।
जैसा कि कविता कोश के संस्थापक और वर्तमान में
एडिनबर्ग,
स्काटलैंड में अध्ययनरत ललित कुमार के साथ ह्यूस्टर,
अमेरिका से आईटी विशेषज्ञ मितुल,
यूएई से
पूर्णिमा वर्मन, दिल्ली
से इंजीनियरिंग छात्र दीपक मोदी, रायपुर, छत्तीसगढ़ से स्वयं मैं
आदि भौगोलिक दूरी के बावजूद बड़ी आत्मीयता से कविता कोश
में हाथ बँटा रहे हैं ।
यद्यपि कविता कोश में कतिपय महत्वपूर्ण कवियों की
अनुपस्थिति को लेकर हिंदी कविता के गंभीर अध्येताओं को
आपत्ति हो सकती है कि तथापि हिंदी कविता के शिल्पियों की
लंबी फेहरिस्त को देखते हुए उन्हें अवश्य संतोष हो सकता है
कि प्रथम चरण में इतने सारे कवियों और उनकी कविताओं को खोज
निकालना कम चुनौती नहीं रहा होगा, और कम श्रमसाध्य कर्म भी
नहीं । यूं तो हिंदी कविता की सुदीर्घ परंपरा रही है । हर
काल और वाद के सैकडों नामचीं कवि हुए हैं जिन्हें इस कोश
में होना ही चाहिए । और जैसा कि कविता कोश की नीति में कहा
गया है कि
–
“प्रथम
चरण में केवल अपेक्षाकृत अधिक प्रतिष्ठित कवियों की रचनाओं
का संकलन किया जाएगा। कौन कवि कितने प्रतिष्ठित हैं या थे
- इस बात का कोई पैमाना सोचना बडा मुश्किल है क्योंकि
प्रतिष्ठा सापेक्षिक और व्यक्तिगत होती है। इसलिये यह तय
किया गया है कि इस चरण में मुख्यत: केवल उन रचनाकारों को
सम्मिलित किया जाएगा जिनकी कविताएँ पाठ्यपुस्तकों में छप
चुकी हैं। पहला चरण कोश में कम से कम 5000 कविताओं के
इकठ्ठे होने तक चलता रहेगा।”
यह दूसरी बात है कि यदि आप इस नीति पर गंभीर
हो जायें तो कविता कोश के पहले चरण में आपको कुछ ऐसे नाम
भी मिलेंगे जिनकी कविता कहाँ और किस पाठ्यक्रम में पढ़ायी
जाती है, कोई पता नहीं है
?
पर इतनी तो छूट दी ही जा सकती है कविता कोश
को शुरुआती दौर में ।
फिलहाल कविता कोश में कविताओं का क्रम कवि की रचनात्मक
प्रतिष्ठा, उसकी वरिष्ठता या काल तथा हिंदी कविता के कालों
या प्रचलित वादों या आन्दोलनों के आधार पर नहीं अपितु
वर्णमाला के आधार पर
(alfabaticly)
रखा गया है । यह कविता तलाशने वालों के लिए सुविधाजनक भी
है । इस प्रकार अब तक जिनकी कविताएं प्रतिष्ठित हो चुकी
हैं उनमें हैं -
अटल
बिहारी वाजपेयी,
अज्ञेय,
अमरनाथ
श्रीवास्तव,
अमीर
खुसरो,
अयोध्या
सिंह उपाध्याय हरिऔध,
अशोक
चक्रधर,
अशोक
वाजपेयी,
इसाक
अश्क,
उमाशंकर
तिवारी,
उमाकांत
मालवीय,
उर्मिलेश,
ओम प्रकाश चतुर्वेदी
'पराग,
कन्हैयालाल
नंदन,
कबीर,
कमलेश
भट्ट
'कमल',
काका
हाथरसी,
किशोर
काबरा,
कीर्ति
चौधरी,
कुमार
रवींद्र,
कुंवर
नारायण,
कुँवर
बेचैन,
केदारनाथ
अग्रवाल,
कैफ़ी
आज़मी,
कैलाश
गौतम,
गजानन
माधव मुक्तिबोध,
गिरिजाकुमार
माथुर,
गुलज़ार,
गुलाब
खंडेलवाल,
गोपालदास
"नीरज",
गोपाल
प्रसाद व्यास,
गोपाल
सिंह नेपाली,
गोरखनाथ,
चंद
बरदाई,
चंद्रसेन
विराट,
जयशंकर
प्रसाद,
डॉ॰
जगदीश व्योम,
जयप्रकाश
मानस,
डा
तारादत्त निर्विरोध,
तुलसीदास,
द्वारिकाप्रसाद
माहेश्वरी,
दुष्यंत
कुमार,
धर्मवीर
भारती,
नईम,
नरेश
मेहता,
नरेन्द्र
शर्मा,
नरोत्तमदास,
नागार्जुन,
निदा
फ़ाज़ली,
निर्मला
जोशी,
नेमिचन्द्र
जैन,
डॉ.पदुमलाल
पन्नालाल बख्शी,
प्रदीप,
प्रभाकर
माचवे,
बशीर
बद्र,
बिहारी,
भगवतीचरण
वर्मा,
भवानीप्रसाद
मिश्र,
भारतभूषण
अग्रवाल,
भारतेंदु
हरिश्चंद्,
मलिक
मोहम्मद जायसी,
मलूकदास,
महेश
अनघ,
महादेवी
वर्मा,
महावीर
प्रसाद द्विवेदी,
मीराबाई,
मैथिलीशरण
गुप्त,
माखनलाल
चतुर्वेदी,
मुकुटधर
पांडेय,
मुकुट
बिहारी सरोज,
यश
मालवीय,
रघुवीर