रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

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विशेषांक

 

डॉ॰ सुरेखा भट्ट

शैक्षणिक योग्यता- एम एस सी, जैवरसायन में पी एच डी
सम्मान-मनिपाल उच्च शैक्षणिक अकादमी (समतुल्य विश्वविद्यालय), मनिपाल, कर्नाटक द्वारा चिकित्सा-शोध कार्य में डॉ॰ टी एम ए पाई पुरस्कार का स्वर्ण पदक (सन् २००५ में)
रचनाएँ- जालस्थल www.poetry.com पर कई अंग्रेजी कविताएँ प्रकाशित
संप्रति- सहायक प्रोफेसर (जैवरसायन), मेलका मनिपाल मेडीकल कॉलेज, मनिपाल, कर्नाटक
ई-मेल- surekhakka@yahoo.com

 

 

 ऊँचाई ही सही

 

ऊँचाई कोई नहीं चाहे
जो चाहे, ऊँचाई का नाम चाहे
ऊँचाई का काम कोई चाहे
मैं भी ऊँचाई चाहूँ
माँगा था मैय्या से एक सच्चा दिल
सच्ची श्रद्दा का स्वच्छ था मंज़िल
पर अपनी क्या मैय्या कब सुनती है
सच्चायी चाहो तो नहीं है मिलती
ऊँचाई चाहो नहीं भी मिलती

पहाड की शीतल ऊँचाई में
चूबते बरफ़ की रुकाई में
तेरे प्रभू के त्रिशूल का न्याय मिले
तेरे स्वामी के डमरु का साय मिले
तो सूनेपन की परछाई ही सही
हाँ मैय्या ऊँचाई ही सही

वसंत पतझड बदलता मौसम,
ऊँचाई में सब कुछ स्तब्ध ही सही
गुमसुम ऊँचाई में दुख सुख
निरस हो दिल तो टूटेगा नहीं
शांत हो मन तो पूजा हो तेरी
ऐसी भक्ती में सन्नाटा ही सही
हाँ मैय्या ऊँचाई ही सही

हँसी खेल में विष जो पिया
सर्पों को अपने तन पे लिया
ऐसी शक्ती का जहां हो धाम
मैय्या, ऐसी ऊँचाई मुझे ज़रूर देना
गैरों को गले लगा सकूँ तो क्या हुआ
तेरे चरणॊं तक अपना शीश तो ला सकूँ
ऐसी ऊँचाई मुझे कभी तो देना


सुरेखा भट्ट

 

 

 

विशेषांक

खुशी का रहस्य त्याग है- एन्ड्रयु कारनेगी

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