नववर्ष का गीत

प्रकाशन :02-01-2012
कुमार रवींद्र
हाँ, चमत्कारी
सुबह यह
वर्ष की पहली किरण का मंत्र लाई

रात पिछवाड़े ढली
... आगे खड़े सोनल उजाले
साँस भी तो दे रही है
नये सपनों के हवाले

धूप ने भी लो
सुनहले कामवाली
मखमली जाजम बिछाई

वक्त ने ली एक करवट और
मौसम हुआ कोंपल
उधर दिन संतूर की धुन
इधर वंशी झील का जल

और चिड़ियों की
चहक ने
चीड़वन की छाँव में नौबत बिठाई

काश ! यह सपना हमारा
हो सभी का -
दिन धुले हों
आँख जलसाघर बने
हर ओर दरवाजे खुले हों

आरती की धुन
नमाज़ी की पुकारें
साथ दोनों दें सुनाई


  कुमार रवींद्र
क्षितिज310 अर्बन एस्टेट -2 हिसार -125005, 094161-93264
kumarravindra310@gmail.com
 
         
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