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सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-24, मई, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। हलचल ।।

 

 

विजयराज चौहान की किताब का विमोचन

 

देहरादून। विजयराज चौहान की पहली पुस्तक भारत/india (उपन्यास) का विमोचन उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री नित्यानद स्वामी द्वारा 21 मार्च 2008 को किया गया । यह किताब  देश के दो चहरे प्रकट करती है ।

 

विजय की देशभक्ति से भरी पुस्तक आज के नई पीढ़ी के लिए एक मिसाल है | अपनी इस पुस्तक के द्वारा लेखक ने वैस तो बहुत से विषयों पर प्रकाश डाला है, लेकिन प्रमुख रूप से उन्होंने लिखा हे कि "भारत को विश्वसुन्दरियों की नहीं विश्वमाताओ की आवश्यता हे | इसके अलावा उन्होंने लिखा है की हिन्दी के बिना भारत का हर नागरिक और भारत देश अधूरा है | लेखक ने एड्स नामक बीमारी का वर्णन भी अच्छी प्रकार से किया है |

 

भारत/india (उपन्यास) भारत देश के दो चहरे प्रकट करती हे | जहाँ पर लेखक भारत समुदाय को एक गरीब और अछूत के प्रकट करता है तो इंडिया समुदाय को एक पूर्ण रूप से पाश्च्त्य संस्कृति भी लिप्त समुदाय के रूप मी प्रकट करता है | यह किताब उप्पल प्रकाशन नई दिल्ली से प्रकाशित हुई है । इसकी सामग्री कुल 262 पृष्ठों में समाहित है ।

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संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

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