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हिंदी के लिए
बाज़ारवाद अवसर है - संस्कृति मंत्री
(8 रचनाकारों को
राष्ट्रभाषा अलंकरण)
रायपुर।
छत्तीसगढ़ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति द्वारा आयोजित हिन्दी
उत्सव में मुख्य अतिथि संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री बजमोहन
अग्रवाल ने कहा कि हिन्दी के लिए प्रत्येक क्षेत्र में
पर्याप्त अवसर उपलब्ध हो रहे हैं, ज़रूरत है इसका लाभ उठायें।
समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक श्री ललित सुरजन
ने की। इस अवसर पर 9 हिन्दी सेवियों को राष्ट्रभाषा अलंकरण
प्रदान किकए गए और अनेक पुस्तकों का लोकार्फण भी हुआ।
छत्तीसगढ़
राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ने हिन्दी दिवस की परंपरा में
परिवर्तन करते हुए इस वर्ष हिन्दी उत्सव का आयोजन किया। समारोह
में विचार व्यक्त करते हुए संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने
कहा कि आने वाली पीढ़ी हिन्दी को भूल जाएगी इसे रोकने के लिए
पर्याप्त प्रयास की आवश्यकता है। हमें हिन्दी पर गर्व करना
चाहिए। हिन्दी के लिए चुनौती नहीं है, बल्कि बाज़ारवाद के कारण
पर्याप्त अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। हमें राष्ट्रभाषा का सम्मान
दिलाने के लिए सरकार पर आश्रित नहीं रहना चाहिए। अध्यक्ष और
दैनिक देशबंधु के संपादक ललित सुरजन ने कहा कि हिन्दी की गंगा
को बचाने के लिए हमें छोटी-छोटी नदियों के समतुल्य क्षेत्रीय
भाषाओं का भी संवर्धन करना होगा। हिन्दी के समक्ष अनेक
चुनौतियाँ हैं लेकिन लेखन इसका सामना करने में सक्षम हैं।
हिन्दी के लिए लिखा बहुत जा रहा है, पढ़ा कम जा रहा है। पाठक
वर्ग तैयार करने पर ही भाषा का उन्नयन होगा। नागपुर से पधारे
शिक्षाविद और भाषावैज्ञानिक डॉ. रामप्रकाश सक्सेना ने हिन्दी
की तकनीकी विशेषताओं पर प्रकाश डाला। जबलपुर के हिन्दी
विभागाध्यक्ष व साहित्य अकादमी, दिल्ली के सदस्य डॉ.
त्रिभुवननाथ शुक्ल ने कहा कि हिन्दी के साथ-साथ संस्कत का
अध्ययन-संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। भोपाल के वरिष्ठ हिन्दी सेवी
डॉ. राजेन्द्र जोशी ने कहा कि हिन्दी वैश्विक हो चुकी है और
इसके वैश्विक महत्व को हिन्दुस्तान को भी समझना चाहिए । गीतकार
डॉ. चित्तरंजन कर ने भी संस्कृत के बिना भारतीय भाषाओं के
वर्चस्व को बनावटी बताया।
मुख्य अतिथि श्री अग्रवाल ने वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रभाकर चौबे
को राष्ट्रभाषा शिखर सम्मान प्रदान किया जिसे लेखन राजेन्द्र
चांडक ने ग्रहण किया। चन्द्रशेखर साहू, सुश्री अम्बा, डॉ. अशोक
सप्रे, दीपक पाचपोर, अता रायपुरी डॉ. महेशचन्द्र शर्मा, उमेश
जेठी और पुरुषोत्तम छत्तीसगढ़िया को राष्ट्रभाषा अलंकरण प्रदान
किए गए । इस अवसर पर अतिथियों ने डॉ. साधना त्यागी की पुस्तक
धर्मवीर भारती समग्र(आलोचना), डॉ. शोभाकान्त झा की जो कछु करूँ
सो पूजा(ललित निबंध), संपादित ग्रंथ कोरबा के कवि, डॉ. इंदिरा
तिवारी की रोचक प्राचीन कहानियाँ, कमलेश्वर बघेल की मेरी आवाज
सुनो(कविता), मोतीलाल श्रीवास्तव की पर्यावरण एवं गौ संवर्धन,
शंकर मुनिराय की पाश्चात्य दर्शन आदि पुस्तकों का लोकार्पण भी
किया। सम्मान ग्रहण करने वालों की ओर से दीपक पाचपोर ने कहा कि
यह उत्सव हिन्दी के लिए ऐतिहासिक है।
समारोह में श्री स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी, संस्कति विभाग के
संचालक राकेश चतुर्वेदी और वरिष्ठ पत्रकार श्री बसंत कुमार
तिवारी विशिष्ट अतिथि थे। कार्यक्रम में प्रारंभ में समिति के
अध्यक्ष गिरीश पंकज ने स्वागत भाषण व सम्मानित हिन्दी सेवियों
का परिचय दिया। कार्यक्रम का संचालन समिति के मंत्री संचालक
डॉ. सुधीर शर्मा ने किया और आभार प्रदर्शन किया कार्यवाहक
अध्यक्ष डॉ जे. आर. सोनी ने किया । राम पटवा, जयप्रकाश मानस,
आसिफ़ इकबाल, जयप्रकाश शर्मा, आदेश ठाकुर, डॉ. राजेन्द्र सोनी,
माणिक विश्वकर्मा, शकुंतला तरार, कुमेश जैन, एच.एस. ठाकुर,
चेतन भारती, आदि ने अतिथियों का स्वागत किया । समारोह में
विभिन्न स्थानों से आए लगभग दो सौ से अधिक हिन्दी सेवी लेखक
मौजूद थे ।
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