मृत्युंजय को प्रतिष्ठित गोल्डस्मिथ्स फेलोशिप

प्रकाशन :01-03-2010
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पटना । नालंदा जिला निवासी मृत्युंजय कुमार प्रभाकर बिहार के पहले छात्र हैं जिन्हें लंदन की गोल्डस्मिथ्स यूनिवर्सिटी से फेलोशिप दिया जा रहा है । वे कला एवं सौंदर्य पर रिसर्च के लिए दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय गोल्डस्मिथ्स यूनिवर्सिटी में 'कोलोनियल व पोस्ट कोलोनियल भारत में शेक्सपियर' पर शोध करेंगे।

श्री प्रभाकर नालंदा के छोटे से गाँव सैदनपुर में जन्मे मृत्युंजय ने 1999 में पटना कामर्स कालेज से अँगरेज़ी में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है । थिएटर से जुड़ाव ने उन्हें कला के क्षेत्र में रिसर्च के लिए प्रेरित किया।

मृत्युंजय 2004 में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में 'स्कूल आफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स' के एमए कोर्स में दाखिला लेकर पढ़ाई कर रहे हैं। वे कहते हैं- 'थियेटर ग्रुप से जुड़ाव ने ही मुझे आज इस काबिल बनाया है। 'बिदेसिया' नाटक और उसका कथ्य मेरा सबसे प्रिय विषय है। विश्वस्तर पर एक नई संस्कृति के रूप में इसकी विकास यात्रा पर ही मैंने 2009 में एमफिल किया है। मुझे हबीब तनवीर जैसी विश्वप्रसिद्ध हस्ती के साथ काम करने का मौक़ा मिला। रतन थियम, देवेंद्रराज अंकुर जैसे मंजे हुए कला विशेषज्ञों के साथ काम करने का अवसर भी मुझे मिला। मृत्युंजय अब तक एक दर्जन से अधिक नाटकों का निर्देशन कर चुके हैं।

पटना से संजय कुमार की रपट

 
         
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