रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

संपादकीय कार्यालयः एफ-3, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, आवासीय कॉलोनी, रायपुर, 492001 ई-मेलः srijangatha@gmail.com

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मीडिया-विमर्श

 

बेगानी शादी में मीडिया दीवाना !


           
लो अच्छा ही हुआ कि अभिषेक और ऐश्वर्या की शादी तय हो गई । इस शादी को लेकर कितने कैमरे वाले, कितने कलमवाले कितने दिनों से परेशान थे। ऐश्वर्या को इन्हें 'थैंक्स' तो कहना ही चाहिए । मीडिया न होता, तो मंगल नवदंपत्ति को बहुत भारी पड़ता । किन्तु मीडिया वालों का फौज-फाटा देखकर मंगल भी सहम गया । उसने कहा कि ये शादी हो ही जाने दो। किसी दूसरे का घर बसाने में मीडिया की यह दीवनगी देखने लायक है। हमारे संतों ने ठीक ही कहा है परहित सरिस धर्म नहीं भाई । मीडिया परहित में ही तो लगा है।

 

        ऐश्वर्या का हित हो जाए,  वह बालीवुड के प्रथम परिवार की बहू बन जाए । बस इसी कामना को लिए दिन और रात सारे चैनलों पर मंत्रजाप चल रहा है। ऐसा अखंड जाप देखकर इंद्र का सिंहासन भी डोल जाता, मंगल क्या चीज है। किसी कन्या का ब्याह करवाने से बड़ा पुण्य दूसरा नहीं है। मीडिया ने यह पुण्य कमा ही लिया । कजरारे-कजरारे वाली बहू पाकर छोरा गंगा किनारे वाला भी धन्य-धन्य है। फिल्मी अभिनेत्रियों से फोन पर रसीली बातें करने वाले समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह भी ऐसी बहू पाकर निहाल हैं । शायद इस बहाने ही उत्तर प्रदेश में दो-चार वोट बढ़ जाएं और उनके बड़े भैया मुलायम सिंह यादव सत्ता में बने रह जाएं, एकहि साधै सब साधै यह मंत्र समाजवादी पार्टी के कार्पोरेट महासचिव ने पढ़ ली है। सोनिया समर्थन वापस भी ले लें तो क्या फर्क पड़ता है इधर बिटिया प्रियंका, उधर बहू ऐश्वर्या । सुपरहिट मुकाबला । ससुर अमिताभ उत्तर प्रदेश के ब्रांड ऐंबेसडर हैं और मुलायम सिंह ने यूपी का बैंड बजाने का ठेका ले रखा है। केबीसी में शाहरूखआ गए हैं । ससुर जी खाली होकर पूरा समय उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने में और अपने इकलौते बेटे का ब्याह रचाने में लगे हैं । क्या शानदार बाइट्स हैं । दृश्य भी मनोरम है। वाहन चलाते अमिताभ, बगल में भ्राता लक्ष्मणस्वरूप अमरसिंह । पीछे राम-सीता सी जोड़ी अभिषेक और ऐश्वर्या । चैनल बम-बम है। अखबार भी । किसी दूसरे की शादी में इतनी उत्साह कभी देखा नहीं गया था ।

 

        तैयारियों में भी हम साथ साथ हैं । ऐश्वर्य क्या खरीद रही है ? बनारस से कितनी बनारसी साडियां लीं ? कौन से गहने पहनेगी ? कपड़ों को कौन डिजाइन करेगा ? पार्टी में कौन-कौन से दिव्य पुरूष अवतरित होकर पुष्प वर्षा करेंगे ? बड़ी चिंता है। अमिताभ को चिंता करने की जरूरत नहीं। टीवी पर ज्योतिष सलाह से लेकर विवाह के मुहूर्त बताने वाले सब मौजूद हैं। पंडितों का खर्चा बचेगा। सारी सलाह चैनल दे रहा है। बाकी के लिए दिव्य क्षमताओं वाले अमर सिंह हैं ही । काशी विश्वनाथ से लेकर मुंबई और जयपुर तक सब बम-बम हैं। धन्य भाग्य सेवा का अवसर पाया । ऐसे क्षण कहाँ आते हैं । लीला धरती पर रोज-रोज नहीं रची जाती । यहां लीला लाइव है। सब कुछ दृश्यमान । जलसा का जलसा और उसमें शामिल पूरा देश। वाह ! क्या दृश्य है। गाड़ी से उतरते मेहमान, कैमरा लेकर दौड़ती वानरसेना । स्टूडियो से सवाल पूछती हुई कुछ दिव्य विभूतियाँ, प्रश्नों पर झूमता देश। इंतजार यह भी कि झलक दिखला जा, घंटे हो गए लाइव शो जारी है पर ऐश्वर्या नहीं दिखी । इंतजार ऐश्वर्या का, दिखते हैं अमर सिंह। यही तो लाइव लीला है। जो दिखता है, वो बिकता है। पर आएगा आने वाला इस इंतजार में रात काली हो रही है। लाइव जारी है। अमिताभ के निवास जलसा का काला बड़ा दरवाजा उस पर खड़ा द्वारपाल । कैमरामैन की उपेक्षा कर जाते वीआईपी, बधाइयाँ देते लोग, मोबाइल पर बधाइयाँ लेते अमिताभ।

