नई दिल्ली । जनगणना में जाति को शामिल करने के विरोध में "सबल भारत" द्वारा संचालित "मेरी जाति हिंदुस्तानी आंदोलन" ने 27 जुलाई को एक विशाल मार्च का आयोजन किया। सैकड़ों, छात्र, लेखकों, पत्र्कारों, बुद्घिजीवियों, उद्योगपतियों एवं किसानों ने 13, बाराखंबा रोड से जंतर-मंतर तक मार्च किया। इस मार्च का नेतृत्व आंदोलन के सूत्र्धार डॉ. वेदप्रताप वैदिक ने किया।
मार्च में भाग लेनेवाले अनेक राष्ट्रीय ख्याति के लोग नारे लगाते जा रहे थे कि "सौ बातों की बात यहीं, जनगणना में जात नहीं", "जनगणना में जात नहीं, भारत को तू बांट नहीं", "भारतमाता की यह बानी, मेरी जाति हिंदुस्तानी" आदि।
मार्च का समापन जंतर-मंतर पर हुआ। जंतर-मंतर पर एक विराट सभा हुई। सभा में विशेष रूप से भाजपा के वरिष्ठ नेता, जाने-माने अधिवक्ता तथा राज्यसभा सांसद श्री राम जेठमलानी, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष तथा पूर्व राज्यपाल श्री बलराम जाखड़, प्रसिद्घ पत्र्कार टाइम्स आफ़ इंडिया के पूर्व मुख्य संपादक डॉ. दिलीप पडगांवकर, पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री आरिफ़ मो. खान, भारत के पूर्व जाइंट चीफ आफ इंटेलिजेंस श्री आर. के. खंडेलवाल, राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तथा पूर्व राज्यसभा सांसद श्री महेशचंद्र शर्मा, पूर्व राजदूत श्री जगदीश शर्मा, प्रसिद्घ नृत्यागंना सुश्री उमा शर्मा, प्रसिद्घ समाजसेवी श्रीमती अलका मधोक एवं फ़िल्म मेकर डॉ. लवलीन थडानी, जैन मुनि डॉ. लोकेशचंद्र, ईसाई नेता श्री फ्रांसिस आदि वक्ताओं ने सभा को संबोधित किया। सभा की अध्यक्षता आंदोलन के सूत्र्धार डॉ. वेदप्रताप वैदिक ने की।
सभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता तथा भाजपा के सांसद श्री राम जेठमलानी ने कहा कि मैं इस आंदोलन का पुरजोर समर्थन करता हूँ तथा इस आंदोलन के लिए मैं अपने रक्त की अंतिम बूँद तक बहाने को तैयार हूँ। हमारे देश को गुलाम बनाए रखने के लिए जाति का आधार ही अंग्रेजों का मुख्य हथियार था। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राबर्ट क्लाइव ने ईस्ट इंडिया कंपनी को लिखे अपने पत्र् में कहा था कि हम भारत में ख़ुश हैं, हमारी ताक़त तथा व्यापार दिन प्रतिदिन मजबूती से बढ़ रहा है, क्योंकि भारत के लोग जाति के नाम पर बंटे हुए हैं।
श्री बलराम जाखड़ ने कहा कि जनतंत्र में हम सभी को अपनी बात कहने का हक़ है। भारत की अखंडता एवं एकता की रक्षा हमारा धर्म है। हमें ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे देश बंटे। जनगणना में जाति को शामिल करना देशद्रोह के समान है। यह सबसे बड़ा कुकर्म है। इससे बड़ा बुरा काम कोई और नहीं हो सकता।
वरिष्ठ पत्र्कार डॉ. दिलीप पडगांवकर ने कहा कि जातिगत बातें मात्र वोट बैंक की राजनीति के लिए है। हमारे लिए देश का संविधान सबसे प्रमुख है और गणतंत्र् को बचाने के लिए जातीय जनगणना का विरोध करना आवश्यक है। संविधान में स्पष्ट कहा गया है कि जाति, धर्म के आधार पर कोई भी भेदभाव नहीं होना चाहिए। आंबेडकर का अंतिम भाषण सभी को पढाया जाना चाहिए, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा था कि कोई भी जातीय-भेदभाव नहीं होना चाहिए।
पूर्व राजदूत जगदीश शर्मा ने कहा कि जातीय आधार पर देश को बांटने की कोशिश भारत को सारी दुनिया में बदनाम कर देगी। भारत की सेना इसीलिए महान मानी जाती है कि उसका आधार जाति नहीं, राष्ट्र है।
पूर्व जाइंट चीफ़ आफ़ इंटेलिजेंस आर. के. खंडेलवाल ने कहा कि देश को जोड़ने के लिए गांधीजी ने हिन्दु-मुस्लिम एकता का काम किया था। आज हम जातिगत बंटवारा कर के देश को कहां ले जा रहे है ?
पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री आरिफ मो. खान ने कहा कि जातीय गणना बिल्कुल अवैज्ञानिक है। इसके आधार पर गरीबों का नहीं, कुछ जातियों की मलाईदार परतों का ही भला हो सकता है।
रैली को संबोधित करते हुए जैन मुनि लोकेशजी ने कहा कि जाति से बड़ा हमारा राष्ट्र है। यदि राष्ट्र एक और अख्ंाड रहा तो हम रहेंगे, वर्ना हम ही कहां रह पाएंगे। दलित ईसाई नेता फ्रांसिस ने कहा कि जाति एक घातक बीमारी है। हम सब एक हैं। जातिगत आधार पर कोई भेदभव नहीं होना चाहिए।
इस मौक़े पर प्रसिद्घ कलाकार उमा शर्मा, समाजिक कार्यकर्ता श्रीमती अलका मधोक और श्रीमती लवलीन थडानी ने भी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन आंदोलन के सूत्रधार डॉ. वेदप्रताप वैदिक ने किया। श्री अशोक कावडि़या ने मुख्य अतिथियों और जुलूस में भाग लेनेवाले साथियों को धन्यवाद दिया।
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