रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

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छंद

 

दोहे- चंद्रसेन विराट डॉ. अब्दुल अजीज 'अर्चन'  डॉ. अनन्त राम मिश्र 'अनन्त'  डॉ. ममता जैन

 

सिर पर सिर आते नज़र

कोई भी सुनता नहीं, किसको दें आवाज़

गूँगा बहरा हो गया, क्या यह सभ्य समाज ।

 

खुशबु पर भी धर्म को, थोप रहा इंसान

मंदिर में महके गुगल, मस्ज़िद में लोबान ।

 

निज बल, निज शस्त्रास्त्र से, एकाकी निःसंग

हर कोई लड़ता मिला, अपनी अपनी जंग ।

 

मनुज बुरा भी, ठीक भी, उसकी आदिम टेव

वह आधे में दैत्य है, वह आधे में देव ।

 

सिर ही सिर आते नज़र, जिधर देखिए आज

जनसंख्या विस्फोट यह, ख़ुद को ख़ुद का शाप ।

 

घात लगा बैठे सभी, पाल रहे निज पेट

मौका मिलता जब जिसे, कर लेता आखेट ।

·  चंद्रसेन विराट

समय, 121, बैकुंठ धाम कॉलोनी, ओल्ड परासिया

खजराना कोठी, इंदौर, मध्यप्रदेश - 452018

 

बने न दलदल देश

हृदयहीन कितना हुआ, जीवन का अभियान

जैसे हो आकाश में, मानव-रहित विमान ।

 

जब भी चूल्हा गैस का, फटे धमाका होय

सदा जले घर में बहू, बेटी जले न कोय ।

 

होगा पर्वत से बड़ा,       कद तेरा नादान

गहरे सागर में उतर, तो कुछ हो अनुमान ।

 

छाया रूपी मेघ दल, तारे, चन्द्र प्रकाश

मै धरती हूँ, शीश पर, रखती हूँ आकाश ।

 

दल के दल तो बढ़ गये, बने न दलदल देश

दलदल में फँस जायें सब, बस उलझन हो शेष ।

 

जग में जिनकी ख्याति थी, मिला मान सम्मान

चौराहों पर आजकल, वही बनें पाषान ।

·  डॉ. अब्दुल अजीज 'अर्चन'

गुलबर्ग मंजिल, खैराबाद, सीतापुर

अवध, उत्तरप्रदेश

 

दुर्लभ है सन्मित्र

मुड़कर देखा, पीठ पर कौन कर रहा वार

था दुश्मन कोई नहीं, था अपना ही वार ।

 

उसने भी ईंधन दिया, खूब बढ़ायी आग

दुश्मन के षडयंत्र में, लिया दोस्त ने भाग ।

 

अवसरवादी दौर में, दुर्लभ है सन्मित्र

वैश्या से आत्मीयता, ज्यों काँटों से इत्र ।

 

हुए पैंतरे के दिवस, खुड़पेचों की रात

मीत !  अभी भी कर रहे, तुम निष्ठा की बात ।

 

है हमने जब जब किया, शीश महल तैयार

तोड़ा मित्रों ने उसे, तब तब पत्थर मार ।

 

वह आया नीचे उतर, मैं पहुँचा जब पास

मुझको मेरे मित्र ने, बना दिया आकाश ।

·  डॉ. अनन्त राम मिश्र 'अनन्त'

गोला गोकर्णनाथ, खीरी

उत्तरप्रदेश - 262802

 

भ्रमर बनी ये आँख

उलझन के धागे मेरे सुलझ न पाते मीत

बदल अचानक हार में गई प्यार की जीत ।

 

सौरभ यौवन का लिये अधर कमल की पाँख

झाँक टहनियों में रही भ्रमर बनी ये आँख ।

 

जो गम की बातें करे गम के गाते गीत

हार मान कर भी सदा रहती उनकी जीत ।

 

साँसों में ही रह गया जीवन हुआ अशेष

पीड़ा पलकों में पले अचरज यही विशेष ।

 

लुटी चाँदनी चाँद भी रोया सारी रात

अब दिल तेरे लिये नहीं अनोखी बात ।

·  डॉ. ममता जैन

Flat no-501, Artika Court, Raffail Street

3107, Limasol, CYPRUS

 

 

 

छंद

अगर उनमें साहस होता तो कई लोग कायर होते - थामस फुलर

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