जिला बदर के नये मौके

प्रकाशन :22-10-2011
विनोद साव

मैंने बलौदा बाजार के साहूजी को मोबाइल लगाया। उनकी पत्नी ने उठाया ’साहू जी तो सो रहे है।’ मैंने कहा ’आप लोगों को हार्दिक बधाई .. आपका बलौदा बाजार जिला बन गया है।’

’चीला बन गया है! बलौदा बाजार का चीला कैसे बन गया!’ ये सरकार भी ना... कुछ भी करती रहती है।’ उधर से आवाज आई।

मैने कहा ’अरे बहन जी चीला नहीं जिला बन गया है। हॉ.. इस खुशी में आप लोग चीला बनाकर खा सकते हैं। चीला खाइए और बधाई देने वालों को खिलाइए। अपने मुख्यमंत्री जी कहते हैं ’मुझे फास्टफुड पसंद नहीं है मैं तो चीला खाता हूँ।’ अगर सरकार चाहे तो तीजा-पोरा को छत्तीसगढ़ का मुख्य त्योहार घोषित कर महिलाओं को तीन दिन की छुट्टियॉ दिलवाए और इस खुषी में राज्य भर में बोबरा चीला बंटवाए तब जाकर जिला बनाना सार्थक होगा।

’बने तो कहात हौ। राह.. साहूजी ला उठावथौं।’ सहुवाइन छत्तीसगढ़ी बोलते हुए पुलक उठी। अब की बार मोबाइल पर साहू जी थे -’जय जोहार गा.. साहेब।’ मैंने कहा ’जय जोहार ..साहूजी। अरे आपका “ शहर जिला बन गया और आप सोए हुए हैं। इस तरह से लोग जिला बनने के बाद भी सोते रहेंगे तो इन नये जिलों का क्या होगा? जनता को जागना चाहिए। सोना प्रषासन का काम है।’

’अरे! कल रात में सोया तब तो तहसील था और सबेरे उठा तो जिला बन गया! ऐसा कैसे हो गया?’ वे अचंभित हुए। मैंने कहा ’ये सरकार का जादू है जिसे जादू की सरकार ने पूरा किया। रात में रमता जोगी को छोड़कर सोओ तो सबेरे राजा रमन मिलते हैं।’

’अब क्या बलौदा बाजार को रेलगाड़ी मिल जावेगी।’ मैं साहू जी की इस मांग से घबरा उठा ’रेलगाड़ी! रेलगाड़ी देना रइपुरहीन सरकार के हाथ में नहीं है साहूजी ये दिल्ली वालों का काम है।’

’तो कब तक हम लोग भांठापारा में रेलगाड़ी चढ़ते रहेंगे और कब हमारे कानों में रेलगाड़ी आने की घण्टी सुनाई देगी? उधर भांठापारा वाले जिला बनाने की भी मांग कर रहे हैं जबकि उनके पास रेलगाड़ी तो है ही। एक चीज उनके पास है तो एक चीज हमारे पास रहने दो। रेल पकड़ने के लिए सीढ़ी हम भांठापारा में चढ़ते हैं तब जिला कचहरी की सीढ़ी भांठापारा वाले हमारे बलौदा में चढ़ें। तभी हिसाब किताब बराबर होगा। अच्छा आप ये बताव कि जिला बने के बाद हमला अउ काय काय  मिलही?’

’आपको जिला कचहरी, जिला अस्पताल, जिला षिक्षा, जिला प्रषासन और जिला पुलिस मिल जावेगी। अब आप रायपुर के चक्कर लगाने से बच जावेंगे।’ मैंने मिलने वाले दफ्तरों और महकमों की लम्बी सूची उन्हें सुनाई।

’और कोई मंत्री मिलेगा। आज तक हमारे बलौदा बाजार में कोई मंत्री नहीं बना है। खाली संतरी से ही काम चला रहे हैं। इतना पुराना हमारा ये तहसील मुख्यालय है पर यहाँ से आज तक कोई विधायक मंत्री नहीं बना है। एक महिला यहाँ पूर्व प्रधानमंत्री की भतीजी निकल गई थी उसे भी सांसद बनाकर दिल्ली भेजा गया पर वह भी मंत्री नहीं बन सकी बल्कि उनके दिल्ली पहुंचते ही उनके चचा प्रधानमंत्री से भी हाथ धो बैठे। हमारे इलाके को सीमेन्ट गारा के सिवा मिला क्या है? बलौदा में बाजार है और सिविल लाइन। बजार में नून तेल खरीद लेते हैं और सुबह सिविल लाइन में फोकट की ठण्डी हवा खा लेते हैं.. बस्स।

’मंत्री नही मिले तो क्या हुआ साहूजी अब तो आपके “शहर को कलेक्टर साहब मिल जावेंगे। एक कलेक्टर कई कई नेताओं पर भारी पड़ता है।’ मैंने उनको अमरकांत की कथा सुनाई जिसमें एक आदमी की तपस्या पर भगवान प्रगट होते हैं और कहते हैं ’हम तुम्हारी तपस्या से प्रसन्न हुए भक्त.. अब तुम वर मांगो।’  तपस्वी कहता है ’भगवान! मुझे कलेक्टर बना दो।’ तब भगवान कहते हैं ’अरे  कलेक्टर क्या चीज है तुम और कुछ अच्छा मांगो।’ तब तपस्वी कहता है ’भगवान आप नहीं जानते कि कलेक्टर कितना बड़ा होता है! आप कभी कलेक्टर बने होते तो जानते।’

’तब हमारे चण्डाल भांठा के दिन बहुरेंगे?’ साहूजी ने फिर कुछ उटपुटांग सवाल दागा। मैंने कहा ’ये चण्डाल भांठा क्या भांठापारा का भाई है।’ वे बोले ’आपने ठीक कहा ये पूरा इलाका चटर्री भांठा से भरा हुआ है, इसीलिए भांठापारा बना है। इस पूरे इलाके में किसी भी सड़क पर जाओ दूर दूर तक भांठा ही भांठा दीखता है, गॉव बस्ती कम दिखती है। निर्जन प्रदेष की तरह लगता है। भांठा का सन्नाटा यहॉ लोगों के चेहरों पर दिखलाई पड़ता है। ज्यादा मोटर गाड़ी इसीलिए नहीं चलती कि भांठा में कौन सवार चढ़ेगा। इसकी एक नहर योजना साठ साल पुरानी है लेकिन आज तक नहरें नहीं खुदीं। न नहर न कोई बॉध। पानी और हरियाली का संकट है। अब आप कह रहे हो यहॉ जिला पुलिस मिल जावेगी तब गड़बड़ घोटाला करने वाले कुछ लोगों को यहॉ से जिला बदर होने का मौका मिलेगा बस्स।’

मैंने कहा ’साहूजी .. अरे भई जिला बनने की कुछ तो खुशी मनाइये।’ उन्होंने सहुवाइन को आवाज लगाई ’कहाँ हस वो बाई...चल तो दू रुपया किलो वाले चाऊंर के चीला बना।’  अब वे दोनों  चॉवल का चीला और मिरचा पताल की चटनी खाते हुए नये जिला बनने की खुषी मना रहे थे।


  विनोद साव
मुक्तनगर, दुर्ग
छत्तीसगढ़ 491001
मो. 9407984014
 
         
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