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असर
बड़े साहब को गरमी सताने लगी
छोटे साहबों से कैसे रहा जाता
उन्होंने फाईल आगे बढ़ाई,
स्वीकृति ली
अब बड़े साहब के कमरे की खिड़की में
दो टन का एयरकंडीशन
अब बड़े आराम से चलने लगा
कमरे की ठंडक
और साहब की टेबल से फाईलें
साथ-साथ तेजी से सरकने लगी
बड़े साहब को भी गरमियों में
कश्मीर का आनंद आने लगा
उधऱ खिड़की के बाहर बैठा
साहब का चपरासी
आग लगाती गरमी और
एयरकंडीशन की गरम हवा से झुलसता रहता
क्या मजाल
किसी से कुछ कह पाता वह
ऐसे ही बीत गए गरमियों के दो साल
हर गरमियों में ठंडी हवा खाते बड़े साहब
तीसरे साल चल बसे
चपरासी आज भी जिन्दा है
उस पर किसी हवा का
कोई असर नहीं पड़ा
तेजपाल सिंह हंसपाल
चौथी गली,
फाफाडीह नाका,
रायपुर
(छत्तीसगढ़)
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