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युएसए
का प्रवासी साहित्य
दो हास्य
कविताएँ
हरीबाबू बिंदल
पलक झपकना
एक साथ ही झपकती,
दोनों पलकें क्यों
मिल शर्मीली ने किया, एक
प्रश्न कुछ यों
एक प्रश्न कुछ यों, कोई
कारण बतलाइये ।
हमने बतलाया कि, ख़ुद ही समझ जाइये ।
एक पलक
यदि एक बार में झपकेगी,
तो
दुनिया उसको, ना जाने क्या समझेगी ।
वेट लोस
टी वी
पर दिखला रहे, वेट लौस के ऐड,
उन्हें
देख हो जाता है, अपना मन कुछ सैड ।
अपना मन
कुछ सैड, देह पतली दिखलाते,
कंचन सी
काया,
'डॉलर
पर पौंड' घटाते ।
हड्डी
पसली दीखें, क्या वह सुंदरता है
?
हमको तो
'पहले'
वाला, अच्छा लगता है ।
Hari Bindal
Bowie, MD, USA
301-262-0254
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