रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

अंक - 11, अप्रेल, 2007

  संपादकीय कार्यालयः एफ-3, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, आवासीय कॉलोनी, रायपुर, 492001 ई-मेलः srijangatha@gmail.com

 

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बचपन

 

 शंभूलाल शर्मा बसंत की 5 बाल कविताएं

 

नन्हीं गौरेया

देख तनिक तू छोटू भैया

चूँ-चूँ कर नन्हीं गौरेया । 

गाती गाना

चुगती दाना ।

दिन भर इसका

आना-जाना ।

फुदक-फुदक कर घंर-आँगन में

करती रहती ता-ता थैया ।

ज्यादा सोना

अवसर खोना ।

बात-बात में

रोना-धोना ।

चूँ-चूँ स्वर में बता रही है

ये सब तो हैं गलत रवैया ।

 

मदारी

एक मदारी गाँव में

नीम पेड़ की छाँव में ।

खेल अनोखा

मैंने देखा ।

भालू करता

अभिन्य चोखा ।

नाच-नाच कर ताता थैया

बाँध घुँघरू पाँव में ।

बारी-बारी

खेल उधारी ।

दिखा-दिखाकर

खूब मदारी ।

भालू के संग खेल रचाता

जान लगाकर दाँव में ।

 

शेर दहाड़ा

बंदर का जब बजा नगाड़ा

बहुत जोर से शेर दहाड़ा ।

सुन रे बंदर

अरे छछुंदर ।

सुखद-शांत सब

कितने सुंदर ।

शोर मचाकर इस जंगल में

तुमने सारा काम बिगाड़ा ।

आँखें खोलो

हृदय टटोलो ।

निर्भय होकर

फिर तुम बोलो ।

क्या होगा जंगल में कोई

करे इस तरह तीन-तिगाड़ा ।

 

गुपचुप क्यों

तोता बोला- सुन री मैंना

गुपचुप-गुपचुप क्योंकर रहना ।

ता-रा-रा-रा

प्यारा-प्यारा ।

झींगुर चाचा

ले इकतारा ।

रात-रात भर गीत सुनाते

सच मानो उनका क्या कहना ।

दिन भर गाती

नहीं अघाती ।

बगिया-बगिया

धूम मचाती ।

कंठ मधुर जिसके सुखदाई

है कोयल अपनी ही बहन ।

 

परी की सौगात

अजी बताऊँ सच्ची बात

एक परी की थी यह बात ।

झांक रही थी

हाँक रही थी ।

रस्ता मेरा

ताक रही थी ।

नींद-परी के संग-संग आई

अजब चाँदनी थी उस रात ।

अजब सलोने

खेल-खिलौने ।

और मिठाई

भर-भर दोने ।

रहे देखते चाँद-सितारे

चली गई देकर सौगात ।

oशभूलाल शर्मा वसंत

करमागढ़, पो. हमीरपुर

व्हाया-तमनार

रायगढ़, छत्तीसगढ़ - 491117

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आपकी प्रतिक्रिया

कभी-कभी सच के उदय की प्रतीक्षा भी करनी चाहिए - अज्ञात

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