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सृजनगाथा

 

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वर्ष-2, अंक-22, मार्च, 2008

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।। कविता ।।

 

 युएसए का प्रवासी साहित्य

नौकरी की टोकरी


पूर्णिमा पंडा

 

करी करी नौकरी नौ नौकरी करी,

मरी मरी मैं मरी, जब भी नौकरी करी,

 

दे दे के झूठे वादे हरज़ाई मुख मोड गई,

कभी मैंने छोडा उसे, वो ही कभी छोड गई,

 

ऊँची-ऊँची डिग्रियों का क्या मैं अब अचार करूँ,

क्या बनेगा फ्यूचर मेरा, अब इस पे मैं विचार करूँ,

 

आई जो मैं पढ लिख के, BTech MBA  कर के,

पहुँची अमरीका कितने नयन में सपने धर के,

 

मेरा वो पहला Interview, चक्रव्यूह की चोटी,

बिना work permit के मै उल्टे पाँव ही लौटी,

 

मेरा अपराध घोर था, status मेरा H4 था,

 

एक साल वनवास मैंने जैसे-तैसे काटा,

आया जो Green card ,मैं झूमी अब कुछ होगा,

 

मैंने किए सारे तप,

तब मिला एक start up¸

 

मैंने कहा पैसे कम है, उसने कहा बस यही गम है,

अगर तुममें दम है, काम किए जाओ, हम हैं,

 

चलो इरादा नेक था,

अपना वो पहला ब्रेक था,

 

मैने की थी पूरी कोशिश, दिन रात एक कर डारी,

अब किस्मत को मैं क्या रोऊँ जो पाँव हो गया भारी,

 

बस फिर क्या था

फिर टूटी करीयर की डोरी, बस गूँजी बच्चों की लोरी,

 

दिन साल महीने गुज़र गए, अब कोइ करो उपाय,

बच्चों के पालन के संग कोई नौकरी की जा ,

 

सब R&D कर कर के ये बात समझ है आ,

टीचर बनने में ही अब तो हुशियारी है भा,

 

बच्चों के ही संग जाना है, उनके ही संग आना,

दो पैसे तो घर आएँगे हमने ख़ुद को ताना,

 

पर टीचर बनने को जो हुआ हमारा हाल,

बज गए बाजा credentials में लग गए पूरे दो साल,

 

फिर मिली नौकरी पक्की, और चली समय की चक्की,

 

जो हुए बडे कुछ बच्चे हाय,

software फिर हमें बुलाय,

 

बस एक नौकरी के ख़ातिर सब लगा दिया है दम,

लो outsource का दानव फिर ले आया है मातम,

 

तंग आ गई अमरीका में A B C D बन कर,

मैं ही आया, मैं ही बैरा, मैं ही कुक और ड्राइवर,

 

उन बहनों के लिए ये संदेश मेरे पास है,

जिनके दिलों में भी परदेस की ही आस है,

 

जब आना इस ओर तो माँ या सासु को ले आना,

हो पाए तो बहना देखो H4 पर मत आना,

 

रखना तुम कंट्रोल अपने फैमिली के प्लानिंग पर,

वर्ना पड़ेगा रोना तुमको फूट-फूट सिर धर कर,

 

कविता नहीं है ये मेरे दिल की भडास है,

पर इन आँसूओं में भी कहीं छुपी एक आस है,

 

मैं हूँ नारी हिंद की और व़क्त मेरा भी आएगा,

निकल पडी सर चढ़ के तो विश्व दंग रह जाएगा,

 

तुम गाँठ बाँध लो सारा जग मेरी वाणी दोहराएगा,

जिस किलकारी ने रोका था, अब वही हौसला बढाएगा

 

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