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जब यार देखा
नैन भर दिल की गई चिंता उतर ।
ऐसा नहीं कोई
अजब राखे उसे समझाए कर ।।
जब आँख से ओझल
भया, तड़पन लगा मेरा जिया
हक्का इलाही
क्या किया, आँसू चले भर लाय कर ।
तू तो हमारा
यार है, तुझ पर हमारा प्यार है
तुझ दोस्ती
बिसियार है एक शब मिली तुम आय कर ।
जाना तलब तेरी
करूँ दीगर तलब किसकी करूँ
तेरी जो चिंता
दिल धरूँ, एक दिन मिलो तुम आय कर ।
मेरी जो मन तुम
ने लिया, तुम उठा गम को दिया
तुमने मुझे ऐसा
किया, जैसा पतंगा आग पर ।
खुसरो कहै
बातों ग़ज़ब, दिल में न लावे कुछ अजब
कुदरत खुदा की
है अजब, जब जिव दिया गुल लाय कर ।
अमीर खुसरो
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हमन है इश्क
मस्ताना, हमन को होशियारी क्या
?
रहें आजाद या
जग से, हमन दुनिया से यारी क्या
?
जो बिछुड़े हैं
पियारे से, भटकते दर-ब-दर फिरते,
हमारा यार है
हम में हमन को इंतजारी क्या
?
खलक सब नाम
अनपे को, बहुत कर सिर पटकता है,
हमन गुरनाम
साँचा है, हमन दुनिया से यारी क्या
?
न पल बिछुड़े
पिया हमसे न हम बिछड़े पियारे से,
उन्हीं से नेह
लागी है, हमन को बेकरारी क्या
?
कबीरा इश्क का
माता, दुई को दूर कर दिल से,
जो चलना राह
नाज़ुक है, हमन सिर बोझ भारी क्या
?
-कबीर
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जिन प्रेम रस
चाखा नहीं, अमृत पिया तो क्या हुआ ।
जिन इश्क में
सर ना दिया, सो जग जिया तो क्या हुआ
ताबीज औ तूमार
में सारी उमर जाया किसी,
सीखे मगर हीले
घने, मुल्ला हुआ तो क्या हुआ ।
जोगी न जंगम से
बड़ा, रंग लाल कपड़े पहन के,
वाकिफ़ नहीं इस
हाल से कपड़ रँगा तो क्या हुआ ।
जिउ में नहीं
पी का दरद, बैठा मशायख होय कर,
मन का रहत
फिरता नहीं सुमिरन किया तो क्या हुआ ।
जब इश्क के
दरियाव में, होता
नहीं
गरकाब ते,
गंगा, बनारस,
द्वारका पनघट फिरा तो क्या हुआ ।
मारम जगत को
छोड़कर, दिल तन से ते खिलवत पकड़,
शोकी पियारेलाल
बिन, सबसे मिला तो क्या हुआ ।
-प्यारेलाल शोकी
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जिसे इश्क़ का
तीरे कारी लगे ।
उसे ज़िंदगी
क्यों न भारी लगे ।।
वली जब कहे तू
अगर यक वचन,
रक़ीबाँ के दिल
पे कटारी लगे ।
न होगा उस जग
में हरगिज़ क़रार,
जिसे इश्क़ की
बेकरारी लगे ।
-वली दकनी
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अदा से देख लो
दिलबर, यह फसल बहारी है ।
लगे दिल किस
तरह अब तो निहायत बेकरारी है ।।
जरा सूरत
दिखाने में तुमको शर्म आती है,
मुहब्बत इसको
कहते हैं यही क्या शर्ते यारी है ।
कहें हम क्या
जो दिल पे गुजरती है जुदाई में,
नहीं रोने से
फुर्सत लबों पर आहें जारी हैं ।
दिलो जाँ दोनों
ईमाँ देके हम कुर्वान हो बैठे,
एवज में बस अता
हमको हुई यह इंतजारी है ।
उमड़ता है दिल
तो सिर झुकाकर देख लेते हैं,
‘किशोरी
लाल’
के दिल
पर खिंची तस्वीर प्यारी है ।
-किशोरी लाल