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सृजनगाथा

 

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वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-22, मार्च, 2008

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।। कथोपकथन ।।

 

 युएसए का प्रवासी साहित्य

 

 

भारतीय लोगों को जोड़ना चाहता हूँ - जयपाल रेड्डी

 

रेडियो सलाम नमस्ते यानी भारतीय वाणी । वह अमेरिका में हिंदी सहित भारतीय भाषिक-संस्कृति की ईमानदार प्रतिनिधि है । इन अर्थों में उसे भारतीय अस्मिता का सच्चा प्रवक्ता भी कहा जाना चाहिए । उसने अपनी ज़मीन, अपने आकाश से हज़ारों किमी दूर जा बसे भारतीय प्रवासियों को न केवल अपनी भाषा-बानी सुनने का सुनहरा और निरंतर अवसर उपलब्ध कराया है बल्कि गुनने का मौक़ा भी जुटाया है । आज रेडियो सलाम नमस्ते की पहुँच डैलास और अमेरिका से बाहर भी कई देशों तक सिद्ध हो चुकी है । खासकर कविताजंलि ने तकनीकी सुविधाओं का लाभ उठाते हुए अमेरिका से दूर हिंदी के समकालीन और छंद-प्रिय हस्ताक्षरों को जिस शैली में वैश्विक बनाया है, छंद के प्रति कविताप्रेमियों में नया विश्वास जगाया है, वह एक अच्छी शुरुआत कही जा सकती है । इस सबके पीछे है - नित पनप रहे उत्तर आधुनिक विचारों के कंटीले जंगलों के विरूद्ध दमदारी से खड़े, भारतीय संस्कृति के शुभचिंतक व उद्यमी श्री जयपाल रेड्डी जी की सुविचारित योजना और अभियान; जो रेडियो सलाम नमस्ते के प्रमुख भी हैं। सृजनगाथा के विशेष आग्रह पर संस्कृतिकर्मी श्री आदित्य प्रकाश सिंह ने उनसे बातचीत की । भले ही यह छोटी-सी वार्तालाप है पर रेडियो सलाम नमस्ते के स्वप्नों की शिनाख़्तगी भी यहाँ होती है । - संपादक

 

  1. रेडियो सलाम नमस्ते शुरु करने के पीछे आपका क्या मकसद था?

जयपाल रेड्डी- अमेरिका में बसे हुए सारे एशियाई लोग एवं अमेरिका में एक पहचान कायम करना। रेडियो केवल मनोरंजन का साधन नहीं है । यह ज्ञान और संस्कृति की निरंतरता और प्रोत्साहन का भी शसक्त माध्यम है । यह श्राव्यकला से जुड़ी प्रतिभाताओं को एक व्यापक मंच प्रदान करता है । आप स्वयं जानते ही हैं कि अमेरिका में एशियाई बड़ी संख्या में आ बसे हैं और भविष्य में यह संख्या लगातार बढ़ती चली जाने वाली है । जब हम किसी पराये मुल्क में स्थायी तौर पर जा बसते हैं तो कुछ खोते भी हैं । इसमें भाषा-बानी, चाल-चलन, जीवन-शैली, परंपरा, इतिहास पुरुष और समग्र चिंतन को भी शामिल कर सकते हैं । इसे बचाये रखने के लिए मेरे मन में शुरु से ही एक कसक थी । और वह यह कि कैसे समुदायिक सोच को हम जीवन के हर कर्म में विकसित करने के ऐसे कौन से रास्ते हैं जो आने वाले समय की चुनौतियों के वक़्त हमें नया विश्वास दे सकें । मैं अमेरिका आने से समय से ही ऐसा सोचा करता रहा हूँ जिसके एक उपक्रम में आप रेडियो सलाम नमस्ते को देख सकते हैं ।

 

2. भारत में कई भाषाएं हैं, तो इन लोगों को कैसे जोड़ पाएंगे?

जयपाल रेड्डी-  रेडियो सलाम नमस्ते से अभी कुल मिला कर ९ भाषाओं में कार्यक्रम प्रस्तुत किया जा रहा है और हम सभी मिलकर एक भारतीय स्वर दे पा रहे हैं।

 

3. हिंदी कविता का "कवितांजली" कार्यक्रम के बारे में आपके क्या विचार हैं?

जयपाल रेड्डी- "कवितांजली" एक मात्र कार्यक्रम है जिसके द्वारा अमेरिका के बाहर देशों से हम जुड़ पाएं हैं। हिंदी भाषा की यह अनुपम प्रस्तुति सोए हुए हिंदी भाषियों को जगा दिया है। और इसी से हमारा उत्साह बढ़ा है और जलदी ही rsnworldcom कि तैयारी शुरु हो रही है।

 

4. रेडियो सलाम नमस्ते कि भावी योजनाएं क्या हैं?

जयपाल रेड्डी- दो वर्ष पहले यह स्टेशन a.m. था जिसे f.m. पर लाया गया और आगे, अमेरिका के कई शहरों से संचालित किया जयेगा। rsn अमेरिका का पहला 24hrs nonstop देसी रेडियो का श्रेय प्राप्त कर चुका है।

 

5. अमेरिकिन आपके रेडियो को सुनते हैं या नहीं?

जयपाल रेड्डी - हाँ, बहुत सारे अमेरिकिन जो भारतीय संगीत को पसंद करते हैं, वो सुनते भी हैं और अपने पसंदीदा गीतों की फरमाइश भी करते हैं।

 

6. कोई सपना जो अभी भी रेडियो पर पूरा नहीं हो पाया है?

जयपाल रेड्डी- हाँ, मैं उस दिन का सपना देख रहा हूँ जब अमेरिका का राष्ट्र्पति अपना भाषण इस रेडियो से दे।

 

7. आपकी भावी योजना जिसपे आप काम कर रहे हैं?

जयपाल रेड्डी-  मैं इस रेडियो के साथ south asian mall शुरु कर  सारे भारतीय लोगों को जोड़ना चाहता हूँ। इसे एवरेस्ट हाइट्स के नाम से जाना जायेगा । आपके साथ मैं यह बताते साझा करते हुए खुशी का अनुभव कर रहा हूँ कि इस माल्स में लगभग 300 दुकानें होगीं जो एशियाईयों की होगीं। एक साथ कई भाषा-परिवार के लोग जब मिलेंगे, मिलते रहेंगे तो अपनी भाषा-संस्कृति को दोहराने, याद करने और उसे नियमित बनाये रखने का भी अवसर मिलेगा । हम व्यस्ततम् दौर में अपनी संस्कृति को इसी तरह अपने वाणिज्यिक उपक्रमों के बीच भी बचा सकते हैं ।

 

8. रेडियो के भविष्य पर आप क्या सोचते हैं ?

जयपाल रेड्डी-  सारे समाजों में दृश्य-माध्यम से उकताहट शुरु हो चुकी है । पश्चिम का उदाहरण आप देख ही रहे हैं । दक्षिण और एशियायी देशों में भी यह माहौल बन रहा है । रेडियो सबसे सुगम और सरल, साथ ही सस्ता माध्यम है जो मनोरंजन के साथ उससे उपयोगकर्ता को कुछ हद तक काम करने की छुट भी देता है । ऐसे में भविष्य में यह ज़्यादा लोगों और पूरी तरह समाज को अपने प्रभाव में ले सकता है ।

 

 Jaipal Reddy

Chairman, President & CEO

Everest Heights

300 E. Royal Ln #117 | Irving, TX  75039

 

ए.पी.सिंह

डैलास, युएसए 

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संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

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