|
|
||||||||||
|
|
||||||||||
|
|||||||||||
|
◊अपनी बात◊कविता◊छंद◊ललित निबंध◊कहानी◊लघुकथा◊व्यंग्य◊संस्मरण◊ कथोपकथन◊ भाषांतर◊संस्कार◊पुस्तकायन ◊बचपन◊हलचल◊विशेषांक◊सृजनधर्मी◊लेखकों से◊संपादक बनें◊चतुर्दिक्◊शेष-विशेष◊पुरातनअंक◊अभिमत◊मुख्यपृष्ठ |
|
|||||||||
शंभूलाल शर्मा बसंत की 5 बाल कविताएं
नन्हीं गौरेया देख तनिक तू छोटू भैया चूँ-चूँ कर नन्हीं गौरेया । गाती गाना चुगती दाना । दिन भर इसका आना-जाना । फुदक-फुदक कर घंर-आँगन में करती रहती ता-ता थैया । ज्यादा सोना अवसर खोना । बात-बात में रोना-धोना । चूँ-चूँ स्वर में बता रही है ये सब तो हैं गलत रवैया ।
मदारी एक मदारी गाँव में नीम पेड़ की छाँव में । खेल अनोखा मैंने देखा । भालू करता अभिन्य चोखा । नाच-नाच कर ताता थैया बाँध घुँघरू पाँव में । बारी-बारी खेल उधारी । दिखा-दिखाकर खूब मदारी । भालू के संग खेल रचाता जान लगाकर दाँव में ।
शेर दहाड़ा बंदर का जब बजा नगाड़ा बहुत जोर से शेर दहाड़ा । सुन रे बंदर अरे छछुंदर । सुखद-शांत सब कितने सुंदर । शोर मचाकर इस जंगल में तुमने सारा काम बिगाड़ा । आँखें खोलो हृदय टटोलो । निर्भय होकर फिर तुम बोलो । क्या होगा जंगल में कोई करे इस तरह तीन-तिगाड़ा ।
गुपचुप क्यों तोता बोला- सुन री मैंना गुपचुप-गुपचुप क्योंकर रहना । ता-रा-रा-रा प्यारा-प्यारा । झींगुर चाचा ले इकतारा । रात-रात भर गीत सुनाते सच मानो उनका क्या कहना । दिन भर गाती नहीं अघाती । बगिया-बगिया धूम मचाती । कंठ मधुर जिसके सुखदाई है कोयल अपनी ही बहन ।
परी की सौगात अजी बताऊँ सच्ची बात एक परी की थी यह बात । झांक रही थी हाँक रही थी । रस्ता मेरा ताक रही थी । नींद-परी के संग-संग आई अजब चाँदनी थी उस रात । अजब सलोने खेल-खिलौने । और मिठाई भर-भर दोने । रहे देखते चाँद-सितारे चली गई देकर सौगात ।
oशभूलाल शर्मा वसंत करमागढ़, पो. हमीरपुर व्हाया-तमनार रायगढ़, छत्तीसगढ़ - 491117 lll
|
|||||||||||
|
|
|
|
|||||||||
|
◊अपनी बात◊कविता◊छंद◊ललित निबंध◊कहानी◊लघुकथा◊व्यंग्य◊संस्मरण◊ कथोपकथन◊ भाषांतर◊संस्कार◊पुस्तकायन ◊बचपन◊हलचल◊विशेषांक◊सृजनधर्मी◊लेखकों से◊संपादक बनें◊चतुर्दिक्◊शेष-विशेष◊पुरातनअंक◊अभिमत◊मुख्यपृष्ठ |
|||||||||||
|
|||||||||||