Author: सुशांत सुप्रिय

सुशांत सुप्रिय की कविताएँ

 रिक्शावाले का गीत  यह रिक्शा नहीं , देह मेरी का है विस्तार  यह चढ़ी सवारी , प्राण–वायु पर पड़ता भार  यह कुछ रुपयों के बदले पड़ी देह पर मार  आदमी पर आदमी चढ़ा , जनतंत्र का कैसा प्रकार                             काम वाली बाई का गीत                        झाड़ू–पोंछा करके अपना घर–बार चलाती हूँ                        यह भीख नहीं , मेहनत करके संसार चलाती हूँ   …Read More »

ओमप्रकाश कश्यप की लघुकथाएँ

देवता का भय भीषण दरिद्रता, भूख–प्यास, गरीबी देखकर अकुलाए एक भलेमानुष ने दुनिया बचाने की ठान ली। समाधान की खोज में चलता–चलता वह क्षीर–सागर तक पहुंचा. आंखों के सामने दूध का समंदर लहराते देख उसके आनंद का पारावार न रहा— ‘यहां मेरी चिंताओं का समाधान संभव…Read More »

साहित्य में उठाने गिराने का खेल

पिछले दिनों एक छोटे से साहित्यिक जमावड़े में बात‘नई वाली हिंदी’ से शुरू हुई, जिसमें उन कृतियों पर लंबी बात हुई, फिर अन्य प्रकाशनों से प्रकाशित होनेवाले छोटे-छोटे उपन्यासों पर चर्चा चल निकली। वहां से होते होते साहित्य के तथाकथित मुख्यधारा के लेखन…Read More »

पुश्किन की धरती पर टैगौर के अनुयायी

सृजनगाथा डॉट. कॉम. के बैनर तले रूस की सरजमीं पर राजधानी मॉस्को में आयोजित होने वाला यह 15वां अंतराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन था । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी और हिंदी-संस्कृति को प्रतिष्ठित करने के लिए साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था सृजन-सम्मान, छत्तीसगढ़/साहित्यिक वेब पत्रिका सृजनगाथा डॉट…Read More »

इस डिजिटल जमाने में चाल-चलन ठीक रखें

मध्यप्रदेश में आत्महत्या करने वाले, संत कहे जाने वाले, भय्यूजी महाराज के टेलीफोन से तीन नंबरों पर सौ-सौ बार बात होने की खबर आई है। पुलिस की जांच इन दिनों कुछ आसान हो गई है क्योंकि इंसानों ने बिना फोन, बिना सोशल…Read More »

शशिबाला की कविताएं

By | June 15, 2018

कवि तो कहेगा जब जब सूरज को देखेगा उसके उगने की बात कहेगा समुद्र के गर्भ से शनैः शनैः ऊपर उठने की नरम गुलाबी रंगत से बदल कर गर्म अग्नि में बदलने की पूरे आकाश को लांघ कर धीरे धीरे नीचे उतरने…Read More »

सेक्स-शोषण पर न खास कानून की जरूरत, न विशेष अदालत की, बस मुजरिमों को बचाना बंद हो..

पाकिस्तान की एक खबर है कि वहां की एक नामी स्कूल में पढऩे वाली एक छात्रा ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि किस तरह एक प्रैक्टिकल परीक्षा के दौरान इम्तिहान लेने वाले आदमी ने कई छात्राओं के साथ यौन दुव्र्यवहार किया।…Read More »

रोमेश भंडारी और केशरीनाथ त्रिपाठी की काली कथा

जानने वाले जानते हैं कि अगर विधानसभा अध्यक्ष सत्ता पक्ष का हो , क़ानून जानता  हो , जूनून का धनी हो तो खुदा भी कोई सरकार नहीं गिरा सकता। लोकसभा के कभी अध्यक्ष रहे सोमनाथ चटर्जी को भूल जाइए।  जिन्हों ने संसदीय…Read More »

सोशल मीडिया का अराजक तंत्र

कर्नाटक में राजनीतिक गहमागहमी के बीच कांग्रेस पार्टी ने रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता की कुछ पंक्तियां ट्वीट की, ‘सदियों की ठंढी-बुझी राख सुगबुगा उठी/मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है/दो राह, समय के रथ का घर्घर नाद सुनो/सिंहासन खाली करो कि…Read More »

एक महान संभावना पर बमबारी करता ट्रंप

जिंदगी में कई ऐसे मौके आते हैं जब हालात नाजुक रहते हैं, और फैसले लेने वाले लोगों से समझदारी की उम्मीद की जाती है। ऐसा माना जाता है कि जिम्मेदार लोग हालात देखते हुए गैरजरूरी हरकतों से बचेंगे, और मौके को अच्छी…Read More »