दो कविताएँ

प्रकाशन :14-08-2010
अनीता चमोली ‘अनु’

बंधन

बंधन देना जीवन भर का
बंधन का विश्वास न देना
क्षण भर का ही प्यार देना
नफ़रत का अहसास न देना
तिनके का हो नीड़ अपना
चाहे ये संसार न देना
मन में कोना-सा हो कोई
एक ख़ाली मकान न देना
पल भर का हो अपनापन
लम्बी-सी तन्हाई न देना
फूल भले ही देना एक
गुलशन के ख़्वाब न देना
एक दीये की लौ ही काफ़ी
सूरज का तुम ताप न देना
हिस्से में हो रात सही पर
चौदहवीं का चांद न देना
नहीं चाहिए ख़ुशहाली पर
लोगों का उपहास न देना
जनम-जनम का न हो साथ
इस जीवन में साथ तो देना
जीवन की हो अंतिम साँस
ऐसी कोई साँस न देना।
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 अनीता चमोली ‘अनु’
द्वारा-श्री भगवान वर्मा
काण्डई, पौड़ी,
जनपद पौड़ी गढ़वाल 246001,
उत्तराखण्ड
anitachamolianu@gmail.com
 
         
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