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सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-22, मार्च, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

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।। कविता ।।

 

 युएसए का प्रवासी साहित्य

प्रार्थनाःबच्चों के लिए


रीतू नेगी

 

कितना प्यारा होता हैं बचपन

कितना मासूम होता हैं लड़कपन  

सच होता हैं मन जैसे दर्पण

सबसे अलग भी उनका हठपन

                  

अधूरा हैं जीवन इनके बिना

उनके लिए जिए वही हैं जीना

सब कुछ भी जो गया अपना छीना

बच्चे हैं जो साथ तो पास  हैं नगीना   

                                                

बस एक ही प्रार्थना हैं भगवान  से

अपना रास्ता चुने वो सच्चाई से

भटके न कदम दुनिया की चकाचौंध से    

बचाके रखे उन्हें हर आनेवाली मुश्किल से  

                                                       Ritu Negi

2901, Harvard Court
North Wales, Pa 19454

USA


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संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

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