रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

अंक - 11, अप्रेल, 2007

  संपादकीय कार्यालयः एफ-3, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, आवासीय कॉलोनी, रायपुर, 492001 ई-मेलः srijangatha@gmail.com

 

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लघुकथा

 

 

भीतर के आँसू

- स्वं.रवीन्द्र कंचन

       सुहाग रात को वह अपनी नई नवेली दुल्हन से पूछ रहा था -  ‘यदि तुमने किसी से प्यार किया हो, जो अविवाहित हो, योग्य हो और तुम्हें विश्वास के साथ अपना सके तो निःसंकोच कहो मैं उसकी अमानत उसके पास सुरक्षित पहुँचा दूंगा । किन्तु अभी तक तुमने किसी से भी प्यार नहीं किया और यदि किया भी तो अब वह तुम्हें अपनाने में किसी भी प्रकार समर्थ न हो तो मेरी बाहों में आ जाओ।

      

       दुल्हन की आँखों से आसुँओं की धारा बह निकली वह राकेश के पेरों पर गिरकर सिसकने लगी । उसके मुँह से सिर्फ इतना ही निकला..... अमर..... ।  ‘कौन.... । अमर.... । डॉ. अमर....... मेरा मित्र अमर..... । अरे आज तक उसने मुझे यह क्यों नहीं बताया..... ।

 

       कमरे में सिसकियों की आवाज़ गूँजने लगी । राकेश का स्कूटर अमर के फ्लैट की ओर दौड़ चला ।

 

       डॉ. अमर आसुँओं के सैलाब में डूबा बेहोश पड़ा था । राकेश ने किसी प्रकार उसे स्कूटर पर बिठाया और अपने सुहाग कक्ष में लाकर अपनी दुल्हन की गोद में डाल दिया । अब उसका स्कूटर अपनी प्रेमिका के बंगले की ओर दौड़ रहा था जहाँ उसकी प्रेमिका की शादी हो रही थी । शादी पूर्ण हो चुकी थी, विदाई की तैयारी की जा रही थी । दुल्हन की कार सजायी जा रही थी । राकेश  कार सजाने में भिड़ गया ।

 

       लोगों के आँसू आँखों से बाहर की ओर निकल रहे थे पर राकेश के आँसू आखों से भीतर की ओर जा रहे थे.....

o द्वारा- राजन देव मंहत

मु.पो. घरघोड़ा

रायगढ़, छत्तीसगढ़

 

एक कातिल की आखिरी बयान

- जीतेन्द्र चौधरी

मीलार्ड, मेरा नाम सुनीता है। हाँ मै अपराधी हूँ, मैने अपराध किया है, कत्ल किया है, उस शख्स का,जिसको मै सबसे ज्यादा चाहती थी। यह जान बूझ कर किया गया कत्ल है और मुझॆ इसका कोई अफ़सोस नही। मेरे वकील ने कहा कि गलती मान लो, तो सजा कम हो जायेगी, लेकिन कौन कौन सी गलती स्वीकार करूं।जब मैने होंश सम्भाला अपने माता पिता को हमेशा लड़ते पाया। मेरे बाप का कहना था कि मै अपनी मां कि गलती की वजह से पैदा हुई क्योंकि उस दिन मां वो वाली पिल्स खाना भूल गयी थी।लेकिन इसमे मेरा क्या कसूर? मुझे क्यों सजा मिली? मेरे बाप ने मुझे कभी भी प्यार नही किया,कभी नही पुचकारा।। प्यार की जगह मुझे मिली मार और सिर्फ़ मार। सरकारी वकील ने कहा कि यह क्रूरता से किया गया कत्ल है, लेकिन क्रूरता तो उन्होने देखी ही कहाँ है। मुझे मेरे बाप से बात बेबात कभी झापड़, तो कभी बैल्ट,कभी जूते और कभी ना जाने क्या क्या मिला, ये सब क्रूरता नही थी तो और क्या था। मेरे बाप का मेरे प्रति व्यवहार देखकर मेरी मां बीमार पड़ गयी और भगवान को प्यारी हो गयी।

 

