ये ऋतु जाने को है अब

प्रकाशन :17-03-2012
बीनू भटनागर
रंग बिरंगे सुमन सुगन्धित,
तितली भंवरे है अनुबन्धित।
खिली हुई हैं कुछ कलियाँ,
पंचम सुर मे चहकीं चिडियाँ।

आमो पर छाई अमराई,
कुहू-कुहू कोयलिया गाई।
ऋत परिवर्तन का सदेशा,
तेज़ चमकती धूप ने भेजा।

मन भावन ये मौसम अतिथी,
कुछ दिन और रुको मेरे साथी।
जाकर शीघ्र न आ पाओगे,
पूरे वर्ष याद बहुत आओगे।

ऋतु परिवर्तन के ये घेरे,
समय चक्र मे बंधे घनेरे।
रोक सका है कौन इन्हे कब,
ऋतु बदलेगी घीरे धीरे अब।

 बीनू भटनागर
ए ,104 अभियन्त अपार्टमैंन्ट
वसुन्धरा एनक्लेव
दिल्ली, - 110096
tanuja11@gmail.com
 
         
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