जिंदगी में कई ऐसे मौके आते हैं जब हालात नाजुक रहते हैं, और फैसले लेने वाले लोगों से समझदारी की उम्मीद की जाती है। ऐसा माना जाता है कि जिम्मेदार लोग हालात देखते हुए गैरजरूरी हरकतों से बचेंगे, और मौके को अच्छी तरह निपट जाने देंगे। लेकिन असल जिंदगी में लोगों की समझदारी जाने कहां चली जाती है, और लोग बिना किसी उकसावे या भड़कावे के ऐसा कर बैठते हैं, या ऐसा करते हैं जिससे हासिल तो कुछ नहीं होता, लेकिन संभावनाओं की बर्बादी बहुत होती है।

कुछ ऐसा ही आज अमरीका और उत्तर कोरिया के बीच चल रहा है। अभी दो-तीन दिन पहले ही हमने इसी जगह लिखा था कि किस तरह उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों का खतरा खत्म करने के जो आसार बन रहे हैं, उन्हें देखते हुए दुनिया के मीडिया में ऐसी भी चर्चा हो रही है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इसके लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिल सकता है। और इस चर्चा को शुरू हुए चार दिन भी नहीं हुए हैं कि अब ऐसा खतरा मंडरा रहा है कि उत्तर कोरिया का सनकी तानाशाह शायद अमरीका के साथ तय हुई बातचीत से ही पीछे हट जाए। उसने दक्षिण कोरिया के साथ अपनी दशकों की दुश्मनी को खत्म करते हुए अभी पिछले पखवाड़े ही वहां जाकर पड़ोसी से जंग का खतरा खत्म किया था, और आज ऐसी नौबत है कि वह अपने ही भाई-देश से बातचीत तोड़ रहा है। इसके पीछे एक निहायत ही गैरजरूरी वजह खड़ी की गई है। अमरीका और दक्षिण कोरिया मिलकर एक फौजी कसरत करने जा रहे हैं जो कि उत्तर कोरिया को उकसा रही है, और इससे बौखलाकर उत्तर कोरिया और अमरीका के बीच कुछ समय बाद होने वाली बातचीत भी खतरे में पड़ते दिख रही है।
आज जब दुनिया के ऊपर सबसे बड़ा खतरा करार दिए जा रहे उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों के खत्म होने की एक संभावना बन रही थी, तब उसके बीच ही अमरीका ने दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर एक निहायत ही फिजूल की, और निहायत ही नाजायज फौजी कवायद शुरू की है, जो कि दुनिया के इतिहास में एक चूक की तरह दर्ज होगी। और जब ट्रंप जैसे बददिमाग और बेदिमाग नेता कोई काम करते हैं, तो उसमें वह काम चूक होने की गुंजाइश कम होती है, बददिमागी की गुंजाइश अधिक होती है। आज जब तीसरे विश्वयुद्ध के खतरे का सामान बनने वाला उत्तर कोरिया किसी बातचीत के लिए तैयार हुआ था, तो वैसे वक्त पर फौजी कसरत का यह नाटक परले दर्जे की बेवकूफी और बददिमागी दोनों की मिलीजुली शक्ल है।
जब किसी के घर बारात लगने को हो, तो लड़की का पिता पड़ोसी से पुराने झगड़े की किसी वजह को फिर खड़ा नहीं करता। लोग ऐसे नाजुक मौके को ठीक से पार हो जाने देना चाहते हैं। लेकिन ट्रंप की बुद्धि कम है, और अहंकार अधिक है। ट्रंप ने जिंदगी में जनता के बीच अपने कारोबार के सिवाय और कोई काम नहीं किया है। इसलिए तजुर्बे की कमी, और बददिमागी मिलकर टं्रप की कमअक्ल के साथ भागीदारी में एक ऐसा खतरनाक धंधा खड़ा कर चुकी हैं कि जिससे तीसरा विश्वयुद्ध भी छिड़ सकता है। पता नहीं इस अमरीकी राष्ट्रपति को अक्ल देने का काम उन बड़े देशों में से किसी के मुखिया भी नहीं कर रहे हैं जो कि सीरिया पर हमला करने के लिए ट्रंप के अमरीकी गिरोह में शामिल होकर बमबारी कर रहे हैं।

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