Category: प्रसंगवश

साहित्य में उठाने गिराने का खेल

पिछले दिनों एक छोटे से साहित्यिक जमावड़े में बात‘नई वाली हिंदी’ से शुरू हुई, जिसमें उन कृतियों पर लंबी बात हुई, फिर अन्य प्रकाशनों से प्रकाशित होनेवाले छोटे-छोटे उपन्यासों पर चर्चा चल निकली। वहां से होते होते साहित्य के तथाकथित मुख्यधारा के लेखन…Read More »

सोशल मीडिया का अराजक तंत्र

कर्नाटक में राजनीतिक गहमागहमी के बीच कांग्रेस पार्टी ने रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता की कुछ पंक्तियां ट्वीट की, ‘सदियों की ठंढी-बुझी राख सुगबुगा उठी/मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है/दो राह, समय के रथ का घर्घर नाद सुनो/सिंहासन खाली करो कि…Read More »

विश्व हिंदी सम्मेलन की आहट से उठे सवाल

By | April 25, 2018

ग्यारहवें विश्व हिंदी सम्मेलन के मॉरीशस आयोजन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसका आयोजन संभवत इस वर्ष अगस्त में किया जाएगा। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की अगुवाई में इस आयोजन को अंजाम दिया जाएगा। सुषमा जी का हिंदी प्रेम जगजाहिर…Read More »

लेखक संगठनों पर वाजपेयी का हमला

By | April 11, 2018

हिंदी साहित्य जगत में एक बार फिर से लेखक संगठनों पर सवाल उठ रहे हैं। इस बार सवाल उठाया है हिंदी के वरिष्ठतम लेखकों में से एक अशोक वाजपेयी ने । हाल ही में उन्होंने वामपंथ को लेकर जो टिप्पणी की है उसके…Read More »

हिंदी को देश में मिले उसका हक

By | January 24, 2018

लोकसभा के हाल में ही समाप्त हुए सत्र में हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलाने को लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बयान का कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने जोरदार विरोध किया। उनका कहना था कि हिंदी राष्ट्रभाषा…Read More »