मुझे पढाई के लिये हमेशा डांट पड़ती थी, मेरा बाप मेरी पढाई के खिलाफ था, और वो नही चाहता था कि मै स्कूल जाऊं, इसलिये स्कूल छोड़ने और लाने की जिम्मेदारी हमारे पड़ोसी अंकल सैम की थी, अंकल सैम, बहुत अच्छे इन्सान थे, लेकिन सिर्फ़ तब तक, जब तक उन्होने मेरे कोमल अंगो से छेड़छाड़ करना नही शुरु किया। उसके बाद उनमे और जानवर मे कोई खास फर्क नही दिखता था।मै जानती थी कि यदि मै यह बात अपने बाप को बताती तो वो विश्वास नही करता शायद मेरी पढाई ही बन्द कर दी जाती। इसीलिये मै चुप रही और सब सहती रही।

 

बाप की उपेक्षा के बावजूद मैने कालेज मे एडमीशन लिया।कालेज मे मेरी जिन्दगी मे अमित आया, अमित………मेरे सपनो का राजकुमार। बड़े घराने का लड़का लेकिन बहुत ही शालीन। उसने मुझे बड़े बड़े सपने दिखाये, साथ जीने मरने की कसमें खाई।हम शामें साथ साथ बिताने लगे, एक दिन हम डिस्को गये और अमित ने मुझे कोल्ड ड्रिंक पीने को दी।फिर मुझे कुछ नही याद कि क्या हुआ। सुबह मैने अपने आपको अमित के फ़्लैट मे पाया और मै अपना सबकुछ लुटा चुकी थी,उस इन्सान के हाथों जिस पर मुझे पूरा भरोसा था। अमित जा चुका था, सदा के लिये………… फिर कभी मैने उसे नही दिखा। बाद मे मुझे पता लगा कि मै तो एक शर्त थी,सिर्फ़ एक शर्त, जो अमित ने अपने दोस्तों के साथ लगाई थी। लेकिन इस संसार मे औरत एक वस्तु की तरह शर्त क्यों मानी जाती है?

 

जिन्दगी ने कई मोड़ लिये और मेरी जिन्दगी मे रवि आया। जिसके साथ मैने घर बसाया।अपने सपनों का घर, जिसमे सिर्फ़ मै और रवि थे। किसी तीसरे के लिये कोई जगह नही थी। लेकिन पता नही कैसे इस घर को नजर लग गयी। एक दिन मै अपने आफिस से अचानक जल्दी घर आ गयी तो मैने अपने बैडरूम मे रवि को मेरी बैस्ट फ़्रेन्ड के साथ हमबिस्तर पाया। उस जगह जहाँ मुझे होना चाहिये था। मेरी आंखो के सामने जैसे अन्धेरा सा छा गया, दिल मानो धड़कना ही भूल गया। इन दोनो ने मेरे विश्वास को चूर चूर कर दिया था, वो पति जिसे मै दुनिया मे सबसे ज्यादा चाहती थी, वो सहेली जिस पर मुझे पूरा पूरा भरोसा था,दोनो ने मुझे धोखा दिया। मेरे सुखी जीवन में आग लगा दी और मुझे कंही का नही छोड़ा। इसलिये मुझे जो क्रूरता अपने बाप से मिली थी वो मैने इन दोनो पर निकाल दी, मार डाला…..हाँ मार डाला मैने इन दोनो धोखेबाज इन्सानों को, क्योंकि इन दोनो को जीने का कोई हक नही था।

 

मुझे अपने किये पर कोई पछतावा नही है, और ना ही मै आपसे किसी रहम की भीख मांगती हूँ। लेकिन मै आप सभी से एक सवाल पूछती हूँ। मुझे क्रूर बनाया किसने? इस समाज ने। जज साहब, सभी मुझे अपराधी कहते है, लेकिन अंकल सैम ने मेरा यौन उत्पीड़न किया, क्या वो अपराधी नही था? अमित ने मेरी इज्जत लूटी, क्या वो अपराधी नही था? रवि और मेरी सहेली ने मुझे धोखा दिया, क्या उन्होने अपराध नही किया? लेकिन आपका कानून शायद…………मुझे ही अपराधी ठहराये। इसलिये मै आपसे निवेदन करती हूँ कि मुझे फांसी दे दी जाय, वैसे भी मै इस गन्दी दुनिया मे जीना नही चाहती।

 

  

oJitendra Chaudhary

PO 26565, Safat

Kuwait 13126

 Middle East

 

 

 

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अपने ज्ञान पर अभिमान करना सबसे बड़ा अज्ञान है - जर्मी टेलर

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