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तीन व्यंग्य
आर.के.भंवर
धब्बा
'कहीं
जाने के लिए तैयार होते समय जब हम शीशे में चेहरे पर काला
धब्बा देखते है तो शीशा साफ़ नहीं करते हैं,
बल्कि चेहरे से धब्बा हटाते हैं।'
प्रबंधन के नये प्रकटे गुरू का यह प्रवचन होनहार मैनेजरों के
वास्ते एक पंचतारा होटल के अप्सराई सुख में चल रहा था।
उधर
संपूर्ण चेहरे पर धब्बों का एकक्षत्र साम्राज्य शोभायमान करने
वाले मंचों के अलंकरण,
उद्धाटन और शिलान्यास करने में सिध्दहस्त वंचित पार्टी के
अध्यक्ष वंचित नारायण सिध्दोपाय का इन्हीं होनहारों की
कार्यशाला में कहना था कि दरअसल अब ऐसे आईनों के उत्पाद पर
पूरी तरह से पाबंदी लगा देनी चाहिए। आईनों को वही दिखाना चाहिए
जैसा समय,
माहौल और चुनौतियाँ
बोले। यदि चेहरे पर धब्बे है और उन्हें आईना दिखा रहा है तो यह
अप्रिय सत्य है और आप तो जानते ही है कि शास्त्रों में यह पहले
से ही कहा गया है कि सत्यं ब्रूयात,
प्रियं ब्रूयात,
अप्रिय सत्यं न ब्रूयात .... । चेहरे पर
धब्बे अप्रिय सत्य है।
एक मैनेजर : सर,
क्या इस तरह के आईनों का उत्पाद किया जायेगा ..
हाँ
....
हाँ
क्यों नही,
अब मुझे ही इसकी
ज़रूरत
है।
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तू-तू : मै-मै
यह आलेख कुल साढ़े दस शब्दों का है। वैसे ही लोगों के पास समय
की कमी है,
ऊपर से पन्नों में गुदे हुए लेख,
आलेख पढ़ने के लिए किसके पास
व़क्त
?
तथापि जिनके पास कम समय है,
वे लोग इसे पढ़ने का साहस कर सकते हैं।
प्रेम
ढाई शब्द
(तू,
तू-ही-तू,
तू)
परिणय
चार शब्द
(मै,
मै-ही-मै,
मै)
परिणाम
चार शब्द
(
तू-तू : मै-मै )
कुल
शब्द साढे दस
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पापी पेट
कई
दिनों से पेट में भूख सुलग रही थी। भिखारी था,
सो कई दिनों पेट में डालने के लिए नही मिला था । बड़ी देर से एक
होटल के सामने वह कुछ पाने की मुराद में बैठा था। सामने मुर्गे
की टाँग
को चूस रहे और शराब के पैग के साथ एक आदमी सामने बैठे इस
मनुष्य से बिल्कुल बेख़बर
था।
भिखारी से रहा न गया,
चिल्लाया - हे भगवान यदि पेट की भूख तू मिटा नहीं
सकता तो ये पापी पेट किस वास्ते दिया है
?
शराबी की तन्द्रा टूटी - सुन स्साले,
उसने पेट बेल्ट बाँधने
के वास्ते दिया है। बोल,
बेल्ट है न तेरे पास
?
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आर. के. भंवर
सूर्य सदन,
सी-501/सी,
इंदिरा नगर,
लखनऊ,
उत्तरप्रदेश
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