Category: आलेख

‘शहर-दर-शहर उमड़ती है नदी’

हिन्दी जगत में मुझे नहीं लगता है कि उद्भ्रांत जी का नाम किसी परिचय का मोहताज है। हिन्दी साहित्य के विराट फ़लक पर उन्होंने अनेक कालजयी महाकाव्यों जैसे ‘अभिनव पांडव’, ‘राधामाधव’, ‘त्रेता’, ‘वक्रतुंड’ और ‘अनाद्यसूक्त’ तथा काव्य नाटक ‘ब्लैक होल’ और लंबी कविता ‘रुद्रावतार’ सहित शताधिक कृतियों की रचना की है। यही नहीं, लेखन…Read More »

साहित्य की चोरी से सस्ती लोकप्रियता

इंटरनेट की दुनिया ने हिंदी या कहे प्रत्येक भाषा के साहित्य और लेखन को जनमानस के करीब और उनकी पहुँच में ला दिया है, इससे रचनाकारों की लोकप्रियता में भी अभिवृद्धि हुई है।  किन्तु इन्ही सब के बाद उनके सृजन की चोरी…Read More »

अंग्रेजी मानसिकता से मुक्त हों

मनुष्य अपने विचारों की अभिव्यक्ति किसी न किसी भाषा के माध्यम से ही करता है। भाषा के अभाव में किसी सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय प्रगति की कल्पना नहीं की जा सकती। साहित्य, संगीत, कला, विज्ञान और इतिहास का आधार भाषा ही है।…Read More »

संकीर्णता के आगे चकित ’विश्वमानव’

दिन की वार्ता है कि पिछले चवालीस दिन, यानि 2018 के जनवरी-फरवरी के महीने के दिनों में छब्बीस भारतीय जवान सरहदों पर, विशेषकर जम्मु कश्मीर के इलाकों में मारे गए। उसके पहले भी अनेक मारे गए, आगे भी स्थिति यही होगी। आगे…Read More »