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युएसए
का प्रवासी साहित्य
जीवन फूलों
की डाली
नीलू गुप्ता
जीवन है सरस मधुर फूलों की इक डाली
फूल
खिलें है तो खिलती है जीवन की डाली ।
मुरझाते हैं फूल तो मुरझाती है ये जीवन की डाली
मुस्कायें तो मुस्काती है ये
फूल भरी ये डाली
क्यों न
काम करें हम ऐसे खिली रहे सदा ये डाली
हम ही तो हैं बस अपनी इस बगिया के सच्चे माली
ममता समता प्यार औ अपनेपन से आली
यदि सींचेंगे हम अपने जीवन की यह डाली
फूल झरेंगे प्यार भरे, मुस्कायेगी ये प्यार भरी डाली
राग द्वेष औ लोभ मोह से, यदि सीचेंगे हम ये डाली
घृणा और कलह के बीज उगेंगे इस डाली
कभी न हँस पायेगी जीवन की यह डाली
आओ प्रण करलें, मिलकर कुछ ऐसा करलें
परोपकार में रत हो, जीवन को खुशियों से भर लें
मुस्कायेगी, कभी न मुरझायेगी ये फूलों की डाली
भीनी-भीनी सुवास से मन को हर लेगी हर डाली
दूभर पल को भी सरस सुलभ और सुंदर कर देगी ये डाली
नवोल्लास नवजीवन भर देगी जीवन में फूल भरी डाली
Nilu Gupta
33766 Whimbrel Rd
Fremont, CA
94555
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