 

        वीआईपी शादी, वीआईपी लोग। काशी विश्वनाथ से लेकर तिरूपति भगवा और सिद्धि विनायक का आशीर्वाद । अब मीडिया कैसे न दे अपना आशीर्वाद । सो मीडिया के देव अभिषेक और ऐश्वर्या पर पुष्प वर्षा कर रहे हैं। सब निहाल हैं। वाह-वाह रामजी जोड़ी क्या बनाई ! कुछ इस इंतजार में हैं कि शायद अच्छा दिखाएं तो रिसेप्शन का न्यौता भी आए। न्यौता मिलेगा भई। अमरसिंह से जैक तो लगाओ। कार्ड में नाम तो वही लिखेंगे। मुलायम सिंह से लेकर अंबानी सब धन्य-धन्य हैं। ऐसा विवाह न भूतो, न भविष्यति । शाहरूख खान भी सोच रहे होंगे स्टार बनने के बाद शादी करनी थी । अभिषेक तो गुरू निकला। फिर भी मीडिया का दिल है जो मानता नहीं। कुछ अखबार वाले रंग में भंग डालने में लगे हैं । एक प्रमुख अखबार सलमान खान  से लेकर विवेक ओबेराय जैसे दर्जनों ऐश्वर्या के पूर्व प्रेमियों की कथाएं छापने में निमग्न हैं । यह भारतीय संस्कृति नहीं है । भई ! किसी लड़की की शादी के वक्त ऐसी बातें नहीं करते । वैसे भी प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है । 

 

        एक अखबार लिखता है- अमिताभ का परिवार अब आठ सौ करोड़ का हो गया । तुम्हें जलन क्यों ही रही है भई ? तुम भी कोशिश करो । ट्रकों पर ठीक ही लिखा रहता है- जलो मत मुकाबला करो । जैसे शिल्पा शेट्टी ने किया । अभिषेक की शादी के हल्लाबोल में रो पड़ी । अब सारा मीडिया और सारे कैमरे ऐश्वर्या से शिफ्ट होकर शिल्पा शेट्टी के आँसू पोंछने में लगे हैं । टाइमिंग गलत हो गई न भई । शिल्पा तू थोड़ा रुककर नहीं बोल सकती थी । मार्केट बिगाड़ रही है । किसी की शादी में रोना-धोना ठीक नहीं । तुझे इतना भी पता नहीं, तू रोएगी तो मीडिया को भी रोना पड़ेगा । क्यों शादी के बीच में ये रोने-धोने वाला प्रोग्राम शुरु कर दिया । क्या तुमको ऐश्वर्या की शादी का न्यौता नहीं मिल रहा है, जो बिग ब्रदर में चली गई । यूपी में इलेक्शन हैं भई । बिहार को तो लूट लिया अब यूपी को क्यों लूटना चाहती हो । एक तो रेलमंत्री बन गए, यूपी वाले यादवजी का क्या होगा ? फिल्में पिट रही हैं, तो चालूगिरी दिखा रही है । अरे ऐश्वर्या-ऐश्वर्या है ।

शादी पर कैमरों की यह दीवानगी, मीडिया के इस दौर का भगवान ही मालिक है । चौबीस घंटे के चैनल क्या दिखाएं ? मोटे-मोटे अखबार क्या लिखें ? जाहिर है इन्हें ऐसी खबरों पर आना ही होता है । कभी कुंजीलाल की मृत्यु घोषणा पर मुग्ध मीडिया, कहीं प्रिंस की रक्षा में डटा मीडिया, तो कहीं भूत-प्रेत, तंत्र-नागमणि और मटुकनाथ की प्रेमकथा पर झूमता मीडिया । मीडिया के इस चरित्र पर टिप्पणियां तो की जा सकती हैं, लेकिन टीआरपी की चुनौती से जुझता यह माध्यम खुद में बहुत बेचारा है । उसकी शक्ति ही उसकी कमजोरी है । वह पापुलर का माध्यम है । वह पापुलर के पीछे भागता है । प्रिंस हो या मटुकनाथ । उसे पापुलर का पीछा करना है । कहानियों में कहानियाँ खोजता मीडिया की खुद की एक कहानी है, जो वह किसी से नहीं कह सकता । वह कहानी है कैमरों की चकाचौंध में बेबसी की, टीआरपी की, खबरों को बेचने की, प्रतिद्वंदियों से आगे निकलने की । बसे पहले और सबसे आगे रहने की इस होड़ ने इसे बहुत बेचारा बना दिया है । बावजूद इसके कभी-कभी उसके सामाजिक सरोकार भी प्रगट होते हैं । लेकिन वह बाजार का माध्यम है । बहुमत का माध्यम है । उसे ज्यादा लोगों तक पहुंचना है । ज्यादा विज्ञापन बटोरने हैं । प्राइम टाइम पर ज्यादा टीआरपी बटोरनी है । क्या उसकी इस बेबसी में आप उसका साथ नहीं देंगे ?

संजय द्विवेदी

स्थानीय संपादक

दैनिक हरिभूमि, रायपुर, छत्तीसगढ़

 

 

 

 

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अपरिपक्व विचार नहीं होते, सही समय आने तक इंसान को धीरज रखना पड़ता है - जीन मोनेट

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