Author: सुनील कुमार

एक महान संभावना पर बमबारी करता ट्रंप

जिंदगी में कई ऐसे मौके आते हैं जब हालात नाजुक रहते हैं, और फैसले लेने वाले लोगों से समझदारी की उम्मीद की जाती है। ऐसा माना जाता है कि जिम्मेदार लोग हालात देखते हुए गैरजरूरी हरकतों से बचेंगे, और मौके को अच्छी…Read More »

वरिष्ठ कवि उद्भ्रांत को प्रथम टैगोर सम्मान

रूस में राधामाधव रायपुर । 21 वीं सदी के पहले व लगभग एकमात्र महाकाव्यकार, आधुनिक हिंदी के शीर्षस्थ कवि श्री रमाकांत शर्मा (उद्भ्रांत) द्वारा रचित व अँगरेज़ी, ओडिया सहित कई भाषाओं में अनुवाद के साथ बहुचर्चित काव्यकृति ‘राधामाधव’ पर प्रथम गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगौर अंतरराष्ट्रीय…Read More »

दाम्पत्य

काव,काव,काव! आम के पेड़ पर बैठकर काला कौवा बोल रहा था। जल्दी से बिस्तर से उठकर बैठ गई शांति। पीछे वाला दरवाजा खोला। अभी तक सूर्योदय नहीं हुआ था, मगर पूर्व दिशा का आसमान लाल दिखने लगा था। चिड़ियां कलरव करते हुए अपने घोंसले से…Read More »

सुबोध श्रीवास्तव की कविताएँ

चुका नहीं है आदमी..! बस, थोड़ा थका हुआ है अभी चुका नहीं है आदमी! इत्मिनान रहे वो उठेगा कुछ देर बाद ही नई ऊर्जा के साथ, बुनेगा नए सिरे से सपनों को, गति देगा निर्जीव से पड़े हल को फिर, जल्दी ही…Read More »

कठुआ की पीड़िता बच्ची के बहाने नफ़रत और जहर बो कर लाखों-करोड़ों का खेल

महबूबा मुफ्ती ने टेम्पल , रिचुवल एंड रेप की इबारत लिख कर जम्मू के हिंदुओं में आतंक का भय पैदा कर दिया है जम्मू के कठुआ में नन्हीं बच्ची के साथ बलात्कार का मामला दुःख , और शर्म का सबब है। पूरा देश…Read More »

विश्व हिंदी सम्मेलन की आहट से उठे सवाल

By | April 25, 2018

ग्यारहवें विश्व हिंदी सम्मेलन के मॉरीशस आयोजन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसका आयोजन संभवत इस वर्ष अगस्त में किया जाएगा। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की अगुवाई में इस आयोजन को अंजाम दिया जाएगा। सुषमा जी का हिंदी प्रेम जगजाहिर…Read More »

लोकतंत्र में सामंती पाखंडों का बोझ जनता क्यों ढोए?

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अभी गुजरात दौरे पर पहुंचे तो अंग्रेजों के वक्त की एक परंपरा के मुताबिक प्लेटफॉर्म पर पांव पोंछना बिछाकर उनका स्वागत किया गया। उन्होंने पहले ही ऐसे किसी भी स्वागत की परंपरा को खत्म कर दिया है और…Read More »

लेखक संगठनों पर वाजपेयी का हमला

By | April 11, 2018

हिंदी साहित्य जगत में एक बार फिर से लेखक संगठनों पर सवाल उठ रहे हैं। इस बार सवाल उठाया है हिंदी के वरिष्ठतम लेखकों में से एक अशोक वाजपेयी ने । हाल ही में उन्होंने वामपंथ को लेकर जो टिप्पणी की है उसके…Read More »

अंग्रेजी मानसिकता से मुक्त हों

मनुष्य अपने विचारों की अभिव्यक्ति किसी न किसी भाषा के माध्यम से ही करता है। भाषा के अभाव में किसी सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय प्रगति की कल्पना नहीं की जा सकती। साहित्य, संगीत, कला, विज्ञान और इतिहास का आधार भाषा ही है।…Read More »

भारत की इस्लामी विरासत मध्यम और विनम्र है, लेकिन मुसलमानों को इसे ज़िंदा रखने की जरूरत है

भारत में महानतम इस्लामी विरासत का आधार फ़ारसी सभ्यता और संस्कृति, प्राचीन हिन्दी सभ्यता और उसकी विविधतावाद पर हैl उदहारण के लिए मध्य एशिया के साथ भारत के प्राचीन संबंधों के पेट से जन्म लेने वाले तसव्वुफ़ ने “वह्दतुल वजूद” का एक…Read More »