रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

  संपादकीय कार्यालयः एफ-3, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, आवासीय कॉलोनी, रायपुर, 492001 ई-मेलः srijangatha@gmail.com

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 इस अंक में पढिए

।। कविताएँ ।।

संस्कार - इमरोज

ब कुछ बचा रहेगा - शाहंशाह आलम

स्टेशन पर - रवीन्द्र स्वप्निल प्रजापति

बचपन - महीपाल कैन

बहुत कठिन होता है - संतोष रंजन शुक्ल

चर्चित कविता संग्रह से - नीलेश रघुवंशी

प्रवासी कविता - डॉ.ममता जैन (साइप्रस)

 

।। छंद ।।

गीतकार

लावणया शाह

सचिन शर्मा

नवगीतकार

छविनाथ मिश्र

नईम

कुमार रवीन्द्र

डॉ. इसाक अश्क

डॉ. शरद सिंह

दोहेकार

चंद्रसेन विराट

डॉ. अब्दुल अजीज 'अर्चन'

डॉ. अनन्त राम मिश्र 'अनन्त'

डॉ. ममता जैन

हाइकु

मनोज सोनकर

कृष्ण कुमार अजनबी

 

 

।। भाषांतर ।।

इराक़ी कविता - दून्या मिख़ाइल

छत्तीसगढ़ी कविता - डॉ.बलदेव

संस्कृत कविता - भर्तृहरि

 

।। लघुकथा ।।

शिक्षा/पक्ष अपना-अपना- नरेश धीमान

प्रसूती अवकाश- इन्द्रा बंसल

 

 

।। शेष- विशेष ।।

एक शब्द...

दिखाना-डॉ.गंगाप्रसाद बरसैया

विचारणीय...

पुलिस का दाग-अशोक रहाटगाँवकर

लोक-आलोक...

लोक-संस्कारों में जल डॉ. श्यामसुंदर दुबे

विचार...

क्या भूमिका जरुरी है?-डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल

इतिहास...

इतिहास के पन्नों में झारखंड-साभार

प्रसंगवश...

गुलाब दिवस का अतीत-बनवारी लाल

मूल्याँकन...

शमशेरियत और हिंदी कविता-सृजन-शिल्पी

मीडिया विमर्श...

बेगानी शादी में मीडिया दीवाना-संजय द्विवेदी

हस्ताक्षर...

मय के हस्ताक्षर - घनानंद

 

 

लित निबंधों में इस बारः

समय के इस घमासान मेः


डॉ.कृष्ण कमार रत्तू

        जमुना किनारे जान्नी की बांसुरी और क्या दिखाती है । आज थिरकता है, मन और तन उस भटकन के पीछे जो अपनी भी नहीं और इस धरती की भी नहीं । बहुत पीछे छोड़ दिया आपने उस एहसास का किनारा जहाँ से वतन के लोगों को देखा जा सकता था, यहाँ से अहले-वतन की याद आती थी और उसकी महक बाकी थी ।समय के इस घमासान में हारने का अर्थ अपने अंदर से टूटना है और यह कट्टर सच्चाई है कि अंदर से साबुत न होना पराजय की ओर बढ़ने वाला पहला कदम है । इस कदम के आत्मघाती होने से पहले सोच लेना चाहिए कि हम किस दिशा में जा रहे हैं ।....

 

0 सत्य का मतलब 0


जयप्रकाश मानस

 

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0 पेड़ का आत्मकथ्य 0


मनोज सोनकर

 

 

कहानी में इस बारः

जंगल - गोवर्धन यादव

लिटिल बेबी - कमलेश माथुर

शोक का पुरस्कार-प्रेमचंद

 

संस्मरण मेः

बच्चों का भविष्य जनतांत्रिक घोड़ों के हाथों कैद है ! -  प्रसिद्ध मार्क्सवादी कहानीकार ज्ञानरंजन का आत्मीय संस्मरण

 

कथोपकथन मेः

लेखक का काम पाठक बनाना भी है - जाने माने रचनाकार डॉ.दामोदर खड़से से

मुकेश प्रत्यूष की बाचतीच

 

कृति समीक्षा मेः

ग़ज़ल: तस्वीर ज़िन्दगी के /मनोज 'भावुक'

पुस्तक: रचना का समय / राजेन्द्र उपाध्याय

पुस्तक: सिरि भूवलय / मुनि कुमदेन्दु जैन

 

ग्रंथालय(आनलाइन किताबें)

  शोध-सर्वेश्वरदयाल और उनकी पत्रकारिता   चर्चित पत्रकार संजय द्विवेदी की किताब

 

।। संपादकीय ।।

प्रेम को नेस्तनाबूत करने आ गया

 सॉफ्टवेयर


जयप्रकाश मानस

 

आगामी अंक के आकर्षण

स्मृतिशेषः कमलेश्वर

कमलेश्वर के साहित्यिक मित्रों के आलेख

(राजेन्द्र यादव, मैनेजर पांडेय, ज्ञानरंजन, गंगा प्रसाद विमल, प्रदीप पंत, डॉ. चन्द्रत्रिखा, परदेशी राम वर्मा,  गिरीश पंकज आदि के लेख)

कमलेश्वर की रचनाएँ

खास संस्मरण

पूर्व पुलिस महानिदेशक महेश चंद्र द्विवेदी

   कविताएँ

राजेश जोशी, प्रयाग शुक्ल, प्रताव राव कदम, राजीव रंजन प्रसाद, राजेश गनोदवाले, जयप्रकाश मानस, मोहन राणा

 प्रवासी कविता

अमेरिका से इला प्रसाद, राकेश खंडेलवाल

ललित निबंध

धर्मवीर भारती और मृदुला सिन्हा

धारावाहिक उपन्यास

पालीव़ुड की अप्सरा - गिरीश पंकज

चिट्ठियाँ

महावीर प्रसाद द्विवेदी के कुछ निजी पत्र

विधा-विशेष

लघुकथा पर कमल किशोर गोयनका 

मूल्याँकन

इंटरनेट पर हिंदी साहित्य - ज.प्र.मानस

कहानी

हिंदी की पहली कहानी माधवराव सप्रे

दायित्व का एहसास डॉ. सूरज मृदुल

संस्कार

वरिष्ठ साहित्यकार बिष्णु प्रभाकर की रचना

 भाषांतर

 स्वर्ण ज्योति द्वारा अनुदित कविताएं

प्रसंगवश- जन्म शताब्दी

महादेवी वर्मा पर खास सामग्री

इंटरनेट

विशेषज्ञ जगदीप डांगी पर आलेख

शख्सियत

गिरीश पंकज पर प्रेम जनमेजय का लेख

हमारे नये स्तम्भकार

नवनीत के संपादक-विश्वनाथ सचदेव

वेबदुनिया के पहले संपादक- ए. चतुर्वेदी

(दोनों रचनाकारों का हम स्वागत करते हैं)

अन्य सभी स्थायी स्तम्भों के साथ

आळेख भेंजे

प्रसिद्द कथाकार कमलेश्वर पर केंद्रित रचनाओं की  प्रतीक्षा में

 

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