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अनिल वत्


भैरवाँ (बलरामपुर, उत्तर प्रदेश) में जन्मे अनिल वत्स नये कवि हैं । इलाहाबाद कृषि संस्थान (समतुल्य विश्वविद्यालय) में परास्नातक (जैवरसायनिकी) में अध्ययनरत । हरिवंश राय बच्चन की 'मधुशाला' के तर्ज पर  लगभग ६० से अधिक छन्द लिख चुके हैं।

सम्पर्क-ग्राम- भैरवाँ, डाकघर- रेहरा बाज़ार, जनपद- बलरामपुर (उ॰ प्र॰)-२७१३०६
ई-मेल-
vatsa001@yahoo.co.in

 

 

छः कविताएँ

 

(1)

तेरे नैनों से मदिरा बरसे
मेरे अधरों के ऊपर

तू है मधु की मधुशाला
मैं मस्त चमन का प्याला हूँ
तू है मस्त नशा जीवन की
मैं तेरी ही हाला हूँ।

बने रहे ये नयन तुम्हारे
बनी रहो तुम मधुशाला
बनी रहे ये दुनिया सारी
जिनके कारण है प्याला

(
२)
तेरे नैनों से मदिरा बरसे
मेरे अधरों के ऊपर

जब आते हैं पीने वाले
दुनिया के मयखाने में
मधु उठाकर मुझमें रखते
जैसे हो पैमाने में

होंठों से तुम लग जाती हो
साकी में तुम रम जाती हो
बचा ही रहता अक्सर मैं
अपने ही दीवानों में

(
३)
तेरे नैनों से मदिरा बरसे
मेरे अधरों के ऊपर

मैं हूँ इक खोटा प्याला
सबने मुझे जुठारा है
तुझको ही पाने के खातिर
सबने मुझे पुकारा है

मुझमें तू रहती है लेकिन!
मैं न तुझको पी पाया
मुझ पर ही रहती है तू तो
पर न तुझको छू पाया


(
४)
तेरे नैनों से मदिरा बरसे
मेरे अधरों के ऊपर

सब पर ही ऐसे बरसी हो
मुझ पर भी मधु बरसाओ
सबमें तुम अक्सर रहती हो
मुझको फिर न ठुकराओ

ऐ! दुनिया के पीनेवालों
आज न जाओ मधुशाला
आज ये मधु मुझपर बरसेगी
सूनी रहेगी मधुशाला

(
५)
तेरे नैनों से मदिरा बरसे
मेरे अधरों के ऊपर

जब तक है मदिरा दुनिया में
जब तक है खोटा प्याला
जब तक हैं पीने वाले
तब तक है तेरी हाला

जब तक है ये मधु का सागर
जब तक है ये मतवाला
जब तक है ये मद-मदहोशी
तब तक है ये स्वरमाला
साथ रहूँगा तेरे मैं, तुम
जहाँ रहोगी सुरवाला

(
६)
तेरे नैनों से मदिरा बरसे
मेरे अधरों के ऊपर

सागर जल मदिरा होगा
नदियाँ होंगी मदिरालय
झील, सरोवर प्याले होंगे
हम होंगे पीने वाले

सागर, नदियाँ, झील, सरोवर
सब होंगे साकी प्याला
नित्य-नियम से इनको पीकर
मैं तो रहूँगा मतवाला
 

 

 

विशेषांक

मूर्खता सब कर लेगी, परंतु बुद्धि का आदर कभी नहीं करेगी- गेटे

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