मध्यप्रदेश में आत्महत्या करने वाले, संत कहे जाने वाले, भय्यूजी महाराज के टेलीफोन से तीन नंबरों पर सौ-सौ बार बात होने की खबर आई है। पुलिस की जांच इन दिनों कुछ आसान हो गई है क्योंकि इंसानों ने बिना फोन, बिना सोशल मीडिया, बिना इंटरनेट, या बिना मैसेंजर जीना ही बंद कर दिया है। और पुलिस कमरे के भीतर बैठे-बैठे इन तमाम चीजों को पुख्ता सुबूत आसानी से जुटा लेती है। लोगों के सिमकार्ड या मोबाइल फोन से यह भी पता लग जाता है कि वे किस वक्त कहां पर थे। इसके अलावा लोगों की बातचीत या संदेश भी पुलिस हासिल कर लेती है। इससे परे शहरों में कैमरे बढ़ते चल रहे हैं, और भय्यूजी महाराज के बारे में ही यह जानकारी और तस्वीरें सामने आई कि वे कितनी देर किस रेस्त्रां में किसी महिला के साथ बैठे, और शायद उनके बीच कुछ विवाद भी हुआ।
इस चर्चा का मकसद इस एक मौत के बारे में बात करना नहीं है, बल्कि जिंदा लोगों को चौकन्ना करना है कि आज वे फोन, कम्प्यूटर, या सोशल मीडिया पर जो कुछ करते हैं, वे सब बाकी जिंदगी के लिए एक पुख्ता सुबूत बन जाते हैं। इसलिए लोगों को अपना चाल-चलन ठीक रखना चाहिए, महज चौकन्ना रहना काफी नहीं है। लोग अपने फोन या कम्प्यूटर पर कुछ मिटा सकते हैं, लेकिन दुनिया के कम्प्यूटरों पर वह बात कहीं न कहीं दर्ज रह जाती है। मतलब यह कि लोग अगर अनायास आत्महत्या करने, या उन्हें कोई मार डाले, या वे किसी हादसे के शिकार हो जाएं, और उसमें किसी जांच की नौबत आए, तो तमाम निजी या गोपनीय बातें सामने आ जाती हैं। और फिर हो सकता है कि इससे लोगों की साख चौपट हो, परिवार का सुख-चैन खत्म हो जाए, या आसपास के लोगों का भरोसा टूट जाए। बिना जिंदगी गए भी अगर लोगों को फोन गुम जाएं, या लैपटॉप चोरी हो जाएं, तो भी लोग एकदम से नंगे हो सकते हैं। इन दिनों लोग कभी सिम बदलवाने, तो कभी फोन बदलवाने, या कुछ सुधरवाने के लिए बाजार जाते हैं, और वहां फोन को मैकेनिक या दुकानदार के पास छोडऩा होता है। ऐसे में उसकी जानकारी आसानी से निकाली जा सकती है, और जो लोग इंटरनेट पर पोर्नो ढूंढते हैं, उन्हें असल जिंदगी की वीडियो क्लिपिंग आसानी से देखने मिल जाती हैं। ये तमाम ऐसी रिकॉर्डिंग रहती हैं जो कि लोग आमतौर पर खुद ही बनाते हैं, और किसी चूक या गलती से उनके फोन या कम्प्यूटर से कोई और इन्हें निकाल लेते हैं।
डिजिटल जिंदगी एक किस्म से शीशे के मर्तबान में जीती और तैरती हुई मछली की जिंदगी सरीखी होती है। इसमें चाल-चलन ठीक रखने के अलावा और कोई चारा नहीं है। लोगों को ऐसा इसलिए भी करना चाहिए कि वे अगर दुनिया और जिंदगी से आजाद भी हो जाते हैं, तो भी उन्हें अपने परिवार और मित्रों की साख, उनके सुख-चैन का ख्याल रखते हुए अपने तौर-तरीके ठीक रखने चाहिए। जाने वाला तो चले गया, लेकिन घरवालों के लिए बदनामी दे गया, ऐसी स्मृतियां ठीक नहीं हैं।

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