रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

अंक - 11, अप्रेल, 2007

  संपादकीय कार्यालयः एफ-3, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, आवासीय कॉलोनी, रायपुर, 492001 ई-मेलः srijangatha@gmail.com

 

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व्यंग्य

 

चिरकुट एम एन सी संवाद

 

       म एन सी वाले बड़े परेशान थे कि पूरी दुनिया में एक से एक सामान बेचने के बाद भी उनके कच्छे की सेल में उछाल नहीं आ रहा है। इसका कारण जानने के लिये उन्होंने एक उच्च स्तरीय कमेटी भारत में भेजी । कमेटी ने अपने ढंग से सभी बड़े-बड़े लोगों को बुलाया । क्या नेता क्या फ़िल्म स्टार, क्या बिजनेस मैंन और क्या उच्च अधिकारी गण । सभी को फ़ाईव स्टार होटल में टिकाया गया । हाँ, उनकी अंदरूनी स्थिति पर नज़र रखने के लिये हर बाथरूम में खूफ़िया कैमरे फ़िट कर दिये गये ।

 

       हालात इतने बुरे निकले कि जहाँ-जहाँ जाँच की गयी यह पाया गया कि हर किसी ने पटरे वाला कच्छा पहन रक्खा है। आईएएस है तो क्या हुआ कच्छा पटरे वाला ही है, बिजनेस मैंन हैं,  करोडपति हैं  पर नहीं  कच्छा पहना है तो बस पटरे वाला 

 

       नेता और स्टार तो खैर होते ही चिरकुट हैं 

 

       खैर सेमीनार शुरु हुआ और लोगों के विचार आने लगे ।  एक सीईओ ने कहा हमें ब्रांडेड कच्छे की सेल बढाने के लिये लोगों को ऐड द्वारा प्रेरित करना चाहिये । तभी किसी नेता ने कहा हमें लोगों को बताना चाहिये कि ब्रांडेड कच्छा पहन कर हम अमेरिका के और करीब आ सकते हैं तब परमाणु समझौता क्या हम वहाँ के लास वेगास के ग्लैमर तक के लिये समझौता कर सकते हैं । अभिनेता बोला - वैसे तो पटरे वाला कच्छा हमें अपनी जान से भी प्यारा है पर कोई हमें ब्रांडेड कच्छे का एड दे तो हम सौ करोड के बदले अपनी हर फ़िल्म में उसी में नज़र आऊँगा ।


       खैर एम एन सी की टीम ने कहा वह सब तो ठीक है मगर एक बात नहीं समझ में आयी -आप सभी इतने बडे लोग हैं फ़िर भी आप लोग पटरे वाला कच्छा क्यों पहनते हैं।
सभी ने एक दूसरे की आँख में झाँका और ठठा कर हँस पडे । तो आपको यह राज पता चल ही गया ।


       हाँ, पर इसमें आपको शर्म नहीं आती । बीस हजार और तीस हजार का सूट और उसके नीचे दस रुपये का कच्छा ।


       लो कर लो बात, अरे आज तक कच्छा सूट के ऊपर से दिखा है क्या
? और जिसने हमारा कच्छा देखा उसे इससे कोई मतलब ही नहीं कि हमने पहना क्या है ? अरे हम तो नंगे रहने के आदी है वो तो बचपन से हमारी आदत लगी है इसीलिये इसे पहन लेते हैं वर्ना......खैर तुम क्या जानो पटरे वाले कच्छे का अरे इसे पहन कर जबरदस्त कम्फ़र्ट फ़ील होता है। हवा आती जाती रहती है यह पहनने और उतारने में बहुत आरामदेह है इतना ही नहीं इसका लुक बडा ग्लैमरस है ।


       सबसे बडी बात यह है कि इसमें हमारे दाग धब्बे बडी आसानी से छुप जाते हैं और ये ढीले भी बहुत होते हैं हम हिन्दुस्तानी कच्छे के बडे ढीले आदमीं होते हैं हमारे देश में जो काम किसी भी ताकत से न हो रहा हो वह कच्छे की ताकत से हो जाता है। एम एन सी चकराया फिर तो हमारा कच्छा कभी यहाँ बिक ही नहीं सकता चाहे जितना भी अच्छा क्यों न हो ।


       तुम्हारे पास कोई भी चीज हमसे अच्छी नहीं है यह अलग बात है कि हम इंपोर्टेड पर लट्टू रहते है।


       इतना सुनते ही एम एन सी भडक गया । बोला तुम भारतीय बडे चिरकुट टाईप के लोग हो। इतना सुनते ही सभी में एकता पैदा हो गयी और स्टेज पर चढ कर हीरो बोला
अबे कपडे तुम्हारे पास नहीं हैं और संस्कार भी तुम सब भरे बाजार में नंगे टहलते हो इसी लिये तुम अपना ब्राडेड कच्छा दिखाते फ़िरते हो। मुझे तो लगता है कि तुम लोगों में सांस्कृतिक दीवालियापन भी है तभी तो तुम कई बार कच्छा दिखाने के लिये ही नंगे घूमते हो ।


       तब तक नेता बोला नीचे से ही - अबे सुन एम एन सी तुम साले पैसे के बल पर आम पब्लिक को लूटते हो । क्यों तुम भी तो अपने एक एक पैसे के लिये नाक रगडते हो हमारे देश के ईमानदार लोगों को खरीदते हो उन्हें ब्लैकमेल करते हो । तो बोलो चिरकुट कौन हुआ ज़रा सोचो।


       तब तक बुद्धिजीवी बोले - अरे झगडा काहे करते हो,  उसे अपना कच्छा बेचने और नया फ़ैशन लाने की परमिसन दे दो जो चाहेगा खरीदेगा और जिसकी औकात होगी वह ब्रांडेड पहनेगा।


       एम एन सी खुश हुआ कम से कम बुद्धिजीवी तो उसके साथ है
, तब तक सीईओ हँसा - अबे खुश मत हो इस प्राणी को कोई नहीं पूछता इसकी टीआरपी सबसे कम है इसे तो कोई सुनने वाला चाहिए बस हो गया काम ।


       खैर एम एन सी को उम्मीद है कि वह सूट के ऊपर कच्छे पहने का फ़ैशन इस बार अपने माडल से हर फ़ैशन शो में लांच करेगा और यह प्रयोग हिट हो जायेगा।
 

       रईस बाप की बिगडी औलाद जरूर ब्राडेड़ कच्छा पहनने लगेगी। वैसे इससे उनके कैरेक्टर में सुधार की गुंजाईश को देखते हुये उम्मीद कम है कि ऐसे बाप बेटे को फ़िजूलखर्ची की इजाजत देंगे।

oमुरली मनोहर श्रीवास्तव

 

 

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