Month: July 2018

‘सेक्रेड गेम्स’ पर शांति का षडयंत्र

इन दिनों भारतीय वेब-टेलीविजन सीरीज ‘सेक्रेड गेम्स’की चारों ओर चर्चा हो रही है, देश-विदेश के अखबारों में इस क्राइम थ्रिलर पर लेख लिखे जा रहे हैं, इसकी समीक्षा हो रही है। सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर बहुत चर्चा हो रही है। इस…Read More »

पूरे देश में चुनाव एक साथ होने से सरकारों पर चुनावी दबाव घटने से फायदा होगा

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ महीनों से रोज सड़कों पर होने वाले प्रदर्शन बढ़ गए हैं। राजनीतिक दलों के नेताओं को मालूम है कि कुछ महीने बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं, तो बहुत से नेताओं की नजरों में कोई न कोई सीट…Read More »

रोहित ठाकुर की कविताएँ

 नदी  एक पुरुष का अँधेरापन  कम करती है औरत औरत के अँधेरेपन को  कम करता है पेड़ पेड़ के अँधेरेपन को  कम करती है आकाशगंगा तारों का जो अँधेरापन है उसे सोख लेती है नदी नदी के अँधेरे को मछली अपने आँख…Read More »

संस्मरण : लिखना तो बहाना है

कई बार मैंने अपने पिताजी से आग्रह किया कि पिताजी दादाजी के बारे में कुछ बताएं? सुना है दादाजी धनी-मनी, निर्भीक, बहादुर, उदारमना व्यक्ति थे। जरूरतमन्दों की धन आदि से बड़ी मदद करते थे, घोड़ी पर चलते थे, पढे-लिखे भी थे? परन्तु,…Read More »

इस्लाम और आतंकवाद

इस दौर में *मज़हब ए इस्लाम* को आतंकवाद से इस तरह जोड़ दिया गया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी गैर मुस्लिम के सामने इस्लाम का शब्द ही बोलता है तो उसके मन में तुरंत आतंकवाद का ख्याल घुमने लगता है जैसे…Read More »

सुशांत सुप्रिय की कविताएँ

 रिक्शावाले का गीत  यह रिक्शा नहीं , देह मेरी का है विस्तार  यह चढ़ी सवारी , प्राण–वायु पर पड़ता भार  यह कुछ रुपयों के बदले पड़ी देह पर मार  आदमी पर आदमी चढ़ा , जनतंत्र का कैसा प्रकार                             काम वाली बाई का गीत                        झाड़ू–पोंछा करके अपना घर–बार चलाती हूँ                        यह भीख नहीं , मेहनत करके संसार चलाती हूँ   …Read More »